Mon. Aug 17th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

“संकल्प” (कविता) : डा. भिष्म कुमार भुषाल

 

कविता “संकल्प”, कवि-डा. भिष्म कुमार भुषाल,

अनुवादक : बिम्मी कालिन्दी शर्मा

मैं कहता हूं सत्य का मन्त्र,
यदि कान.से सुनने कि हिम्मत
हैं तो सुनो,
अगर पी सकते हो तो नीम का पत्ता
पिलो जुस की तरह,
जो बोल कर वह जिव्हा से रसिले वचन
शहद में वीष घोल देते हैं,
जो
तुच्छ स्वार्थ कि खातिर अपने भेष बदलने वाले ए भेंडियों के अवतार हैं !

मैं जलाता हूं चेतना का दीआ निरन्तर,
तेल हैं मैनें ईसमे डाला विचार और विवेक के निर्झर,
अपनी जंघाओं को बनाओ ईतना मजबूत की
आषाढ में नदी में आई उफान से,
खींच कर ले जा सकों,
स्वर्ग के नव-द्वार में,
कोयल अब नहीं छिपती
बाज को देख कर झाडी में !

यह भी पढें   देशभर मनसुनी वायुको प्रभाव, सुदूरपश्चिम में बहुत भारी बारिश की संभावना

कौन है वह देश यह लुट्ने वाला ?
जो उंचे घरों में बैठ कर,
जैसे मधुमक्खीयों को खा जाती है बिर्नी उसके छत्ते में घूस कर ,

एक दिन घसिट कर ले आएगें
तो उतर जाएगी उनके चेहरे की सारी रौनकें,
जनता अब जाग गयी हैं,
नहीं मीटा पाओगे ईन्हें अब
घून की तरह,

जो जी रहे हैं जिन्दगी,
केवल आयातित विचारों से लैस हो कर,
जो अपने आंगन की गंदगी का दोष
देते हैं पडोसियों को,
ऐसों से क्या उम्मीद करे उनसे
कि जो दुसरों का बिगाड कर ही खुश होते हैं,
हमारे ही प्रयत्न से एक दिन
लाखों बूंद ओश से घडा भरेगा !

यह भी पढें   आठ - दलीय  अग्रगामी मोर्चा  की घोषणा : विनोदकुमार विमल

अपना हो या कोई पराया
लो पक्ष हमेशा सुकर्म का,
अपने अतंस से ही पहचानों
मार्ग धर्म और अधर्म का,
जो जननी और जन्मभूमी की
वक्ष में गहरा चीरा लगाते हैं,
उन दुष्टों के पिछे-पिछे,
चलने वाले दीमक मत बनो !!

नेपाली से हिंदी अनुवाद : बिम्मी कालिन्दी शर्मा

कवि भिष्म कुमार भुषाल

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com