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दर्शन से स्मरण हैं सर्वोपरि : मोरारी बापू

 

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर
दर्शन से सुमिरन(दर्शन) सर्वोपरि हैं। उपयुक्त बातें मोरारी बापू जनकपुरधाम के तिरहुतिया गाछी में कथा के चौथे दिन व्यास पीठ से कहा। बापू ने कहा कि राजा दशरथ को मृत्यु शय्या पर थे तो अंतिम समय में राम का दर्शन नहीं हो सका। लेकिन वे राम का सदैव सुमिरन करते रहे। दशरथ को मुक्ति मिली। बापू ने धर्म ग्रंथों के भाषा के शुद्धि पर नहीं जाना चाहिए। आम खाना चाहिए पेड़ नहीं गिनना चाहिए। हमारे महापुरुषों ने जिस धार्मिक ग्रंथों की रचना की है। उनमें लिखी बातों को जीवन में अमलकरना चाहिए।बापू ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण की रचना की। सरल भाषा में लिखी रामायण पूरे हिन्दू धर्मावलंबियों के बीच लोकप्रिय हुआ। मानस पाठ घर घर में हिन्दू करें यही कामना है। बापू ने युवा वर्ग द्वारा मद्य, मदिरा के सेवन पर चिंता जतायी।
बापू के कथा में मधेश प्रदेश के गवर्नर हरि शंकर मिश्र, गृह मंत्री भरत साह, भारतीय दूतावास वीरगंज के महा बाणिज्य दूत नीतेश कुमार, बिधायक रामाशीष यादब, पूर्व मेयर बजरंग साह सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

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