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नेपाल–भारत–संबंध सुदृढ़ीकरण हेतु, संतोष साह फाउंडेशन की पहल

 
भारत के पूर्व मंत्री श्री संजय पासवान को सम्मानित करते श्री संतोष साह फाउंडेशन के पदाधिकारी

नेपाल और भारत का संबंध कोई एक दिन का संबंध नहीं है । पौराणिक काल का संबंध है दोनों देशों के बीच । माँ जानकी की बात हो या फिर गौतम बुद्ध की । माँ जानकी को हम बेटी मानते हैं तो राम को जमाई । गौतम बुद्ध का जन्म स्थान नेपाल है तो ज्ञान की खोज में वो बोध गया गए, शुरु से ही दोनों देश के बीच का संबंध बहुत मधुर रहा है । यूँ भी कह सकते हैं कि बोर्डर से जुड़े क्षेत्र में रहने वाला आम आदमी आज भी कोई अंतर नहीं समझता है दोनों देश के बीच । हाँ ये भी सच है कि बीते कुछ सालों में दोनों देश के बीच के संबंध में कुछ खटास लगातार आती दिख रही है और ये बहुत ही चिन्ता का विषय है । दोनों देशों के आम नागरिक इस विषय को लेकर बेहद चिन्तित हैं क्योंकि दोनों देश के बीच न केवल रोटी–बेटी का संबंध है वरन ये दोनों देश एक दूसरे से बेहद मिलते जुलते हैं चाहे धर्म संस्कृति की बात हो या वेशभूषा, पहनावा या फिर खानपान की बात हो । नेपाल की बेटी अगर विवाह के बाद भारत जाती है तो उसे जरा सा फर्क नहीं मिलता, उसी तरह जब भारत की बेटी यहाँ विवाह कर आती है तो उसे बहुत ज्यादा अंतर महसूस नहीं होता है ।


समय के साथ–साथ परिवत्र्तन होना स्वाभाविक है लेकिन परिवत्र्तन अगर अच्छे के लिए हो तो बहुत बेहतर वहीं जब गलत सोच को लेकर परिवत्र्तन हो तो ये किसी के भी हित में नहीं होता है । दोनों देश के बीच लगातार खटास बढ़ रही है इस बात को आम नागरिक समझ रहें हैं क्योंकि अब रिश्ते बदल रहें हैं । अब नेपाल की बेटियां भारत में विवाह नहीं करना चाहती और न ही भारत की बेटियां अब नेपाल में अपना रिश्ता चाहती हैं ।
इस समस्या का समाधान कैसे हो ? कैसे दोनों देशों के संबंध मजबूत हो ? या फिर दोनों देश के बीच रोटी–बेटी के संबंध को कैसे महफूज रखें ? दोनों देश कैसे तरक्की करें ? इन बातों को लेकर दोनों देश के नागरिक के बीच बहस का होना जरूरी है और इसमें बिहार सेतु का काम कर सकता है । बिहार के साथ नेपाल का अपना अलग ही रिश्ता है । नेपाल और बिहार करिब ७२९ किलोमीटर सीमा साझा करते हैं । नेपाल का तराई भाग और भारत के बिहार का संबंध आरम्भ से ही बहुत मजबूत रहा है । यह सच्चाई है कि दोनों देश के बीच बिहार एक ऐसी सीढ़ी है जिसपर चढ़कर दोनों देश की अवस्था को बेहतर से बेहतर बनाया जा सकता है ।
इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर नेपाल स्थित संतोष साह फाउंडेशन का एक प्रतिनिधिमंडल २५ मार्च को पटना पहुँचा । जिसमें, संतोष शाह फाउंडेशन के अध्यक्ष संतोष साह, वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह, पूर्व सांसद रत्ना गुरुंग, राजनीतिक सलाहकार अनील महासेठ, सांस्कृतिक सम्पदा संरक्षण विद् राँबिन लामा, और उप–प्राध्यापक कंचना झा शामिल थे । एक उद्देश्य के तहत ये प्रतिनिधिमंडल भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्क्ता गुरु प्रसाद पासवान के नेतृत्व में बिहार यंग थिंकर्स फोरम जिसमें प्रेरणा कुमारी, समृद्ध वर्मा, निशांत आजाद और रोहित के साथ तीन दिवसीय बैठक में भाग लिया । इस बैठक में बिहार और नेपाल के बीच पीपुल टु पीपुल डायलॉग स्थापित करने की बात हुई, साथ ही नेपाल और बिहार के बीच सांस्कृतिक रिश्ते में मजबूती मिले, इन बातों को केन्द्र में रखकर कुछ मुलाकातें भी की गई ।

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बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री तार किशोर के साथ इस प्रतिनिधिमंडल की भेंट हुई जहाँ उपमुख्यमंत्री ने कहा कि, ये सच है कि पिछले कुछ दिनों में नेपाल के साथ हमारी मित्रता में कमी आई है । मगर इस खटास को दूर करने में हमारा युवा वर्ग बहुत सजग और सचेत है । उन्होंने कहा कि इतिहास रचने की शक्ति युवाओं के पास है । आज का युग विज्ञान का युग है । बच्चें बहुत कुछ जानते हैं और दूर की सोचते हैं । वो अपनी संस्कृति , अपने धर्म के प्रति बहुत सजग है । वो जानते हैं कि नेपाल और भारत कभी एक दूसरे के प्रति गलत नजरिया नहीं रख सकते हैं । दोनों देश एक दूसरे के पूरक हैं । जैसे सिया बिनु राम नहीं , रामायण हमारी धार्मिक आस्था का प्रतीक है और जब तक रामायण है नेपाल रहेगा और बिहार भी । इसलिए दोनों का अटूट संबंध है । इसे कोई अलग नहीं कर सकता । आगे उन्होंने कहा कि – जितनी चिंता आप लोगों को है उतनी ही चिंता हमें भी है , दोनों देश के सबंध को बनाए रखने के लिए दोनों देश को एक साथ मिलकर चलना होगा । हम तो हैं ही अच्छी बात ये है कि आज की युवापीढ़ी भी इस बात को बहुत गहराई से ले रही है और इसी का परिणाम यह है कि नेपाल की प्रतिनिधिमंडल आज हमसे मिलने यहाँ तक आई है ।
इसी औपचारिक मुलाकात के तहत नेपाल प्रतिनिधिमंडल ने बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश नारायण जी से मुलाकात की । बहुत उत्साह और सम्मान के साथ वो नेपाल के इस टीम से मिले । इस भेंट को उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण बताया । उन्होनें कहा कि दरअसल हम भी कुछ दिनों से इस तरह की मुलाकात चाह रहे थे । इसी सिलसिले में युवाओं से हमारी बातचीत चल रही थी । जिसे गुरु प्रसाद और उनकी टीम ने बहुत ही अच्छी तरह से साकार किया है । बिहार और नेपाल के संबंधों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि – माँ जानकी के प्रति मेरी अपनी और आम नागरिक की अटूट श्रद्धा है जिसे हम किसी भी हाल में संजो कर रखना चाहते हैं । ये कुछ वर्षो का नहीं, युग–युगांतर का संबंध है । आगे उन्होंने कहा कि सीता हमारी बेटी हैं, नेपाल न केवल हमारा पड़ोसी देश वरन उससे हमारा पौराणिक बंधन है । हमें एक दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा ।

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नेपाल प्रतिनिधियों ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री संजय पासवान से भी मुलाकात की । उन्होंने अपने इस मुलाकात को आनेवाले समय के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना । उन्होंने कहा कि मैं माँ जानकी को बहुत मानता हूँ, माता जानकी के दर्शन के लिए सदैव जनकपुर आता जाता रहता हूँ । आम नागरिक के मन में कोई खटास नहीं है । वो हमेशा दोनों देशों को मजबूत देखना चाहते हैं । राजनीतिक कारणों से अगर कुछ मन मुटाव हो भी जाता है तो कुछ ही दिनों में फिर सबकुछ सहज हो जाता है । ये है हमारा भाईचारा जिसे कोई तोड़ नहीं सकता । मगर कुछ दिनों से जाना–आना उतना सहज नहीं रह गया है । हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहें हैं जिसकी एक अच्छी शुरुआत हो रही है ।
संजय पासवान जी ने सीता के नाम पर एक महिला विश्वविद्यालय निर्माण करने की भी बात की । अपने साथ के मुलाकात में उन्होंने कहा कि समय और समय की मांग क्या है ? इसको देखते हुए काम करना चाहिए, काम के प्रति लोगों में वफदारी होनी चाहिए, नेपाल के बारे में उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत दोनों मौसेरे भाई है, और मौसेरे भाई कभी लड़ते नहीं हैं वरन एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं । उन्होंने आगे कहा कि नेपाल के प्रति हमारी जो आस्था है जो किसी और देश के प्रति हो ही नहीं सकती । बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि समय का बहुत महत्व है सो समय का हमेशा ध्यान रखना चाहिए । कर्म पर ध्यान रहना चाहिए , ।
नेपाल और भारत के संबंधों को लेकर श्री संजय पासवान ने जो योगदान दिया है उसके लिए संतोष साह फाउंडेशन की ओर से पासवान को नेपाल भारत गुडविल एम्बेसडर से सम्मानित किया गया ।

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प्रतिनिधिमण्डल और पटना विश्वविद्यालय के साथ मुलाकात
पटना पहँुचे सन्तोष साह फाउन्डेसन के प्रतिनिधिमण्डल ने पटना विश्वविद्यालय के उपकुलपति श्री गिरिश कुमार चौधरी से भी मुलाकात की । इस मुलाकात में उपकुलपति चौधरी ने बताया कि पटना विश्वविद्यालय के प्रति आरम्भ से ही नेपाली विद्यार्थियों में आकर्षण रहा है । अभी भी काफी संख्या में नेपाल के विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं । उन्होने नेपाली विद्यार्थियों के लिए आगे भी विशेष सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया ।

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