चीन के विदेश मंत्री से कमला नदी में अवैध उत्खनन तुरन्त रोकने की मांग

काठमांडू , २५ मार्च २०२२ | चीन के विदेश मंत्री वांग यी २५ मार्च को काठमांडू पहुंच रहें हैं | इस यात्रा को MCC का कोम्पंसेसन के रूप में देखा जारहा है | चीन के विदेश मंत्री वांग यी की पूरी कोशिस रहेगी की बहुचर्चित बिआरआई को नेपाल में लागु कराया जाय | उधर मधेश प्रदेश के कमला से एक प्रतिनिधि मंडल काठमांडू आया हुआ है जो की कमला बचाओ अभियान को लेकर चीनी विदेश मंत्री का विरोध कर रहा है | कमला बचाओ अभियान के प्रतिनिधि मंडल ने आरोप लगाया है की चीनी कम्पनी द्वारा कमला नदी का दोहन किया जा रहा है जिसे की तुरंत रोका जाय | नेपाल के चुरे क्षेत्र स्थित सिंधुली से निकलनेवाली पवित्र कमला नदी नेपाल और उत्तर बिहार, दोनों के लिए जीवन दायिनी मानी जाती है। मिथिलांचल में कमला का वही स्थान है जैसा गंगा का है, इसलिए इसे मिथिला का गंगा भी कहा जाता है।
‘कमला नदी बचाव ’अभियानियों ने कहा है कि चीनी विदेश मंत्री पहले कमला में उत्खनन का काम पर रोक लगावें उसके बाद ही किसी समझौता पर हस्ताक्षर करें | कमला में चीनी द्वारा उत्खनन एक सोची समझी मधेश के जनता के बिरुद्ध साजिश है | ‘कमला नदी बचाव ’अभियानियों ने नेपाल सरकार से भी मांग की है कि सरकार की गलत निति का फायदा उठा कर चीन मधेश में घुस गया है | नेपाल सरकार को जल्द ही अपनी निति में परिवर्तन करके उत्खनन पर रोक लगाना चाहिए |
नेपाल और भारत के जनजीवन से जुड़े हुए नेपाल की ‘कमला नदी बचाव’ अभियानियों का एक दल हिमालिनी मासिक तथा हिमालिनी डटकम के कार्यालय में आकर यह बात कही। अभियान के संयोजक विक्रम यादव के नेतृत्व में आये प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि कमला नदी की सांस्कृतिक तथा धार्मिक महत्व, राज्य की ओर से कमला नदी पर हो रहे दोहन एक गंभीर विषय है जिसे तत्काल सुलझा लेना चाहिए ।
अभियान के संयोजक यादव ने कहा कि जीवन दायिनी कमला नदी हमारी संस्कृति की पहचान भी है । उन्होंने कहा– ‘वर्तमान समय में कमला नदी का अस्तित्व खतरे में है । अवैध उत्खनन की वज़ह नदी का दोहन हो रहा है ।’ यादव के अनुसार कमला नदी का संरक्षण और सुरक्षा के मुख्य उद्देश्य से ही अभियान संचालित है, जिसमें कई युवा अभियानी संलग्न हैं ।
उन्होंने कहा है कि कमला नदी विनाश के कारण नेपाल के तराई क्षेत्र में रहनेवाले आम जनता की ही नहीं, चुरे क्षेत्र तथा सीमा क्षेत्र से जुड़े हुए भारतीय शहर भी प्रत्यक्ष रुप में प्रभावित है । उनका यह भी कहना है कि अगर इसी तरह कमला में दोहन जारी रहेगा तो भविष्य में सम्पूर्ण मधेश प्रदेश ही नहीं, नेपाल के पहाडी क्षेत्र से लेकर भारत बिहार के कई शहर संकट में पड़ सकते हैं । इसी चेतावनी के साथ जारी अभियान में जुड़ने के लिए भी संयोजक यादव ने आम लोगों से भी आग्रह किया । भेटवार्ता में अभियान के संयोजक यादव के साथ अन्य अभियानी धनेन्द्र संग्रौला, रामचन्द्र मण्डल और शंकरप्रसाद बार्हकोटी भी सहभागी रहे ।

नेपाल के चुरे क्षेत्र स्थित सिंधुली से निकलनेवाली पवित्र कमला नदी नेपाल और उत्तर बिहार, दोनों के लिए जीवन दायिनी मानी जाती है। मिथिलांचल में कमला का वही स्थान है जैसा गंगा का है, इसलिए इसे मिथिला का गंगा भी कहा जाता है।
धार्मिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी कमला नदी इस क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण और उपयोगी है क्योंकि भारत और नेपाल दोनों देशों के लगभग 50 से 60 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है ,बल्कि इसी के दम पर मिथिला को “अन्न का भंडार” कहा जाता है। बिहार के सिर्फ मधुबनी जिले में 44,960 हेक्टेयर भूमि में इससे सिंचाई होती है। मगर अफ़सोस कि मिथिलांचल की संस्कृति, सभ्यता एबम अर्थब्यबस्था का पालन पोषण करनेवाली हमारी माँ तुल्य कमला नदी को चीन अपनी साजिश का शिकार बना लिया है, जिससे इसके अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है।

चीन की साजिश- नेपाल के मधेश प्रदेश की सरकार द्वारा जारी किये गये एक आधिकारिक पत्र से, कमला में चीन के नापाक मंसूबों का पता चला है। हिमालिनी को प्राप्त एक गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, प्रदेश 2 सरकार के उद्योग, पर्यटन तथा वन मंत्रालय द्वारा कमला नदी को चीन की निर्माण कम्पनी china railway २ engineering group co limited को लीज पर दे दिया गया है।



