नेपाल में कोरोना वायरस का कहर जारी, डर और दहशत का माहोल
बांके अस्पताल में भर्ती पांच और संक्रमितों की इलाज के दौरान मौत हो गई है। जिला कोविड संकट प्रबंधन केंद्र के एक सूत्र तेज वली ने बताया कि नेपालगंज के भेरी अस्पताल में तीन और कोहलपुर के टीचिंग अस्पताल में दो की मौत हुई है। मौत की ऐसी खबरें अब डराने लगी हैं । विज्ञों का मानना है कि स्थिति तेजी से बिगड रही है और सरकार अभी भी इसे गम्भीरता से नहीं ले रही है । वैक्सिन की खरीद में भी देश पीछे है ।
अस्पतालों में आक्सीजन की कमी के कारण कई अस्पताल नए मरीजों को नहीं ले रहे वहीं रोज मौत के मुँह मे जाने वालों की संख्या बढती जा रही है । एक नजर डालें नेपाल की स्थिति पर आखिर क्यों इतनी कम आबादी वाला देश इस समय डर और दहशत के साए में साँसे ले रहा है ।

नेपाल की कुल जनसंख्या 3 करोड़ है. यानी ये भारत की राजधानी दिल्ली की कुल आबादी से भी कुछ कम है. लेकिन समस्या ये है कि जहां एक महीने पहले तक नेपाल में प्रतिदिन 100 नए कोरोना संक्रमित मिल रहे थे, वो आंकड़ा अब प्रति दिन 10 हजार के करीब पहुंच गया है और एक महीने में संक्रमण का स्ट्राइक रेट 1200 प्रतिशत तक बढ़ गया है.

अगर भारत और नेपाल की तुलना करें तो इस समय नेपाल से ज्यादा संक्रमण अकेले दिल्ली शहर में फैला हुआ है. पूरे नेपाल में 3 करोड़ लोगों पर सिर्फ 1595 ICU बेड्स हैं. यानी इस हिसाब से 19 हजार लोगों पर एक ICU बेड है.
इसी तरह पूरे देश में केवल 480 वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं. यानी 62 हजार लोगों पर एक वेंटिलेटर है.
देश में डॉक्टर्स की भी काफी कमी है. 1 लाख लोगों पर 0.7 डॉक्टर हैं. यानी एक लाख लोगों पर एक से भी कम डॉक्टर है और ये डेटा वर्ल्ड बैंक का है.
देश के 77 में से 22 जिलों में अस्पतालों में बेड्स की भारी कमी है. ये वो जिले हैं, जहां संक्रमण अगर तेजी से फैला तो लोगों को अस्पतालों में इलाज ही नहीं मिल पाएगा. हजारों लोग बिना इलाज के ही दम तोड़ देंगे और फिलहाल इस तरह की स्थितियां यहां बनने लगी हैं.

