Sat. May 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

नींद (कविता) : वसन्त लोहनी

 

 नींद

जी हां, निश्चित रूप से
बहुत खुशकिस्मत हूं मैं
माता की अपार कृपा है
तभी तो गोंद में सुलाती है मुझे
नींद ना आने का छटपटाहट
कभी भोगा नहीं हैं मैने
रात भर करवट बदलते बदलते
कभी शुभ देखा नहीं हैं मैने
न कभी नींद की गोली
न कभी रात भर जगने-उठने का चक्र
तभी तो हर सुबह नवीन है
हर सुबह सुंदर हैं
भगवान कुछ न कुछ देता हैं
हर इंसान को देता हैं
मुझे दिया हैं गहरा नींद
कितना सौभाग्य हैं मेरा
तभी तो चूमता ही रहा हूं
अपने ख्वाबों को।

यह भी पढें   सुकुम्वासी बस्ती के ८१० घरों को किया गया ध्वस्त
वसन्त लोहनी, काठमाण्डू

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *