सेनिटरी पैड पर कर, कितना उचित ? : अंशु झा
अंशु कुमारी झा, हिमालिनी अंक ऑक्टोबर 2021 । प्रकृति ने महिला को वरदान स्वरूप मासिक धर्म (रजस्वला) प्रदान किया है जिससे उन्हें मां बनने का गौरव प्राप्त होता है । जब लड़कियां १० से १२ की उम्र में प्रवेश करती हैं तो उसी समय एस्ट्रोजेन तथा प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स के कारण रजस्वला होता है जो ४० से ५० वर्ष तक प्रत्येक महीना में होता है । रजस्वला में एक निश्चित समय तक महिला की योनि से रक्तश्राव होता है ।
यह जानकारी जब समाज शिक्षित हुआ तब पता चला । नहीं तो उससे पहले मासिक धर्म के सम्बन्ध में भी बहुत सारी भ्रान्तियां जग जाहिर थीं । जिसका प्रभाव अभी भी आंशिक रूप से समाज में यथावत है । मानव में चेतना आने के बाद रजस्वला विषय के लिए भी एक नियम बनाया गया । महिलाओं को रजस्वला अवधि तक एक निश्चित सीमा में रहने के लिए कहा गया क्योंकि उस समय महिला की अवस्था कुछ पीड़ादायी ही होती है । उस जमाने की महिलाएं रक्तश्राव को पोछने तथा उससे अपने आपको सुरक्षित करने के लिए कपड़ा का प्रयोग करती थी । शिक्षा का अभाव होने के कारण बहुत सारी औरतें व किशोरियां मासिक धर्म के समय साफ–सफाई पर ध्यान नहीं दे पाती थी जिससे उन्हें विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगों का सामना करना पड़ता था । किसी –किसी की उक्त संक्रमण से अकाल मृत्यु भी हो जाती थी ।
फिलहाल समाज वैज्ञानिक युग में है तो महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेनिटरी पैड का निर्माण किया गया जो मासिक धर्म के समय रक्तश्राव को नहीं फैलने देने के लिए तथा संक्रमण से बचने के लिए बहुत ही उपयुक्त है । उक्त पैड का प्रयोग धड़ल्ले से किया जाने लगा है । हम औरतें मासिक धर्म के समय जो चार दिनों तक कुछ कार्य करने तथा कहीं आने–जाने से हिचकिचाते थे वो सेनिटरी पैड के प्रयोग से अपने आपको सुरक्षित महसूस करने लगे । उक्त पैड के प्रयोग से अब हम औरतें महीने के वो चार दिन भी आराम नहीं करते और पुरुषों के कंधा से कंधा मिलाकर हरेक कार्य में साथ देते ।
जिस प्रकार भोजन, वस्त्र और आवास हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है उसी प्रकार हम औरतों के लिए सेनिटरी पैड अति आवश्यक है, यह बात हमारे परिवार, समाज तथा राष्ट्र के मुखिया को समझनी चाहिए परन्तु बिडम्बना यह है कि हमारे देश के शासक ने सैनिटरी पैड तथा महीनावारी में आवश्यक सामग्री पर भी टैक्स लगा रखा है । उसे लगता है कि शायद हम पैड का प्रयोग ऐशो आराम के लिए करते हैं । इसलिए पैड पर भी टैक्स लगाया है । सरकार को कौन बताएगा कि सेनिटरी पैड हम विलासिता के लिए प्रयोग नहीं करते हैं, औरतों के लिए यह एक आवश्यक वस्तु है । क्या सरकार इतनी गिर गई कि अब वह मासिकधर्म में कर अर्थात लाल कर से सन्दूक भरेगी ?
इस लाल कर के विरुद्ध कानून के विद्यार्थी अभ्युदय भेटवाल और श्रीना नेपाल ने सर्वोच्च अदालत में मुकदमा भी दायर किया है । हमारे समाज में इस पैड को महिलाओं से सम्बन्धित वस्तु या विषय समझा जाता है जो कि गलत है । मासिक धर्म में प्रयोग होने वाली चीजें सामाजिक वस्तु ही है । समाज का अगर कोई भी व्यक्ति गन्दा है तो उस गन्दगी से समाज भी प्रभावित होता हे । कुछ दिन पहले इस विषय को लेकर युवा युवतियों ने देश के विभिन्न स्थानों पर उक्त कर के विरुद्ध विभिन्न मांगों के साथ प्रदर्शन भी किया है । सही में सैनिटरी पैड पर कर लगाना निंदनीय है ।
समग्र में हमारा देश बहुत सम्पन्न नहीं है । जो सुखी सम्पन्न हैं वह तो महंगी वस्तु खरीदने में सक्षम है परन्तु जो गरीब है, जिसे दो वक्त का खाना भी बडी मुश्किल से मिलता है वह महंगा सेनिटरी पैड कहां से खरीद पाएगा, क्योंकि यह एक दिन की बात नहीं है । इस विषय पर सरकार को गम्भीरता से सोचना चाहिए क्योंकि यह समस्या हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है । हम औरतें भी समाज के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पुरुष । अगर औरतें मासिक तथा शारीरिक दोनों दृष्टिकोण से स्वस्थ्य है तो हमारा समाज भी उतना स्वस्थ्य तथा स्वच्छ रहेगा । महीनावारी प्रक्रिया सन्तानोत्पादन से जुड़ी हुई है । जो विषय बहुत संवेदनशील है । गणतन्त्र नेपाल के संविधान में भी महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था तथा अधिकार उल्लेख किया गया है । उक्त अधिकार को ध्यान में रखते हुए सरकार को उचित मूल्य पर सैनिटरी पैड हरेक महिलाओं को उपलब्ध करना चाहिए तथा विपन्न महिलाओं के लिए निःशुल्क पैड वितरण करवाना चाहिए ताकि समाज स्वस्थ्य और स्वच्छ बनें ।

बल्खु, काठमांडू नेपाल |

