Mon. Jun 29th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सत्ता की लालसा में लटके जसपा और नाउपा : सुभाष साह पार्टी निर्णय भी नहीं हो रहे लागू

 
फ़ोटो साभार राजधानी

सुभाष साह, काठमाडौं। जनता समाजवादी पार्टी नेपाल (जसपा) और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी (नाउपा) सत्ता की लालसा में इस कदर उलझ गई हैं कि वे खुद अपने ही निर्णयों को लागू नहीं कर पा रही हैं। जसपा ने अपनी कार्यकारिणी समिति से समर्थन वापसी का निर्णय करवाया है, लेकिन अब तक संसदीय दल की बैठक कर औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, नाउपा के मंत्री ने पार्टी के निर्देश के बावजूद भी सरकार से इस्तीफा नहीं दिया है।

जसपा की दोहरी भूमिका, समर्थन वापसी पर निर्णय लटका

जसपा नेपाल की कार्यकारिणी समिति ने ओली नेतृत्व वाली सरकार को पूरी तरह विफल घोषित करते हुए समर्थन वापस लेने का प्रस्ताव पास किया था। यह निर्णय ७-८ असार को हुई बैठक में लिया गया और ९ असार को सार्वजनिक किया गया। समिति ने संसदीय दल को बैठक बुलाकर समर्थन वापसी पर निर्णय लेने का निर्देश भी दिया था।

यह भी पढें   डॉ. नरेश शाक्य द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण शोधपरक पुस्तक का लोकापर्ण

पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र यादव की अध्यक्षता में हुई उस कार्यकारिणी बैठक के निर्देशों को उन्हीं की अध्यक्षता वाले संसदीय दल ने अब तक लागू नहीं किया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यह देरी सरकार में शामिल होने और मंत्री पद पाने की संभावनाओं के कारण हो रही है।

जसपा प्रवक्ता मनिष सुमन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि आगामी रविवार को संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें समर्थन वापसी पर विस्तृत चर्चा होगी।

सिर्फ नाउपा ने किया स्पष्ट रुख

यह भी पढें   पूर्व राजदूत उपाध्याय की अध्यक्षता में ‘पारदर्शी समाज’ नामक संगठन का गठन

जसपा से पहले ही नाउपा ने संघीय सरकार समेत प्रदेश सरकारों से समर्थन वापसी कर चुकी है। लेकिन संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री अरुण चौधरी ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है। नाउपा अध्यक्ष रञ्जिता श्रेष्ठ ने साफ कहा है कि पार्टी ने चौधरी को इस्तीफा देने का निर्देश दे दिया है, लेकिन वे न मंत्रालय जा रहे हैं, न पार्टी से संपर्क में हैं।

नाउपा ने संसद में औपचारिक रूप से विपक्षी बेंच में बैठने की जानकारी भी सभामुख देवराज घिमिरे को दे दी है। इसके साथ ही पार्टी सुदूरपश्चिम, लुम्बिनी और मधेश प्रदेश सरकारों से भी समर्थन वापस ले चुकी है।

राजनीतिक सौदेबाजी का दौर

नाउपा संरक्षक रेशमलाल चौधरी और अध्यक्ष श्रेष्ठ ने हाल ही में प्रधानमंत्री ओली और कांग्रेस नेता शेरबहादुर देउवा से अलग-अलग मुलाकातें की हैं। यह संकेत देता है कि पार्टी सत्ता समीकरण में अपने लाभ की संभावनाएं तलाश रही है। चर्चा यह भी है कि राज्य मंत्री चौधरी को ‘फुलमंत्री’ बनाने की संभावना के कारण वे इस्तीफा देने में देरी कर रहे हैं।

यह भी पढें   भारत विकास परिषद रक्सौल ने समारोहपूर्वक मनाई प्रथम राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सूरज प्रकाश की 106वीं जयंती.....

जसपा और नाउपा दोनों ही अपने घोषित निर्णयों को अमल में लाने में असमर्थ दिख रही हैं। सत्ता में भागीदारी की चाहत इन दलों के सिद्धांतों और निर्णयों पर भारी पड़ रही है। इससे न केवल उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि संसदीय प्रक्रिया पर भी असर पड़ रहा है। साभार राजधानी

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *