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अचानक पुंजी बृद्धि की घोषणा से बैंकिंग क्षेत्र में हलचल

 
कविता दास
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काठमांडू,२५ जुलाई २०१५ | नेपालराष्ट्र बैंक द्वारा गुरुबार  को आर्थिक वर्ष २०७२/०७३ की  मौद्रिक नीति सार्वजानिक की गी है |  राष्ट्र बैंक के  गभर्नर डा. चिरञ्जीबी नेपाल ने इस अवसर पर चुक्ता पुँजी को वर्तमान चुक्ता पुँजी से चार गुणा ज्यादा बृद्धि करने की घोषणा की | इसके अनुसार दो अर्ब चुकता पूजी वाले बैंक को अब दो वर्ष के अन्दर आठ अर्ब रुपैयाँ चुक्ता पुँजी करना होगा | गभर्नर नेपाल का मानना है कि  पुँजी को  बढ़ाना लागनी करने की  क्षमता को बढ़ाना है |  देश के बिकास में बड़े  बड़े आयोजना की  आवश्कता है | जिस बैंक का पूजी कम है वह बैंक ज्यादा लगनी कर नहीं सकता |  नेपाली के बैंकों में कोइ भी समस्या न हो इसलिए यह  निर्णय लिया  गया है | गभर्नर ने कहा कि दो साल की अवधि में पुँजी चार गुणा बढाने के लिए  राष्ट्र बैंक द्वारा  मर्जर का  प्याकेज भी दिया जायेगा  । गभर्नर ने  प्रस्ट संकेत दिया कि  अब देश में १०/१२ बाणिज्य बैंक  की ही  जरुरत है |
अन्तर्राष्ट्रिय मुद्रा कोष ने  नेपाल में  बैंक और  वित्तीय संस्था ज्यादा  होने के करण इसे  घटाने का  दबाब देते आ रहा है | जिसके तहत गभर्नर नेपाल ने  महोत्वकांक्षी पुँजी बृद्धि योजना सामने लाया है | भौगोलिक हिसाव से देखा जाये तो  नेपाल से भी छोटा करिब ७ लाख  जनसंख्या वाला  देश भुटान के   बैंक से  नेपाल का बैंकों की चुक्ता पुँजी डेढ गुणा से  कम  है | सरकारी स्वामित्व के  राष्ट्रिय वाणिज्य बैंक  नेपाल बैंक और  निजी क्षेत्र द्वारा प्रवर्द्धित ग्लोबल आइएमई और प्रभू बैंक का ही  चुक्ता पुँजी ५ अर्बसे  ज्यादा  है । एभरेष्ट बैंक, नेपाल क्रेडिट एन्ड कमर्स (एनसीसी) बैंक का   चुक्ता पुँजी अभी भी  २ अर्ब रुपैयाँ है  ।

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राष्ट्र बैङ्क के अनुसार बैंकों को  अन्तरराष्ट्रिय स्तर में  प्रतिस्पर्र्धी बनाने के लिए  ऐसा व्यवस्था किया गया है  । इससे नेपाली बैङ्क को  विदेश में  कारोबार करने में   सहयोग मिलेगा । ‘विदेशी बैङ्क को  नेपाल में  शाखा खोल्ने के प्रावधान को पुनः इजाजत दिया जायेगा | इससे  नेपाल में भी बड़ा पूँजी के आधार पर बैङ्क खोल्ने की  अनुमति प्रदान करने की दीर्घकालीन योजना की  व्यवस्था की गई है  । २०७३ के बाद नयाँ बैङ्क को  इजाजत मिलेगा और  २०७४ के बाद  विदेशी बैङ्क का  शाखा खोल्ने का प्रावधान किया जायेगा |

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गभर्नरके पुँजी बृद्धिके घोषणा से बैंकर्स पूरी तरह से असंतुस्ट है | बैंकर्स एसी निति को कठोर निर्णय बता रहे है | नेपाल राष्ट्र बैंक के  पुँजी बृद्धि किया गया जिस से बैंकर्स का कहना है की   २ साल में  ८  अर्ब रुपैयाँ  पहुचाना सम्भव  नहीं है |  मर्ज का बिकल्प  भी उतना आसान नहीं है  जबरदस्ती मर्ज कराना  प्रोत्साहन नही यह एक महत्वाकाङ्क्षी लक्ष्य को पाना  है | बैंकर्स संघ इस निर्णय को पुनरवलोकन की मांग किया है | इस सम्बन्ध में उद्योग बाणिज्य महासंघ के अध्यक्ष पशुपति मुरारका ने खा है कि २ अर्ब से २ वर्ष में ही ८ अर्ब रुपया पहुंचना अब्यब्हारिक है | इससे मर्जर की ब्ध्यात्म्क स्थिति सिर्जना होगी |

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समय और परिस्थति को देखते हुये इसतरह का  निर्णय राष्ट्र बैंक के तरफ से आना उतना  फलदायक साबित नहीं होगा | मर्जर का बिकल्प भी उतना आसान नहीं है जितना कहा जाराहा है | पुँजी कौन लगाएगा यही भी जानना जरुरी है |   गवर्नर नेपाल ने जो घोषणा की है पहले तो वह कार्यान्वन पे आना जरुरी है | अभी बैंक के कारोबार में बहुत ज्यादा समस्या दिख राहा है | अभी कौन  बैंक किसका बैंक होगा यह बाजार में हल्ला चल रहा है |  अभी जो मर्जर की स्थिति सामने आई है यह तो राष्ट्रबैंक पहले ही सोचना चहिये था | इतना ज्यादा बैंक खोलेने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी | दो साल में आठ अर्ब रुपैयाँ तक पहुचना सहज नहीं है | बैंक वित्तीय संस्था की पूंजी ४ गुना बढ़ाने की घोषणा से बैंकिंग क्षेत्र त्रसित है और जनता में भी हलचल पैदा हो गयी है |

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