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सीमाएँ नहीं, स्नेह के धागे हैं : अशोक कुमार बैद

Ashaok Baidhy (2)
 

 सीमाएँ नहीं, स्नेह के धागे हैं

हिमालय की गोद से बहती,
गंगा–कोशी की एक ही धारा,
दो दिलों की एक कहानी,
नेपाल भारत का प्यारा नज़ारा।

सीमा पर ना बँटे ये मन,
रोटी–बेटी का सच्चा बंधन,
बोलियाँ बदलें, भाव न बदलें,
हम हैं एक ही प्राण के कण।

जनक की भूमि से उठती शाला,
अयोध्या से गूँजे जय-घोष,
राम–सीता के प्रेम से जुड़ा है,
दो देशों का अमिट संयोग।

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काठमांडू के घाटों पर दीप,
वाराणसी की आरती जैसे,
भक्ति की एक ही लौ जलती,
माँ की ममता सी सबके हृदय में बसे।

जय नेपाल
जय भारत
जय नेपाल भारत जन जन का सम्बन्ध।

जब दुख आये, हम पास रहें,
जब सुख फूले, साथ हँसे,
नेपाल–भारत, दो नहीं,
एक ही आत्मा, दो देह जैसे।

सीमाएँ केवल नक्शों की हैं,
दिलों की कोई सरहद नहीं,
जन–जन के इस मिलन में,
बस प्रेम की ही सरगम सही।

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Ashaok Baidhy (2)
अशोक कुमार बैद,
राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेपाल भारत सहयोग मंच

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