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161 वीं मालवीय जयन्ती- एक समीक्षा : प्रकाश प्रसाद उपाध्याय

 

प्रकाश प्रसाद उपाध्याय, दिसंबर महीने की 25 तारीख – मानव जाति के कैलेण्डर का एक सामान्य दिन । पर इस तारीख के दिन जिन दो महापुरुषों का जन्म हुआ उन्होंने इसे पावनता मात्र प्रदान नही की वरन् वंदनीय भी बनाया । वे दो महापुरुष थे – हिंदू समाज में जन्मे मदन मोहन मालवीय – ब्राह्मण परिवार का एक लोक कल्याणकारी मानव और दूसरे थे क्रिस्तानी समाज के ईसा मसीह ।

इन दोनों महारथियों ने अपने ज्ञान के आलोक से समाज में व्याप्त अज्ञानता के अंधकार को मिटाते हुए मानव जाति को एक नई दिशा दी । पंडित मदन मोहन मालवीय ने शिक्षा के माध्यम से और इसा मसीह ने धर्म और अपने धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से ।

एक सुयोग्य शिक्षक, कुशल पत्रकार, कानुन व्यवसायी, प्रखर वक्ता, भारत के स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनेता के रूप में संक्रियाशील रहे पं. मदन मोहन मालवीय समाज के निर्धन, विपन्न, असहाय और पिछडे वर्ग के लोगों की सहायता के लिए सेवा और समर्पण के जिस भाव से काम करने में तल्लीन रहे उसे राष्ट्र ने स्वीकृति मात्र प्रदान नही की, वरन् उन्हें ‘महामना’ की उपाधि से भी सम्मानित किया । इन्हीं महामानव को उनकी ज्ञटज्ञ वीं जन्मजयंती के अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करने हेतु नेपाल की राजधानी काठमांडू में विगत २५ दिसंबर के दिन एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया । सभा स्थल था – नेपाल के उपराष्ट्रपति भवन के प्रांगण में अवस्थित सभागृह, और आयोजक था – महामना मालवीय मिशन, काठमांडू, नेपाल । इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि थे – नेपाल के उपराष्ट्रपति नन्द बहादुर पुन । विशिष्ट अतिथि एवं प्रमुख वक्ता थे – नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के मिशन उपप्रमुख महामहिम प्रसन्न कुमार श्रीवास्तव तथा आध्यात्मिक चिंतक एवं नेपाल के पूर्वमंत्री बलदेव शर्मा मजगैयाँ ।

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कार्यक्रम के संबंध में विषय प्रवेश करते हुए मंच पर आसीन मालवीय मिशन के सलाहकार एवं जापान स्थित नेपाल के पूर्व राजदूत डॉ. विष्णुहरि नेपाल ने महामना मालवीय मिशन, नेपाल के क्रियाकलापों के ऊपर प्रकाश डाला और काठमांडू के निकट अवस्थित काभ्रे जिले में नेपाल हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में महामना मालवीय मिशन के द्वारा किये जा रहे प्रयासों की चर्चा की ।

मिशन के कार्यवाहक सचिव भरत रिजाल ने अपने स्वागत भाषण के द्वारा सभा में उपस्थित सभी विशिष्ट गण एवं अतिथियों का स्वागत किया । धन्यवाद ज्ञापन मिशन के उपाध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह ने की ।

प्रमुख अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए नेपाल के सम्माननीय उपराष्ट्रपति नन्द बहादुर पुन ने कहा कि नेपाल –भारत संबंध जनस्तर तक प्रगाढ़ और विशिष्ट प्रकार का होने पर भी मुझे विश्वास है कि यह और अधिक ऊँचाई प्राप्त करेगी । फिर भी इसे और अधिक बहुआयामिक और मैत्रीपूर्ण बनाने की आवश्यकता है । इसी क्रम में उन्होंने नेपाल में भी हिंदू विश्वविद्यालय स्थापित किये जाने के सन्दर्भ में अपनी ओर से भी सहयोग करने के संबंध में प्रतिबद्धता प्रकट की । पं. मदन मोहन मालवीय के द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर स्वदेश लौटे नेपाली छात्रों की संख्या को उल्लेखनीय बताते हुए उपराष्ट्रपति पुन ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को नेपाल और भारत के बीच मित्रता का विम्ब और कड़ी बतायी और नेपाल के सर्वांगीण विकास में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के द्वारा पहुँचाये गये प्रत्यक्ष और अ्रप्रत्यक्ष योगदानों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की ।

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इस विशेष समारोह की अध्यक्षता मिशन के अध्यक्ष योगाचार्य जी.एन. सरस्वती ने की । इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने नेपाल में भी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता पर जोर जोर डालते हुए कहा कि इस योजना को यथाशिघ्र कार्यरूप दिए जाने का समय अब आ गया है । क्योंकि यह नेपाल–भारत मित्रता का प्रतीक और महत्वपूर्ण स्तंभ मात्र न होकर कई देशों के छात्रों को इस मनोरम घाटी को देखने और यहाँ की शीतल जलवायु में शिक्षा पाप्त करने का अवसर भी उपलब्ध करायेगा । अध्यक्ष योगाचार्य ने अपने संबोधन में कार्यक्रम आयोजन करने हेतु महामहिम उपराष्ट्रपति के द्वारा सभा स्थल उपलब्ध कराने हेतु उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि नेपाल भारत की मित्रता को कितना अधिक महत्व प्रदान करता है ।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में नेपाल स्थित भारत के राजदूत महामहिम नवीन श्रीवास्तव एवं मिशन उपप्रमुख महामहिम प्रसन्न कुमार श्रीवास्तव की भूमिका भी उल्लेखनीय रही । इस अवसर पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के तीन पूर्व छात्रों का भी अभिनंदन किया गया । वे थे – ईश्वर चन्द्र शर्मा, पुष्प प्रसाद लुइँटेल और श्याम प्रसाद अधिकारी । पर श्री अधिकारी अस्वस्थता के कारण उपस्थित नही हो पाए । अतः उनका सम्मानपत्र उनके निवास पर पहुँचा दिया गया । अभिनंदित व्यक्ति की ओर से धन्यवाद व्यक्त करते हुए पुष्प प्रसाद लुइँटेल ने अपने वक्तव्य में नेपाल–भारत मित्रता के संबंध में प्रकाश डालते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अपने छात्र जीवन के क्षणों को स्मरण किया और मालवीय जी के सपनों एवं उनके पद चिन्हों पर चलते हुए महामना मालवीय मिशन के द्वारा प्रस्तावित नेपाल हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की चर्चा की और इसके लिए तन, मन और धन से सहयोग करने का आश्वासन दिया । नेपाल की एक महिला उद्यमी श्रीमती लक्ष्मी शर्मा के द्वारा महामना मालवीय मिशन के कार्यालय के लिए अपना एक एपार्टमेंट निःशुल्क उपलब्ध कराने की जो सहृदयता प्रकट की गयी उसके लिए मिशन इस अवसर पर उनके प्रति आभार करने से भी नही चूका ।

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कार्यक्रम में उपस्थित गण्यमाण्य अतिथियों के अतिरिक्त उपराष्ट्रपति भवन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं भारतीय राजदूतावास के वरिष्ठ पदाधिकारी गण के अतिरिक्त नेपाल के विभिन्न विश्वविद्यालय के माननीय उपकुलपतिगण, पूर्वमंत्रीगण, वर्तमान माननीय सांंसदजन, पूर्व राजदूत, प्राध्यापक, डॉक्टर, ईंजीनियर, समाजसेवी, राजनीतिज्ञ एवं समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की थी ।

 

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