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हिन्दी सभी भाषा को जोड़ती है : श्री गिरीश चन्द्र लाल, सन्दर्भ- ‘नेपाल-भारत साहित्यिक समारोह’ ‘विद्यापति जयंती’

 

काठमांडू, 29 नवंबर । भारतीय राजदूतावास, काठमांडू द्वारा कल ‘नेपाल-भारत साहित्यिक समारोह’ के अंतर्गत ‘महाकवि विद्यापति जयंती’ और पुस्तक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री गिरीश चंद्र लाल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्री लाल ने कहा कि नेपाल में हिन्दी भाषा को नकारा नहीं जा सकता । उन्होंने कहा कि नेपाल में हिंदी सभी भाषा को जोड़ती है तथा यह सम्पर्क भाषा का काम करती है। 

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कार्यक्रम में लेखक एवं संस्कृतिविद श्री धीरेंद्र प्रेमर्षि द्वारा अनूदित महाकवि विद्यापति की रचना ‘पुरुष परीक्षा’ पर विस्तृत परिचर्चा हुई। इसमें प्रतिष्ठित लेखक एवं संस्कृतिविद श्री धीरेंद्र प्रेमर्षि के अलावा डॉ देवी नेपाल, डॉ रजनी ढकाल एवं श्री शरदचंद्र वस्ती ने महाकवि विद्यापति और उनकी रचनाओं के महत्व पर अपने विचार रखे।

इस अवसर ओर स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक डॉ आसावरी बापट ने अतिथियों का स्वागत किया । साथ ही, विद्यापति द्वारा रचित उत्कृष्ट गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियां भी हुईं । श्री गुरुदेव कामत द्वारा शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किया गया । श्रीमती मनु विजय तथा श्रीमती रुपा झा ने विद्यापति की गीत प्रस्तुत कीं । बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, भाषा अनुरागी, शिक्षकगण एवं नेपाल-भारत पुस्तकालय के सदस्यों ने प्रतिभागिता की । श्री सत्येन्द्र दहिया ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये विद्यापति पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम में हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान डॉ विमलेश कान्ति वर्मा की भी उपस्थिति थी ।

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