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क्रांति दिवस पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि : जयप्रकाश आनन्द

 

कार्तिक 26 गते, आज क्रांति दिवस है। इस दिन को ही नेपाली कांग्रेस का ऐतिहासिक बैरागनिया सम्मेलन आयोजित हुआ था। रौतहट जिले में भारतीय सीमा के पास इस छोटे से शहर बैरगनिया में आयोजित सम्मेलन में नेपाली कांग्रेस पार्टी ने 2007 साल का सशस्त्र क्रांति शुरू करने का निर्णय लिया था। इस ऐतिहासिक दिन की स्मृति को जीवित रखने के लिए इसे क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालाँकि, मुझे नहीं पता कि नेपाली कांग्रेस ने हाल के वर्षों में इस दिन को कभी श्रद्धा के साथ क्रांति दिवस के रूप में मनाया हो। जो लोग नेपाल के लोकतांत्रिक आंदोलन में खुद को श्री सुवर्णा शमसेर के करीबी मानते थे, वे बहुत बाद तक इस दिन को उनके स्मृति दिवस के रूप में मनाते आये हैं। हालाँकि, आज और कल यह स्मृति दिवस लगभग विलुप्त सा हो गया है। आज मैं गजेंद्र नारायण सिंह को जरूर याद करना चाहूंगा जिन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय तक उसे मनाते आयें ।  वे कार्तिक 26 गते को राजबिराज में सुवर्णा जी की स्मृति में “क्रांति दिवस” ​​के रूप में मनाते रहे।

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स्व. सुवर्ण शमसेर

1977 के कार्तिक महीने में जब भारत के पटना में आयोजित तत्कालीन प्रतिबंधित नेपाली कांग्रेस के सम्मेलन में भाग लेने गया था तो लगभग सभी बड़े नेताओं से सुवर्णा शमसेर का गुणगान सुना था। दिसंबर 1976 में बी.पी. कोइराला और गणेशमान सिंह राष्ट्रीय एकता और मेल-मिलाप की नीति के साथ भारत छोड़कर स्वदेश वापस आ गये। बाद में जेल में बी.पी. कोइराला का स्वास्थ्य काफी बिगड़ने के बाद विश्व जनमत के दबाव के कारण राजा बीरेंद्र के आदेश से उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका भेजा गया। वहाँ से लौटते समय, चूँकि यह निश्चित था कि नेपाल पहुँचने पर उन्हें फिर से जेल में रहना पड़ेगा, इसलिए अपने मित्रों से मिलने और पार्टी की भविष्य की दिशा तय करने के लिए पटना में नेपाली कांग्रेस का एक सम्मेलन बुलाया गया। इस बीच सम्मेलन के बाद बी.पी. पटना से कलकत्ता गये और सुवर्णाजी से मिले जो लगभग मृत्यु शय्या पर ही थे।

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स्व. गजेन्द्र नारायन सिंह

उस समय तक सुवर्णा शमसेर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष थें । इस बैठक के दौरान सुवर्णा शमसेर ने कार्यवाहक पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मूल अध्यक्ष बी.पी.और, इसी पटना सम्मेलन में बीपी ने पहली बार श्री कृष्ण प्रसाद भट्टाराई को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया । बाद में पटना से विमान द्वारा काठमांडू आते समय गिरिजा प्रसाद कोइराला एवं परशु नारायण चौधरी को महामन्त्री नियुक्त किया गया। उस भावुकता पूर्ण पल के गवाहों (साक्षी) ने हमें उस समय की संवेदनशीलता और भावनाओं के बारे में बताया था, जब उन्होंने ( सुवर्ण शमसेर) जीवन भर के सबसे अच्छे दोस्त बीपी को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। यह क्या दुःखद संयोग था पटना से बी.पी. को नेपाल लौटते ही मैंने पटना से प्रकाशित सर्चलाइट अखबार में एक दुखद समाचार पढ़ा, सुवर्ण शमसेर का कलकत्ता में निधन हो गया। 9 नवंबर को उनका निधन हो गया । राजा वीरेन्द्र के शासन में देश में पंचायती व्यवस्था थी। सुवर्णजी का परिवार और नेपाली कांग्रेस पार्टी उनके अवशेषों को नेपाल लाकर पशुपति में बागमती नदी में विसर्जन करना चाहते थे जो कि सरकार ने इजाजत नहीं दी। वह सुवर्ण जी की स्मृति लगभग गौण सी ही गई है । एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि ।

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जय प्रकाश आनंद

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