जम्मू कश्मीर में बादल फटने से भारी तबाही
जम्मू संभाग में पिछले दो दिनों में भारी बारिश के चलते पांच लोगों की जान जा चुकी है।
मौसम विभाग ने जारी की थी चेतावनी मौसम विभाग ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों भारी बारिश और तेज आधी की चेतावनी पहले ही जारी की थी। रामबन जिले में शनिवार देर रात से ही वर्षा होने लगी थी। जिले के सेरी बागन क्षेत्र में इस प्राकृतिक आपदा के चलते घरों में मलबा भर गया। 200 से अधिक लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रविवार को जारी आदेश में बताया कि भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए घाटी के सभी स्कूलों में सोमवार, 21 अप्रैल को कक्षाएं स्थगित रहेंगी।
शिक्षा मंत्री सकीना इत्तो ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा, “लगातार बिगड़ते मौसम और मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए, एहतियातन फैसला लिया गया है कि 21 अप्रैल को घाटी के सभी स्कूलों में एक दिन के लिए कक्षा कार्य स्थगित रहेगा।” उन्होंने कहा कि यह कदम छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है।
रणनीतिक रूप से अहम जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाशरी और बनिहाल के बीच एक दर्जन स्थानों पर भूस्खलन हुआ और पहाड़ से मलबा गिरा है। जिसके कारण दोनों तरफ से यातायात बंद हो गया है। इसके चलते सैकड़ों यात्री, ट्रक और बसें रास्ते में फंसी हुई हैं। पूरे क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर हैं। धर्मकुंड गांव में 40 मकानों को भारी नुकसान हुआ। मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त होने से दूरसंचार सेवाएं बाधित हुई हैं।
बाढ़ से उपजे हालात से निपटने के लिए सेना, पुलिस, क्यूआरटी, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें तड़के से ही बचाव कार्य में जुटी हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीन लोगों की मौत पर दुख जताया है और प्रभावित लोगों को शीघ्र सहायता पहुंचने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस कंट्रोल रूम के मुताबिक रामबन जिले के सेरी, केला मोड़ और धर्मकुंड में करीब 50 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं किश्तवाड़ में भी भूस्खलन उधर किश्तवाड़ जिले के नाग सेनी इलाके के पत्थर नक्की गांव में लगातार चार दिनों से पहाड़ों पर भूस्खलन और जमीन धंसने का सिलसिला जारी है। जमीन धंसने से मचैल माता मंदिर को जोड़ने वाले किश्तवाड़-पाडर मार्ग का 200 मीटर हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।
वहीं कश्मीर में भी लगातार वर्षा से कई स्थानों पर जलस्त्रोत उफान पर हैं और लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
बादल फटना तकनीकी शब्द है। मौसम विभाग के अनुसार किसी स्थान पर एक घंटे में 100 एमएम से अधिक वर्षा होती है तो उसे बादल फटना कहते हैं। इस स्थिति में सीमित क्षेत्र में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है। इस कारण उस क्षेत्र में तेज बहाव वाली बाढ़ आ जाती है।

