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वतन की नई जिंदगी के लिए संकल्प के साथ मनाई गई गुरूदेव उचित नारायण यादव की जयंती

 

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर। सामजिक परिवर्तन के लिए जीवन समर्पित कर देने वाले शिक्षक, सामजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद गुरुदेव उचित नारायण यादव की 95वीं जयंती के अवसर पर +2 उच्च विद्यालय नाहस, खंगरैठा के प्रांगण में जयंती समारोह व विचार गोष्ठि रामेश्वर ठाकुर एवं कल्याण भारती जी की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरुदेव की मूर्ति पर माल्यर्पण से हुई।

जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सुरेंद्र सुमन ने कहा कि भारत में समाज सेवा का एक लंबा इतिहास रहा है। सामजिक परिवर्तन, गरीबों-मजलूमों की मुकम्मल आजादी का स्वप्न ही उचित बाबू का लक्ष्य था।

“भगत सिंह-अम्बेडकर के सपनों का भारत” विषयक निबंध व भाषण प्रतियोगिता में पुरुस्कृत छात्र-छात्राओं को शुभकामाना सन्देश देते हुए आगे उन्होंने कहा कि भगत सिंह-अम्बेडकर का एक ही सपना था, शोषणविहीन आधुनिक लोकतांत्रिक देश बनाना। उचित बाबू का आजीवन इन्हीं स्वप्नों के लिए जीते रहे।

भगत सिंह अम्बेडकर के सपनों का भारत बनाएँ, यही गुरुदेव प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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जयंती समारोह को गम्भीर विमर्श की ओर मोड़ते हुए भाकपा के राज्य सचिव कॉमरेड रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि बिहार पार्टी व केंद्रीय कमिटी की ओर से आजीवन भाकपा सदस्य रहे उचित बाबू को श्रद्धांजलि।

उन्होंने कहा कि आज जिस भयावह दौर में हम जी रहे हैं; भगत सिंह, अम्बेडकर, उचित बाबू पुकार-पुकार कर कह रहे हैं लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ, जनतंत्र बचाओ, समाज को बचाओ!

उचित बाबू की याद में आजादी की रक्षा का, साम्प्रदायिक नाग को कुचल देने का संकल्प लें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मौके पर भाकपा जिला सचिव कॉमरेड मिथिलेश झा ने कहा कि तमाम ऐशो आराम की ज़िंदगी त्याग कर सामाजिक परिवर्तन की विचारधारा को स्थापित करने के लिए अनवरत काम करते रहे।

असली शिक्षा का अर्थ है तमाम तरह के भेदभाव, असमानता खिलाफ उठ खड़े होना। उचित बाबू एक शिक्षक के बतौर समाज में यह साहस संचारित करते रहे।

प्रसिद्ध चिकित्सक, जन बुद्धिजीवी डॉ. अजीत चौधरी ने जयंती महोत्सव पर उचित बाबू को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि ज्ञान के मार्फ़त से ही पूरी मानव जाति एक हो सकती है। जन्म, जाति और जेंडर के आधार पर होने वाले अन्यायों से लड़ने के लिए शिक्षा सबसे सशक्त माध्यम है। उचित बाबू इस माध्यम से भारत को एक मजबूत, प्रगतिशील समाज बनाने वाले द्रष्टा के रूप में हमेशा याद किये जाएँगे।

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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने छात्र जीवन पर व्यापक चर्चा करते हुए कहा कि व्यवस्था जहर घोलने का काम कर रही है। छात्रों-नौजवानों के अंधकारमय भविष्य के लिए व्यवस्था जिम्मेदार है।

उन्होंने उचित बाबू की परंपरा को आज के दौर में और भी ज्यादा प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनका दर्शन, सिद्धांत, कार्यशैली यही मार्ग है हर दौर में समाज में स्थाई सकारात्मक बदलाव लाने के लिए। संघर्ष के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं।

शिक्षा के ही कारण भगत सिंह, अम्बेडकर जैसे महान क्रांतिकारियों की भूमि कहलाने का गौरव भारत देश को मिल सका। गुरुदेव उचित नारायण यादव पुस्तकालय सह वाचनालय निर्माण समिति ने इस सामाजिक प्रक्रिया को चिन्हित करते हुए उच्च विद्यालय में ‘भगत सिंह-अम्बेडकर के सपनों का भारत’ विषय पर निबंध व भाषण प्रतियोगिता आयोजित करवाई।

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भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता में प्रथम दस आने वाले छात्र-छात्राओं को अध्यक्ष रामेश्वर ठाकुर, कल्याण भारती के द्वारा पुरुस्कृत किया गया। पुरस्कार के लिए चयनित छात्र-छात्राएँ यथावत हैं- मैट्रिक टॉपर प्रदीप कुमार, मो. आजाद, पिंकी कुमार, तुबा खातून, अर्चना कुमारी, सना, मुस्कान, काजल कुमारी, अंजली कुमारी, सरस्वती कुमारी।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. लाल बाबू अकेला ने तथा धन्यवाद ज्ञापन निर्माण समिति के सचिव दिनेश कुमार ने किया।

समारोह में अमित कुमार, विजयचन्द्र घोष, इम्तियाज अहमद, शिवशंकर यादव, यादव, जगदीश यादव, रामवतार यादव, रामभरोसे कुमार, अमर कुमार, अखिलेश कुमार आदि ने भी अपनी बातें रखीं।

जन संस्कृति मंच मधुबनी के जिला संयोजक अशोक पासवान द्वारा जनवादी गीतों की प्रस्तुति की गई।

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