स्नेह से हमें सिंचित कर, इस धरती पर जो लाती है, वो कोई और नहीं, मां ही तो कहलाती है : रूपा झा
माता तीर्थ औंसी विशेष
अंतर्मन की पीड़ा को,
बिन कहे समझ जो जाती है
नौ महीने गर्भ में रखकर
अनंत कष्ट को आलिंगन कर
जीवन जिसने प्रदान किया
स्नेह से हमें सिंचित कर
इस धरती पर जो लाती है
वो कोई और नहीं,
मां ही तो कहलाती है।
स्नेह ,प्रेम ,ममता की मूर्ति
देवी रूप का है अवतार
तेरी कदमों में है जन्नत
जाने ये जग – संसार
धन्य – धन्य है वो संतान
जिसे तेरी ममता का सौभाग्य मिला
निश्चल प्रेम देनेवाली तुम
ममतामयी कहलाती है
वो कोई और नहीं,
मां ही तो कहलाती है।
प्रतिमूर्ति तुम दया ,करुणा की
शीतल छाया बन जाती है
अपनी संतानों की खातिर
हर जंग लड़ जाती है
कठिन राह पर चलने को तुम
धैर्यवान बनाती है
कभी कभी शिक्षक बनकर तुम
सही मार्ग दिखलाती है
वो कोई और नहीं ,
मां ही तो कहलाती है।
चोट लगे बच्चो को जब,
दर्द तुझे हो जाता है
कोई बिपदा ना आए
रक्षा कवच बन जाती है
अपनी नींद चैन को त्यागकर
हमे हर सुख -खुशियां देती है
वो कोई और नहीं ,
मां ही तो कहलाती है।
दिन – रात तुम करती काम
कभी ना लगता तुझे थकान
अपने हिस्से का भी सुख
तुम हम पे न्यौछावर करती है
वैर- भाव नहीं तेरे मन में
सबकी प्रिय बन जाती है
पुत्र कुपुत्र होते इस जग में
माता कुमाता न होती है
लाख गलतियां होने पर भी
क्षमाशील बन जाती है
वो कोई और नहीं ,
मां ही तो कहलाती है।
ईश्वर की हो अद्भुत रचना
तेरा क्या गुणगान करु
शब्द नही मेरे कोश में
तुझको क्या परिभाषित करु
भगवान का दूजा रूप है तुम
तेरी ममता का कोई मोल नहीं
जिसको मिले तेरा साथ
किस्मत उसकी बन जाती है
वो कोई और नहीं,
मां ही तो कहलाती है।
कुछ ना मांगू तुझसे प्रभु
बस मां की ममता की छाव मिले
तेरी पवन चरणों में मां
सदा मुझे स्थान मिले
सतत मिले आशीर्वाद तेरा
जीवन सफल हो जाए मेरा
जब भी मैं दुनिया से हारु
तेरी गोद की पनाह मिले
तेरी आंचल की छाया में
मुझको आराम मिले
ऐसी जन्नत तो बस तुझमें ही पाई जाती है
वो कोई और नहीं,
मां ही तो कहलाती है।
रूपा झा


