| जिन्दगी एक उडती चिरैया
मौत हर हाल में आना है, कमा लो जो तुझे कमाना है।
जिन्दगी से करो इबरत हासिल, मौत कब आये क्या ठिकाना हैं।।
जिन्दगी एक उडती चिरैया, इसका नहीं ठिकाना है।
जिन्दगी …
जाने कब खाली कर जाये पिंजरा, लौट कर फिर इस को आना नहीं हैं।- २
जिन्दगी एक उडती चिरैया, इसका कोई ठिकाना नही हैं।- २
जिन्दगी …
क्यों फसा हैं दुनियाँ के रंग में, ले के क्या जाएगा अपने संग में। -२
पहुँचेंगे मौत के जब फरिश्ते, मौका एक पल का पाना नही हैं। -२
जिन्दगी एक उडÞती चिरैया, इसका कोई ठिकाना नहं हैं।
जिन्दगी …
घर में होगी तेरे गाड मोटर, हीरे मोती का अम्बार होगा।-२
सोच लो बस सिवा एक कफन के, और कुछ जाना नही हैं।-२
जिन्दगी एक उडÞती चिरैया, इसका कोई ठिकाना नही हैं।
जिन्दगी …
कजा ले लेगी ए जान तेरा, माल ले लेंगे सब हिस्से वाले।- २
जिसका हक था वो अब ले लिया है, अब तो तेरा जमाना नही है।-२
जिन्दगी एक उडÞती चिरैया, इसका कोई ठिकाना नही हैं।
जिन्दगी …
जिस्म से रूह निकलेगी जिस दिन, लेके तुमको लेटाएगें बाहर।-२
जिस महल को बनाया था सैयद, अब उसी में ठिकाना नही हैं।-२
जिन्दगी …
जाने कब खाली कर जाये पिंजरा ….।
नेपालगन्ज्ा- ५ गणेशपुर, बाँके |
रोक सको तो रोक लोमुक्ता झा
इक छोटी सी चिडिÞया का चह चहाना
जालिम दुनियाँ को रास न आया !
बेदर्दों ने उस के पर कतर दिए
नाहक चिडिÞया ने दुख पाया !
उन्मुक्त गगन में उडÞान भरना
चिडिÞया का नैर्सर्गिक अधिकार था !
मगर दुनियावालों को अपने अहं से प्यार था !
हाथपांव बंधे हैं, कमरे में बन्द हैं
उन्मुक्त गगन में उडÞनेवाले
खुशनसीब चन्द हैं !
मगर अब यह दादागिरी
दुनियां की नहीं चलेगी
हर चिडिÞया अपनी मर्जी से
आसमां में उडन भरेगी !
वी.ए.एम.एस., अलीगढ |
वक्त ठहर जा जरा
-देवेन्द्र कलवार
ऐ वक्त ठहर जा जरा
बहार आना अभी बाकी है
ऐ प्यार के बादल बरस जा जरा
तेरे रस में भीगना अभी बाँकी हैऐ चमन !
मुस्कुरा दो जरा
दिल से दिल तो मिल गए
मगर आंखे चार होना अभी बांकी है।
पहले बहती हवा उसकी खुश्बू लाती थी
उस का हाले-दिल बयां करनेवाला
सन्देशा भी साथ लाती थी
कहती थी, चल साथ मेरे
मैं जन्नत का सैर करा दूंगी
ऐ बहती हवा, रुक जा जरा
तुझसे दो बातें करना अभी बाँकी है।
डल पे पंछी की जोड देख
जाने क्यों मुझर्ेर् इष्र्या होती थी
उनकी बातें सुन-सुन
मैं सपनों में खो जाता
उनकी बेफिक्र दुनिया देख-देख
मैं अपना सुधबुध खो जाता
ऐ कोयल रुक जा जरा
तुझ से बातें करना बांकी है।
ऐ वक्त ठहर जा जरा
बहार आना अभी बांकी है
ऐ प्यार के बादल बरस जा जरा
तेरे रस में भीगना अभी बांकी है।
हेटौडा-४ मकवानपुर |