पाकिस्तान : आसिम मुनीर के खिलाफ लिखने वाले सात पत्रकारों को उम्रकैद
पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था ने 3 जनवरी की सुबह एक ऐसा डेथ वारंट जारी किया जिसने वैश्विक पत्रकारिता की रूह कंपा दी है. यह वारंट किसी खूंखार अपराधी या सरहद पार के आतंकी के लिए नहीं बल्कि उन 7 पत्रकारों के लिए है जिनकी कलम जनरल आसिम मुनीर के अघोषित साम्राज्य के खिलाफ आग उगल रही थी. एक ऐसी अदालत जिसने मुंबई हमलों के गुनहगारों को ससम्मान रिहा किया था, उसी ने सात बुद्धिजीवियों को सिर्फ इसलिए डिजिटल आतंकवादी घोषित कर दिया क्योंकि उन्होंने सच बोलने का साहस दिखाया. पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत (ATC) ने पत्रकारिता के इतिहास का सबसे काला फैसला सुनाया. आदिल राजा, वजाहत एस खान और मोईद पीरजादा समेत 7 दिग्गज पत्रकारों को डिजिटल आतंकवाद का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. यह फैसला तब आया है जब ये सभी पत्रकार देश से बाहर निर्वासन में रह रहे हैं.
जब ट्वीट बन गया तोप का गोला
पाकिस्तानी सेना और जनरल आसिम मुनीर के इशारे पर काम करने वाली इस अदालत ने एक नया कानूनी सिद्धांत गढ़ा है और वो है डिजिटल आतंकवाद. 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए दंगों का बहाना बनाकर इन पत्रकारों के ऑनलाइन कमेंट्री और ट्वीट्स को राज्य के खिलाफ युद्ध करार दिया गया.
• गुनाह: सेना की आलोचना करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सच बोलना.
• सजा: पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे (इन एब्सेंटिया).
• मकसद: विदेशों में बैठे उन पाकिस्तानी आवाजों को खामोश करना, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेना की पोल खोल रहे हैं.


