Wed. Apr 22nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

राजनीतिक खिलाड़ी ही कहीं राजनीतिक पतन की ओर तो नहीं जा रहा ? : कैलाश महतो 

 

कैलाश महतो, नवलपरासी । 

1. सुशासन प्रवर्धन तथा सार्वजनिक सेवा प्रवाह अध्यादेश 

2. आर्थिक कार्यविधि तथा वित्तीय उत्तरदायित्व अध्यादेश 

3. निजीकरण अध्यादेश। 

4. आर्थिक तथा व्यावसायिक सुधार व लगानी अभिवृद्धि संशोधन अध्यादेश 

5. भूमि सम्बन्धी नेपाल ऐन संशोधन अध्यादेश,और 

6. सहकारी सम्बन्धी नेपाल ऐन संशोधन अध्यादेश 

उपरोक्त ६ अध्यादेश नेपाल सरकार द्वारा दोनों सदनों से पारित कराने के लिए लाया गया है। संसदीय अंक गणित को मानें तो प्रतिनिधि सभा में सरकार को १८८ सांसद पक्ष me हैं, जहाँ प्रस्तुत अध्यादेशों को पारित कराने में रति भर समस्या नहीं है, वहीं राज्यसभा में सरकार के पास उन अध्यादेशों को पारित करना पत्थर के चने चबाना जैसा है।

सरकार द्वारा लाये गये प्रस्तावों के इर्दगिर्द मधेश आन्दोलन के चर्चित नेता उपेन्द्र यादव दिख रहे हैं। वैसे कुछ लोग उन्हें राजनीति का शहंशाह और चतुर खिलाड़ी मानते हैं, मगर उनकी खेल हमेशा फिसलती दिखाई दी है। व्यक्तिगत रुप में भले ही वे अपने को सम्पन्न बनाते जा रहे हों, मगर उस समाज का राजनीतिक धरातल न केवल उनके हाथों से, बल्कि मधेश राजनीति से ही धूमिल होता जा रहा है।

यह भी पढें   कांग्रेस ने गृहमंत्री सुधन गुरुङ से इस्तीफे की मांग की

कुछ समाचार सूत्रों के अनुसार उपेन्द्र यादव अध्यादेशी राजनीति का केन्द्रीय बादशाह है, जिन्हें सरकार ने अनजान में ही हीरो बना डाली है। क्या पत्रकारों और उन विश्लेषकों की बात सही है कि राज्य और उसके सरकार ने अनजाने में ही उपेन्द्र जी का राजनीतिक ऊँचाई बढ़ाने चल पड़ा है, या सरकारका गहरी सोची समझी चाल है ?

स्कूली पढ़ाई में जो के पी ओली सबसे कम शिक्षित है, वही शख्स राजनीतिक शिक्षा ममें इतने तेजहैं कि गोल्ड मेडलों से नवाजे गये गोल्ड मेडलिस्ट पी एच डी धारियों को भी अपने पैरों तले रगड़ा चुका है।  उस हालात में ओली जैसा शख्स क्या अनजाने ही में उपेन्द्र जी के पीछे पड़े हैं या मामला कुछ और है ?

जहाँतक मेरी समझ है, ओली जी ने यों ही अध्यादेशों को नहीं लाया है। उन्होंने एक तीर से कई निशाने लगाने का बेडा उठाया है। वे राजनीतिक तिकड़म निम्न हो सकते हैं :

क) हालफिलहाल मधेशी पार्टियों के बीच संभावित एकीकरण, एकता, गठबंधन या मोर्चाबन्दी को विफल करना।

ख ) मधेशी पार्टियों के बीच तनाव, मनमुटाव और अविश्वास पैदा करना।

ग) मधेशी जनता में अपने पार्टी और नेताओं के प्रति आक्रोश पैदा करना।

यह भी पढें   सिटीजन बैंक १९वां वार्षिकोत्सव समारोह पर स्वास्थ्य शिविर

घ) संभावित मधेश आन्दोलन को मत्थर करना।

ड़) सीके और उपेन्द्र जी के बीच मजबूत दूरी निर्माण करना।

च) उपेन्द्र जी को सरकार मे सा मेल कर मधेश में कमजोर करना, और

छ) यह सावित करना कि मधेशी नेता भले ही पहाड़ी नेताओं को गाली करें, उसके बिना कोई मधेशी जी नहीं पायेगा।

कुछ जो राजनीतिक विश्लेषकों का विश्लेषण है कि उपेन्द्र यादव ने राजनीतिक खेल खेल दिये और सरकार को अपने फायदे के लिए नचायेंगे, तो यह भूल और नासमझी ही होगा। दरअसल सरकार जानबूझकर ऐसा चारा फेका है कि ज स पा के बार बार टूटने फूटने के बावजूद जो वह दमदार है, उसे और कमजोर किया जाय। ओली साहब यह बखूबी जानते हैं कि मधेश में कभी उभरता चेहरा जो सीके था, वह अनेक प्रकारों से धाराशायी हो चुका या होने बाला है जो सम्हलकर भी अब नहीं सम्हल पायेगा। कुछ जो ज स पा है, उसे जड़ से खत्म krकर देना ठीक रहेगा।

इसी और ऐसे ही मजबूत मनोविज्ञान के आधार पर सरकार ने अचानक चोर गली से अध्यादेश लाया है, जिसका मूल उद्देश्य मधेश में होने बाले राजनीतिक उथल पुथल को हवा में ही रोक दिया जाय और सूचना, संचार और सामाजिक sanjao

यह भी पढें   प्रधानमंत्री ने कहा - खुद लेंगे निर्णयगृह मंत्री सुधन गुरुङ, मंत्रिपरिषद् बैठक में उठे सवाल

संजालों पर हुकुमी तानाशाही लादते हुए भूमि सुधार के नाम पर गिरीबन्धु टी-इस्टेट जग्गा, बालुवाटार जग्गा अतिक्रमण लगायत के भूमि विवादों को सुलझा लिया जाय।

उपर उल्लेखित सम्पूर्ण अध्यादेश ऐसे हैं, जो सारे के सारे ओली और देउवा रक्षक और मधेशी-जनजाति भक्षक हैं। आर्थिक अध्यादेश के मार्फत काँग्रेस और एमाले के उपर लगे या लगने बाले आर्थिक भ्रष्टाचारों, सुशासन और सार्वजनिक सेवा प्रवाह अध्यादेश से सामाजिक संजाल पर कब्जा और सहकारी अध्यादेश से सहकारी ठगी चपेट में पड़े अपने इत्तर के पार्टी और नेता पर निरन्तर अंकुश लगाने का पूरा प्रपंच है।

वैसे देखना बाँकी है कि राज्यसभा में निर्णायक भूमिका में रहे ज स पा और उपेन्द्र यादव और ओली के बीच असली बाजी कौन मारता है। मगर तय यह भी है कि सरकार में ज्यादा दिनों के मेहमान बने रहना भी उपेन्द्र जी के लिए घातक और मानहानी ही होगा।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *