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रूस और यूक्रेन के युद्ध में फसे नेपाल के कई गोरखा सैनिक

 



फ़ाइल

काठमांडू: 9 मई । रूस और यूक्रेन के युद्ध में नेपाल के कई गोरखा सैनिक भी फंसे हुए हैं। सभी नेपाली रूस में श्रमिक बनकर गए थे, जिन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। काठमांडू में पिछले 17 दिनों से इन सैनिकों को वापस लाने से जुड़ा प्रदर्शन चल रहा था। इसे लेकर अब नेपाल सरकार ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाएगा। रूस में फंसे नेपाली सैनिकों के परिवारों का प्रदर्शन 5 मई को खत्म हुआ। रिश्तेदारों ने अपने परिजनों की सुरक्षा वापसी सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया।

परिवारों की ओर से रखी गई मांगों में रूसी सेना में मौजूद नेपाली नागरिकों की सुरक्षित वापसी, युद्ध में घायल लोगों के लिए मुआवजा और मेडिकल सुविधा, यूक्रेन में कैदी के रूप में रखे गए पांच नेपालियों की सुरक्षित निकासी, मृत सैनिकों के शवों को लाना और रूसी सरकार की ओर से मुआवजा शामिल है। प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिपरिषद ने एक बयान जारी कर राजनयिक चैनलों के जरिए इन मांगों को संबोधित करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। हालांकि यह एक वादा है, जो कई महीनों से दोहराया जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने खुलासा किया कि वे रूसी सेना में नेपाली भाड़े के सैनिकों के 200 से ज्यादा परिवारों के संपर्क में हैं। उन्होंने पुष्टि की कि कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई है। जबकि पांच कैद में हैं। रूसी सेना में नेपाल के भाड़े के सैनिकों की सटीक संख्या का कोई आधिकारिक डेटा नहीं है। लेकिन कई रिपोर्ट्स का दावा है कि कम से कम 15,000 नेपाली लोग रूसी सेना में शामिल हो गए हैं। रूसी सेना की ओर से कथित तौर पर 2000 डॉलर प्रति महीने देने का वादा किया गया था।
बड़ी कमाई की उम्मीद में नेपाली रूस चले गए। हालांकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह युद्ध लड़ने के लिए भेज दिए जाएंगे। कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्हें खाना पकाने, साफ-सफाई जैसे गैर लड़ाकू पदों पर सेना में शामिल किया गया था। बाद में उन्हें युद्ध में लड़ने के लिए भेज दिया गया। परंपरागत रूप से भारत नौकरी के लिए नेपालियों का एक पसंदीदा स्थान रहा है। खासकर भारतीय सेना की प्रसिद्ध गोरखा रेजिमेंट में। हालांकि अग्नीवीर योजना आने के बाद भर्ती नीतियों में हुए बदलाव के कारण अब उन्हें वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। भर्ती की शर्तों को लेकर नेपाल और भारत के बीच बातचीत रुकी हुई है। यही कारण है कि नेपाली युवा दूसरे रास्ते खोज रहे हैं।



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