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भारत- नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय “रुपया” का अवमूल्यन- चीन की साजिश : ललित झा

 

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ललित झा, भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे भारत और नेपाल के सीमावर्ती बाजारों में भारतीय मुद्रा का तेजी से अवमूल्यन हो रहा है। भारत और नेपाल के बीच हुये एक समझौते के तहत भारतीय तथा नेपाली मुद्रा का विनिमय दर पूर्व से निर्धारित है। सरकार द्वारा निर्धारित विनिमय दर के अनुसार 100 भारतीय रुपया के बदले 160 नेपाली रुपया देय होता है, इसी तरह 1000 नेपाली रुपया के बदले 625 भारतीय रुपया का दर तय है। अमूमन समान्य दिनों में सीमावर्ती क्षेत्र के सटही काउंटरों पर 610 से 615 भारतीय रुपया प्रति एक हजार नेपाली रुपया के दर से आम लोग अपने रुपये का विनिमय करते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ महीनों से सटही केंद्रो पर स्थिति इसके बिपरित है।भारत नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र स्थित इन सटही केंद्रों पर आजकल भारतीय मुद्रा का तेजी से अवमूल्यन हो रहा है। पहले यहाँ नेपाली लोगों तथा व्यापारियों के बीच भारतीय मुद्रा की मांग अधिक होती थी लेकिन आजकल नेपाली मुद्रा की मांग में तेजी से वृद्धि हुयी है। सीमावर्ती क्षेत्र स्थित इन अबैध मुद्रा विनिमय केन्द्रों पर आज का परिदृश्य चौकाने वाला है। भारतीय रुपया के इस अवमूल्यन के कारणों की पड़ताल करने पर इसके पीछे चीन की संलिप्तता सामने आ रही है। हालांकि ऐसा नही है कि चीन भारत को सिर्फ भूराजनीतिक चोट देने की कोशिश करता है बल्कि अब वह भारत को भूआर्थिक चोट भी देने का प्रयास कर रहा है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिकाधिक नुकसान पहुँचाया जा सके। चीन आजकल नेपाल की धरती का प्रयोग भारत को आर्थिक एबम रणनीतिक नुकसान पहुंचाने मे कर रहा है। चीन नेपाल में आज वह सब कुछ कर रहा है जिससे भारत को सामरिक एबम आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके। चीन की इन्ही भूराजनीतिक रणनीतियों का परिणाम है भारतीय मुद्रा का यह अबैध अवमूल्यननेपाल में चीनीयाँ गतिविधियों के जानकारों के अनुसार चीन नेपाल को अपने “मेड इन चाईना ” सामानों का डंप ग्राउंड बना रहा है। इसके पीछे उनकी मंशा है नेपाल के बाजारों में मेड इन चाइना वस्तुओ को डंप कर, उसे अंतराष्ट्रिय तस्करों के सहयोग से भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में पहुँचाना। भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर आज कल यही हो रहा है। नवम्वर- दिसंबर 2022 से लेकर जून 2023 तक के अवाधि में सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय करेंसी “रुपया” के आश्चर्यजनक अवमूल्यन से लोग हैरान है। व्यापारियों एबम आम लोगों के बीच भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग यह देखकर हैरान है कि आखिर भारतीय मुद्रा रुपया का अवैध अवमूल्यन क्यों हो रहा है? इसके पीछे का रहस्य क्या है?? आखिर वह कौन सा कारण है जो भारतीय मुद्रा के ऐतिहासिक अवमूल्यन के लिए जिम्मेवार है??? हिमालिनी द्वारा किये गये विशेष पड़ताल में कुछ चौकानेवाला तथ्य सामने आया है। हमने दोनों देशों के बहुत से व्यापारियों, मुद्रा विनिमय कारोवारियों, आम लोगों तथा विशेषज्ञों से विचार विमर्श किया। उसके अनुसार भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन के पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण इस प्रकार है:
1. सोना की अबैध अंतराष्ट्रिय तस्करी में तीव्र वृद्धि– नेपाल आजकल सोने की अंतराष्ट्रिय तस्करी का आकर्षक हब बन गया है। नेपाल में अबैध ढंग से सोना के आगमन का मुख्य श्रोत चीन है तथा इसका गंतब्य स्थल भारत। ऐसा हम नही बल्कि नेपाल पुलिस द्वारा सोना तस्करी से जुड़े कई मामलों में किये गये अनुसंधान की रिपोर्ट कहती है। पिछले वर्षो मे नेपाल पुलिस द्वारा जब्त किये गये सोना का आंकड़ा हैरान करने वाला है :-
* त्रिभुवन अंतराष्ट्रिय विमान स्थल से 4 किलो सोना के साथ चिनियाँ नागरिक ली विंडसि की गिरफ्तारी
*3.5 किलो सोना के साथ तीन चिनियाँ नागरिक की गिरफ्तारी
* ठमेल स्थित एक होटल से 88 किलो सोना जब्त, प्रहरी अनुसंधान में यह चिनियाँ नागरिक वान वीइ मिन्ड का होने का खुलासा
* नेपाल में सोना तथा डॉलर तस्करी से संबंधित दर्जनों ऐसी घटनाएं हुई है जिसमे चिनियाँ नागरिक तथा गिरोह की संलिप्तता सामने आयी है।
वर्ष 2018 में, नेपाल में 33.5 किलो सोना लूट कांड हुआ था। नेपाल पुलिस के अनुसंधान में यह बात उजागर हुयी है कि पिछले दो वर्षों में, चीन द्वारा संचालित इस गिरोह द्वारा 5 टन से अधिक सोना तस्करी के माध्यम से भारत पहुँचाया गया है जिसकी कीमत लगभग 17 बिलियन आंकी गयी है। छोटे छोटे अंतराल पर नेपाल पुलिस द्वारा जब्त किये जा रहे सोने की खेप से यह सावित होता है कि नेपाल सोने की अबैध तस्करी का अंतराष्ट्रिय केन्द्र बन रहा है। ठमेल, दांग, नेपालगंज, जनकपुर, बीरगंज और बिराटनगर इसके प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहे हैं। नेपाल पुलिस की विभिन्न अनुसंधान रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि नेपाल मे आ रहे अवैध सोना में से करीब, 60 से 70 प्रतिशत चीन से आ रहा है और सोना तस्करी के आरोप में अब तक दो दर्जन से अधिक चीनी नागरिक गिरफ्तार भी हो चुके है और कई अब भी फरार है। वैसे तो मूल्य मे अंतर होने के कारण नेपाल से भारत की तरफ सोने की तस्करी पहले भी होती रही है लेकिन दो प्रमुख कारणों से आजकल इसमें तीब्र वृद्धि देखी जा रही है। पहला कारण भारत सरकार द्वारा सोना पर आयात शुल्क मे 15 प्रतिशत की वृद्धि तथा दूसरा कारण 2000 के नोट की नोटबंदी की घोषणा
सोना तस्करी में संलग्न सूत्रों के अनुसार, 2000 के नोट के बंद करने की घोषणा से सोना की तस्करी में 30 से 40 गुणा से अधिक की वृद्धि हुयी है क्योंकि पूरे भारत से लोग अधिक से अधिक सोना खरीद कर अपने अबैध पैसे का निवेश कर रहे हैं। यह दोनों स्थिति सोने की तस्करी को बढ़ा रही हैं

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सीमा पर विदेशी मुद्रा का अबैध कारोबार– सोना के अलावे नेपाल डॉलर तथा चीनी मुद्रा RMB के अबैध खरीद बिक्री का बड़ा केंद्र भी बन रहा है। नेपाल पुलिस के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले दो वर्षों में डॉलर के तस्करी के आरोप में करीब तीन दर्जन से अधिक चिनियाँ नागरिक गिरफ्तार किये गये है। पुलिस अनुसंधान में यह बात सामने आयी है कि डॉलर तस्करी का सीधा संबंध सोना तस्करी से है। चीन के लोग अबैध तरीके से सोना लेकर नेपाल आते हैं और डॉलर अथवा RMB लेकर चीन वापस जाते हैं। नेपाल और भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के कई सफेदपोस लोग आजकल चिनियाँ मुद्रा “रेनेम्बी” यानी RMB के अबैध कारोबार में भी संलग्न है। इसलिए सीमावर्ती क्षेत्र में आजकल RMB का कारोबार भी तेजी से फलफुल रहा है।


3.. मेड इन चाइना वस्तुओ की अबैध तस्करी– यह सच है कि भारत नेपाल के व्यापारिक रिश्ते बहुत मजबूत है और भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है लेकिन स्थिति तेजी से बदल रही है और चीन नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है। जबसे भारत सरकार द्वारा चीन में निर्मित कई वस्तुओ के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है तब से नेपाल के रास्ते चिनियाँ वस्तुओ की अबैध तस्करी में भी काफी वृद्धि हुयी है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक नेपाल से भारत में मेड इन चाइना सामानों की अंतराष्ट्रिय तस्करी का अबैध कारोबार करीब 2000 करोड़ से अधिक का है। यही कारण है कि चीन से नेपाल आयात मे तेजी से वृद्धि हो रही है। वितीय वर्ष 2078-79 में 2 खरब, 26 अरब, 87 करोड़ तथा वर्ष 2079-80 में अब तक एक खरब 79 अरब, 22 करोड़ का आयात हुआ है और यह तेजी से बढ़ रही है । कुल 3 करोड़ की आवादी वाले नेपाल की अर्थव्यवस्था का आकार काफी छोटा है। इसलिए इसमें से अधिकांश मेड इन चाइना सामान भारत में भेजने के लिए नेपाल को आयात किया जा रहा है।
1850 कि मी लंबी भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा आजकल अंतराष्ट्रिय तस्कर गिरोहों के पूर्णतः चंगुल में है। यहाँ पर अंतराष्ट्रिय तस्करी का संगठित गिरोह इतना मजबूत हो चुका है कि सब कुछ इनके सेटिंग और मर्जी के अनुसार ही होता है। चाइनीज सेव, फल, उलेन तथा रेडीमेड कपड़ा, मोटर पार्ट जैसे मेड इन चाइना सामान भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों मे तस्करी के माध्यम से धरल्ले से पहुँच रहा है। हालांकि अंतराष्ट्रिय सीमा पर भारतीय सुरक्षा बल SSB तथा नेपाली सुरक्षा बल APF सघन तैनाती के बाबजूद, वह तस्करी को रोक पाने में विफल क्यों सावित हो रहे हैं यह सभी के समझ से परे है।

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उपरोक्त सभी कारणों से नेपाली रुपया के मांग में अचानक काफी वृद्धि हुई है क्योंकि खुले बाजार में अभी नेपाली रुपया का मांग अधिक है, जबकि भारतीय रुपया का आपूर्ति अधिक होने से भारतीय रुपया कमजोर हो गया है। नेपाली रुपया के मांग में वृद्धि के पीछे, मेड इन चाइना सामानों की अबैध तस्करी है। नेपाल अथवा चीन के व्यापारियों को भुगतान नेपाली रुपया, डॉलर या फिर RMB में करना होता है। नेपाल के व्यापारियों को नेपाली करेंसी मे भुगतान करने के लिए भारतीय व्यापारियों द्वारा आजकल भारी मात्रा में नेपाली करेंसी, डॉलर, या RMB की खरीद की जा रही है ताकि नेपाल तथा चीन के व्यापारियों को भुगतान किया जा सके। 15 से 20 हजार करोड़ का यह अबैध कारोबार पूर्णतः हवाला के माध्यम से किया जाता है। चैंबर ऑफ कॉमर्स जयनगर के महासचिव अनिल बैरोलिया के अनुसार पहले भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में भी प्रति दिन करोड़ों नेपाली करेंसी जमा होता था क्योकि नेपाल के लोग भारतीय बाजारों में नेपाली करेंसी मे ही खरीदारी करते थे लेकिन हाल ही में नेपाल सरकार द्वारा लगाये गये प्रतिबंधों के कारण अब भारतीय बाजारों में नेपाल के लोगों का आना बहुत कम हो गया है जिससे नेपाली करेंसी के आवक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है j

कुछ विश्लेषकों के अनुसार वैदेशिक रोजगाड़ी में विदेश गये नेपाल तथा मधेस के लोग अपना पारिश्रमिक हुंदी कारोवारी के माध्यम से नेपाल भेजते है। ये हुंडी कारोबारी उनसे विदेशी मुद्रा लेकर, चिनियाँ एजेंट को देते हैं तथा बदले में उन्हे नेपाली करेंसी मे भुगतान करते हैं जिस कारण भी खुले बाजार में नेपाली करेंसी का मांग बढ़ा हैं। भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन का यह सिलसिला नवंबर 2022 से अबतक जारी है हालांकि इसके विनिमय दरों में उतार चढ़ाव होता रहता है। एक समय था जब 100 भारतीय रुपया लेने के लिए 166 नेपाली रुपया का भुगतान करना होता था जबकि आज 100 के बदले सिर्फ 150 नेपाली रुपया भुगतान करना होता है। भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन के संदर्भ में स्वस्तिका सटही काउंटर के संचालक रविंद्र निरौला कहते हैं कि हमारे पास आजकल भारतीय रुपया लेने कोई नही आ रहा है बल्कि भारतीय रुपया लेकर आते हैं और बदले में नेपाली रुपया चाहते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन का विषय इतना गंभीर हो चुका है कि अब नेपाल के बाजारों में लोग भारतीय रुपया लेने से इंकार करने लगे हैं। जगह जगह दुकानों , पेट्रोल पंप पर सूचना लगा दिया गया है कि भारतीय रुपया में भुगतान स्वीकार नही किया जायेगा, कृपया नेपाली मुद्रा में भुगतान करें।
आश्चर्य का विषय तो यह है कि भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन सरकार द्वारा नही किया गया है बाबजूद इसके अबैध मुद्रा विनिमय कारोबारियों तथा हवाला या हुंडी कारोबारियों के साथ मिलकर कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों का सृजन कर रहे हैं जिसका परिणाम सामने दिख रहा है।

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इसका प्रभाव— वित्तीय मामलों के जानकर बताते है कि ऐसी स्थितियों से भारत और नेपाल दोनों को सिर्फ नुकसान ही हो रहा है जबकि लाभ सिर्फ चीन, हवाला कारोबारी तथा अंतराष्ट्रिय तस्कर गिरोह को हो रहा है। विशेषज्ञों अनुसार यह सब चीन एक विशेष रणनीति के तहत कर रहा है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया जा सके। ऐसी स्थितियों का भारत नेपाल मैत्री संबंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। भारत सरकार को समय रहते इस पर कुछ ठोस पहल करनी चाहिए अन्यथा जिस तेजी से चीन, नेपाल को अपने अबैध भूराजनीतिक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा है, वह दिन दूर नही जब नेपाल, भारत के लिए एक बड़ा भूराजनीतिक सिरदर्द सावित होगा।

सीमा के जानकारों के अनुसार भारत सरकार को अविलंब एक साथ कई स्तरों पर कार्य करना चाहिए। भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था का चरित्र पीपुल फ्रेंडली तथा तस्करी विरोधी होना चाहिए जबकि हो रहा है ठीक इसके विपरीत। भारत नेपाल बॉर्डर कोर्डिनेशन मीटिंग को प्रभावकारी बनाया जाना चाहिए तथा APF के सहयोग से मेड इन चाइना सामानों की तस्करी को अविलंब रोकना चाहिए। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र में संचालित 100 से अधिक अबैध सटहि काउंटरों को सरकार के निर्देशन तथा नियम कानून के अनुसार इसका संचालन सुनिश्चित करना चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्र के विभिन्न सरकारी बैंकों में विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्र खोला जाना चाहिए ताकि आम लोगों को मुद्रा विनिमय के लिए यत्र तत्र भटना नही पड़े। ऐसी स्थितियों से भारत और नेपाल के ब्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। नेपाल की राजनीतिक आर्थिक परिस्थितियों में चीन का प्रभाव जिस तेजी से बढ़ रहा है वह निश्चय ही भारत नेपाल मैत्री संबंधों के सेहत के लिए ठीक नहीं।

ललित झा
राजनीतिक सम्पादक, हिमालिनी

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