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5 फरवरी शनिवार को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सिद्ध योग में – सरस्वती पूजन मुहूर्त : राधाकान्त शास्त्री

 


*इस वर्ष पूजन का मुहूर्त 5 फरवरी दिन शनिवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और सिद्धि योग में मनाया जाएगा। इस दिन माता सरस्वती का पूजन प्रातः 6:45 बजे के बाद से ही आरम्भ हो जाएगा और रात्रि 9:30 तक किया जाएगा। इसमे विशेष कर प्रातः 7 बजे से 10 बजे तक कुम्भ और मीन लग्न और 11:36 से 3:45 तक वृष और मिथुन लग्न माता सरस्वती के आराधना के लिए शुभ होगा। जबकि विशेष स्थिर लग्न कुम्भ प्रातः 7 से 8:31 तक और वृष लग्न दिन के 11:36 से मध्याह्न 1:32 तक सर्वोत्तम होगा।वही विद्यालय और कोचिंग आदि शैक्षणिक संस्थानों आदि चल कार्यों के लिए द्विस्वभाव और चर लग्न प्रातः 8:36 से 11:31 तक और 1:32 से 3:45 तक श्रेष्ठ रहेगा।*
हमारे शास्त्रों में प्रकृति के बदलाव के साथ साथ अलग अलग उत्सव मनाए जाते हैं। पौष एवं माघ कृष्ण पक्ष के शीत के पश्चात शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र के साथ ही बसंत ऋतु आरंभ होती है। *इस ऋतु के आरंभ होने के पांचवें दिन बसंत पंचमी का उत्सव आदि काल से मनाया जाता है।* बसंत पंचमी उत्सव मां सरस्वती के जन्मदिन का उत्सव भी है। इस वर्ष बसंत पंचमी 5 फरवरी दिन शनिवार को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती मां की पूजा एवं यज्ञ होता है। *सबको अपनी मेधा शक्ति बढ़ाने लिए मां सरस्वती के उपासना करनी चाहिए।* सरस्वती ज्ञान की  देवी हैं इसलिए उन्हें वाग्देवी और शारदा नाम से भी जाना जाता है। गायन, वादन,नृत्य, कौशल, शिक्षा बुद्धि, विवेक एवं विभिन्न बौद्धिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए मां शारदे का आशीर्वाद आवश्यक होता है। इसीलिए बसंत पंचमी पर्व के दिन सरस्वती मां का जन्मदिन मना कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।

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*सरस्वती पूजन:-*
पूजन के लिए विद्यार्थी अथवा सामान्य व्यक्तियों को भी प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत होकर पीले वस्त्र धारण करें। मस्तक पर पीला तिलक लगाएं। सरस्वती मां की प्रतिमा के सामने बैठकर सरस्वती वंदना करें। मां सरस्वती का सफेद अथवा पीले पुष्पों से पूजन करें। तत्पश्चात पीले मिष्ठान से भगवती सरस्वती को भोग लगाएं और मां से विद्या बुद्धि देने की प्रार्थना करें। सरस्वती पूजन के बाद सरस्वती कवच के पाठ के साथ साथ मंत्र जप भी आवश्यक एवं लाभकारी होता है। इनमें से किसी एक मंत्र का विशेष जप किया जा सकता है।

ॐ भूर्भुव: स्व: सरस्वती देव्यै नम:।।

ॐ ह्रीं ऐं ह्लीं सरस्वत्यै नमः।।

ॐ क्लीं वाग्वादिनी वद वद स्वाहा।।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं वाग्वादिन्यै नमः।।
*सरस्वती पूजन सामान्य विधि:-*
प्रातः 6:45 के बाद किसी भी शुभ मुहूर्त में अपने समय के अनुसार वसन्त पञ्चमी तिथि में सरस्वती पूजा, पूरा दिन करना श्रेष्ठ है।

*सरस्वती पूजन में पूजन मंडप सजा कर माता जी के मूर्ति या फ़ोटो को किसी चौकी पर स्थापित कर साज सज्जा से अलंकृत कर, पूजन सामग्री व्यवस्थित कर माता जी के सामने आसन लगा कर बैठें एवं जलपात्र में गंगा पूजन कर आचमन, पवित्री , आसन शुद्धि, पृथ्वी पूजन , शिखा स्पर्श, गायत्री स्मरण, तिलक धारण , पवित्री धारण पूर्वक दीप प्रज्ज्वलन कर दिशा शुद्धि करते हुवे मातृ पितृ गुरु वन्दना कर स्वस्तिवाचन करें,पुनः पूजन संकल्प कर , गणपति गौरी पूजन, कलश स्थापन, पँचदेवता पूजन नवग्रह पूजन कर वाद्य यंत्र पूजन वेद पूजन, शास्त्र पूजन लेखनी पूजन माता जी का ध्यान पूर्वक आवाहन कर प्राणप्रतिष्ठा पूर्वक सविध षोडशोपचार पूजन करें। एवं माता जी को आम्र मंजरी कलम और वेद, पुराण, शास्त्र, पुस्तक एवं डायरी अर्पित कर प्रार्थना करें। और गणेशाथर्वशीर्ष, श्री सूक्त, सरस्वती कवच, शिवतांडव आदि स्तोत्रों का पाठ करें।*

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*पुनः स्थंडिल हवन कुंड बना कर पवित्र कर अबीर से रेखा कर अग्नि देव का आवाहन स्थापन पूजन पूर्वक पंचवारुणि हवन पूर्वक गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, एवं आवाहित देवताओं के निमित्त क्रमशः हवन करते हुवे माता जी के निमित्त खीर से हवन कर खीर एवं नारियल से पूर्णाहुति वसोद्धारा और प्रार्थना पुष्पांजलि और आरती करें।*

*सरस्वती वन्दना :-*

या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता
या वीणा वरदण्ड मण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि र्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥1।।

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमा माद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणी मभयदां जाड्यान्धकारा पहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

जग सिरमौर बनें जो,
हम भी,

वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
अम्ब विमल मति दे।

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

साहस शील हृदय में भर दे,

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जीवन त्याग-तपोमर कर दे,

संयम सत्य स्नेह का वर दे,

स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥
अम्ब विमल मति दे।

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम

मानवता का त्रास हरें हम,

सीता, सावित्री, दुर्गा मां,

फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥
अम्ब विमल मति दे।

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

*माता सरस्वती सबको उत्तम विद्या बुद्धि विचार सम्पन्नता प्रदान कर सबके अंदर के समस्त विकृतियों को जैसे… काम , क्रोध, लोभ, मोह, मद, अज्ञानता , एवं प्रमाद दूर कर,समस्त ज्ञान विज्ञान, संस्कार, सदविचार, विनम्रता, विवेक, एवं प्रसन्नता से पूर्ण कर जीवन को सही दिशा प्रदान करें। श्री गणेश सरस्वती की विशेष कृपा सब पर बनी रहे, सबके समस्त अज्ञानता, कष्ट, अर्थाभाव , दुख, दारिद्रयता , माता जी के आगमन से समाप्त हो और सबका जीवन सम्पन्नता, प्रसन्नता और खुशियों से भर जाए। गणेश जी के साथ माता सरस्वती जी अपनी कृपा दृष्टि सबके ऊपर बनाते हुवे सुख शान्ति समृद्धि सम्पूर्ण प्रसन्नता एवं अपार धन की वर्षा करें, सबका जीवन आनंदमय, मंगलमय हो, सबका जीवन सुख उत्तम विद्या बुद्धि सुख सौभाग्य, उत्तम आयु आरोग्यता सम्पन्नता एवं सम्पूर्ण प्रसन्नता से भर जाए।सम्पूर्ण व्रत पूजन के साफल्यता लिए हमारी हार्दिक शुभकामना…*
*✍🏻 ✍🏻 ज्योतिषाचार्य*
*आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*🌹शुभम बिहार यज्ञ ज्योतिष आश्रम*🌹*
*रजिस्टार कालोनी , पश्चिम करगहिया रोड कालीबाग बेतिया- 845438 (बिहार)*
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ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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