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और फिर एलिना ने गंदा कमेन्ट करने वालों के खिलाफ जंग छेड़ दी

 
एलिना, साभार कांतिपुर

गायिका एलिना चौहान एक समय जीवन के अंधेरे दौर से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं। वे अपनी पीड़ा को भुलाकर मुस्कुराना चाहती थीं—संगीत के ज़रिए दूसरों को भी मुस्कुराना सिखाना चाहती थीं। लेकिन जिस घाव को वे भरने की कोशिश कर रही थीं, वही घाव बार-बार समाज कुरेदता रहा।

“तुमने तलाक लिया, इससे समाज में विकृति फैलेगी”

एक बार मोरंग के एक कार्यक्रम में परफॉर्म करने की तैयारी कर रही एलिना को आयोजकों ने अचानक फोन किया—“तुमने तलाक लिया है, इससे हमारी बेटियों पर गलत असर पड़ेगा। कार्यक्रम कैंसल हुआ।”
यह सुनकर उनका आत्मसम्मान चूर-चूर हो गया। उन्होंने सोचा था, समाज उनके व्यक्तिगत फैसलों का सम्मान करेगा। लेकिन उल्टा, समाज ने तो उन्हें ही दोषी ठहराना शुरू कर दिया।

“या तो मर, या फिर लड़”

एक पल ऐसा आया जब एलिना के सामने दो ही रास्ते थे—या तो हार मानो या फिर डटकर मुकाबला करो। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
“अब मैं चुप नहीं रहने वाली। जो भी गंदे कमेन्ट करता है, उसका चेहरा सबको दिखाऊँगी,” एलिना ने फैसला किया।

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वे सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के प्रोफाइल सार्वजनिक करने लगीं। इससे पहले गायिका समीक्षा अधिकारी ने भी ऐसा ही किया था। एलिना ने उसी हिम्मत को आगे बढ़ाया।

पुलिस में उजुरी, गृहमन्त्री से मुलाकात

एलिना ने सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि साइबर ब्यूरो में जाकर ऐसे लोगों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराईं। उन्होंने समीक्षा अधिकारी के साथ मिलकर गृहमन्त्री रमेश से मुलाकात की। गृहमन्त्री ने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ आपकी नहीं, पूरे समाज की है। सरकार आपके साथ है।”
जल्द ही गुन्जन राई नामक एक ट्रोल की गिरफ्तारी भी हुई।

“अब नहीं रुकी तो मेरी जैसी लड़कियों को और ज्यादा सहना पड़ेगा”

एलिना जानती हैं कि अगर वो आज चुप रहीं, तो कल उनकी तरह की हजारों लड़कियाँ चुप रहेंगी। वे कहती हैं, “कम से कम हम ये माहौल बनाएं कि नेपाल में महिलाएँ खुलकर सांस तो ले सकें।”

हर मोड़ पर गाली मिली, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी

एलिना को कवर सॉन्ग से लेकर निजी जीवन तक हर चीज़ के लिए ट्रोल किया गया। एक इंटरव्यू में उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे रवि लामिछाने को निजी तौर पर नहीं जानतीं—बस फिर क्या था, ट्रोलिंग की बाढ़ आ गई।
तलाक के बाद तो चरित्र हनन, गालियाँ और बदनामी आम बात बन गई।

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“कभी-कभी मरने का मन करता था”

एक समय ऐसा भी आया जब एलिना डिप्रेशन में चली गईं। उन्होंने खुद से सवाल किया, “मैं ये सब क्यों झेल रही हूँ?” लेकिन फिर उन्हें लगा कि उनका जीवन बहुत कुछ कहने और करने के लिए बचा है।
उन्हें आध्यात्म की ओर झुकाव हुआ। ओशो के विचार पढ़े, ध्यान किया, तपोवन गईं। “ऐसा लगा जैसे मेरा पुनर्जन्म हुआ,” वे कहती हैं।

“अब मैं करके दिखाऊँगी, मरकर नहीं”

स्टेज पर भी कई बार पूर्व पति के नाम से उन्हें ताना मारा गया। सोशल मीडिया पर भी बार-बार उसी पुराने घाव को कुरेदा गया। लेकिन अब एलिना कहती हैं—
“अब ये समाज सड़ चुका है। इसे साफ करना ज़रूरी है। मैं मरकर नहीं, करके दिखाऊँगी।”

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अब पछतावा है—”पहले क्यों नहीं किया ये सब?”

अब जाकर एलिना का मन शांत है। ट्रोल्स का तूफान थम चुका है। वे कहती हैं, “काश ये कदम मैंने पहले ही उठा लिया होता।”

उनके माता-पिता आज उन पर गर्व करते हैं—“अब हमारी बेटी सिर्फ अपनी नहीं, हर बेटी की आवाज़ बन चुकी है।”

“मैं मिसाल बनना चाहती हूँ उन बेटियों के लिए जिनके सपनों को डर से कुचल दिया जाता है”

एलिना जानती हैं कि महिला कलाकारों पर ट्रोलिंग और गाली का असर सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि आनेवाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।
“कई माँ-बाप अपनी बेटियों को कलाकार बनने से रोक देते हैं। मैं उन्हीं बेटियों के लिए उदाहरण बनना चाहती हूँ।”

यह कहानी सिर्फ एलिना चौहान की नहीं है, यह हर उस लड़की की है जो समाज के ताने, ट्रोलिंग और दबाव से थक चुकी है, लेकिन फिर भी खड़ी है—मजबूती से, हिम्मत के साथ।

 समर्पण श्री की मूल रिपोर्ट पर आधारित, कान्तिपुर से

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