स्वस्थानी व्रत और माधव नारायण की पूजा आज से शुरू
हर साल पौष शुक्ल पूर्णिमा के दिन से शुरू होने वाली स्वस्थानी व्रत कथा और माधव नारायण की पूजा आज से शुरू हो गई है।
हर वर्ष पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक एक माह तक प्रतिदिन घर-घर में स्वस्थानी की कथा कही और सुनी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई व्रत रखता है, कथा कहता है और स्वस्थानी की कथा वाचन सुनता है तो उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इसलिए इस दिन हाथ-पैरों के नाखून काटकर, स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर इसकी शुरुआत की जाती है। प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद दोपहर के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। शाम को स्कंद पुराण के केदार खंड से महान माघ कुमार अगस्त्य और महान ऋषि अगस्त्य के बीच संवाद, स्वस्ति व्रत कथा सुनने की परंपरा है।
इस प्रकार एक माह तक व्रत रखकर माघ शुक्ल की पूर्णिमा के दिन 108 जनेऊ, 108 सुपारी, 108 पान के पत्ते, 108 फूल, 108 रोटियां, 108 अक्षत विभिन्न प्रकार के फल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करके श्रीखंड, लाल चंदन, सिंदूर, वस्त्र और प्रसाद चढ़ाने से व्रती की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देवी को अर्घ अर्पित किया जाता है।
शाली में स्वस्थानी मेला
काठमांडू में शाली नदी पर आज से स्वस्थानी मेला शुरू हो गया है। गोमा नामक एक ब्राह्मण ने सप्तर्षि द्वारा बताई गई विधि के अनुसार व्रत किया, जिससे उसका पुत्र वियोग से बचाव हुआ और उसका पुत्र नवराज लावण्य देश (वर्तमान शंखू क्षेत्र) का राजा बना। स्वस्थानी में भी इसका वर्णन है। इसीलिए सांखू में शाली नदी पर स्वस्थानी में विशेष मेला लगता है।


