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कल मंगलवार कार्तिक पूर्णिमा को साल का आखिरी आशिंक चंद्रग्रहण

 


इस बार कल कार्तिक पूर्णिमा को प्रातः 4 बजे से प्रातः 8 बजे तक स्नान दान और भोजन कर लिया जायेगा।
यह ग्रहण अपने यहां सायं 5 बजे से आरंभ होकर सायं 6:20 तक रहेगा। प्रातः 8 बजे से 2 बजे तक अन्न न खा कर फल, फलाहार चाय दूध और मिठाइयों को लिया जा सकता है। और संभव हो सके तो सायं 5 बजे से रात्रि 6:20 बजे तक कुछ भी ग्रहण न करें।
अपने यहां ग्रहण सायं 5 बजे से दिखाई देने की वजह से इसका सूतक दृश्य ग्रहण के 9 घंटा पहले यानी प्रातः 8 बजे से मान्य होगा। और उसी समय से ग्रहण से संबंधित सभी धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जाएगा। इस चंद्र ग्रहण का समय सायं 5 बजे से सायं 6:20 बजे तक प्रभावी रहेगा। और अपने यहां यह ग्रहण शाम 5 बजे से दिखना शुरू हो जाएगा जिसका सायं 06 बजकर 20 मिनट पर मोक्ष हो जायेगा। और ग्रहण के मोक्षकाल सायं 6:20 के बाद स्नान दान कर भोजन किया जा सकेगा।
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगने जा रहा है। और ग्रहण के समय मेष राशि में राहु मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही इनके सप्तम भाव में सूर्य बुध, शुक्र और केतु ग्रह सभी ग्रह तुला राशि में मौजूद रहेंगे। इस समय शुक्र अपनी राशि तुला में और शनि मकर, राशि में तो गुरु अपनी मीन राशि में मौजूद रहेंगे।
*8 नवंबर को रात्रि 6:20 तक चंद्र ग्रहण की अवधि 1 घंटा 20 मिनट रहने देव दीपावली कल 7 नवंबर सोमवार को मनाई जाएगी।*

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कार्तिक पूर्णिमा के सायं काल में देव दीपावली मनाया जाता है लेकिन चंद्र ग्रहण की वजह से 8 नवंबर बजाय 7 नवंबर को व्रत की पूर्णिमा एवं जो अब तक तुलसी विवाह नही किए उनके लिए तुलसी विवाह पूर्वक कार्तिक महाव्रत का उद्यापन किया जाएगा। कल कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाला चंद्र ग्रहण साल 2022 का अंतिम चंद्र ग्रहण है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है लेकिन इसका धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व होता है।
धर्म शास्त्र के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण में गर्भवती महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखना होगा। ग्रहणकाल में गर्भवती महिलाएं अपने पास कुश और गंगाजल रख लें। और अपने बराबर कांडा नाप कर या बराबर काला, और सफेद धागा नाप कर उसके दोनों शिरा में कील बांध कर किसी एकांत जगह पे लटका दें। और पके हुए भोजन में कुश और तुलसी पत्र डाल दें।
*ग्रहण काल में बालक, वृद्ध और रोगियों को छोड़कर किसी को भी भोजन नहीं करना चाहिए।* ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भक्तों को मानसिक जप करना चाहिए। मन ही मन *ॐ नमो भगवते वासुदेवाय!!* मंत्र का जप करते रहना चाहिए। ग्रहण खत्म हो जाने के बाद स्नान कर चांदी, सिल्वर या स्टील के पात्र में अन्न, सफेद कपड़ा, मूंग दाल, चांदी, चीनी, मिश्री, कपूर, दही, और सफेद मिठाई आदि चीजों का दान करना चाहिए।
चंद्र ग्रहण काल एवं सूतक काल में राम चरित मानस का पाठ एवं
*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय!!*
एवं गुरु मंत्र का जप करें।
*शास्त्र संग्रह:-*
🌸🌺🌹🌺🌸
*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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