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त्रिभुवन विश्वविद्यालय में 22 दिनों से लॉकडाउन

 

शुल्क कम करने की मांग को लेकर आंदोलनरत छात्रों ने उप-कुलपति, रेक्टर और रजिस्ट्रार को परिसर में प्रवेश से रोका

काठमांडू, 11 माघ 2082 (25 जनवरी 2026)

त्रिभुवन विश्वविद्यालय (त्रिवि) में छात्र आंदोलन के चलते 22 दिनों से लॉकडाउन जारी है। 18 पुष (3 जनवरी) से अखिल क्रांतिकारी और कुछ अन्य छात्र संगठनों ने चार विभागों के शुल्क में कमी और पूर्व शर्तों के कार्यान्वयन की मांग को लेकि विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर को बंद किए हुए हैं।

छात्रों ने उप-कुलपति प्रो. डॉ. दीपक अर्याल, रेक्टर प्रो. डॉ. खड्ग केसी और रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. केदार रिजाल के कार्यालयों को बंद कर दिया है, जिसके बाद से ये अधिकारी अपने कार्यालय नहीं आ पा रहे हैं। पिछले पांच दिनों से छात्र संगठनों ने इन पदाधिकारियों को परिसर में प्रवेश से ही रोक दिया है।

मांग का कारण:
छात्रों का आरोप है कि अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं विकास, सामाजिक कार्य, लैंगिक अध्ययन तथा संघर्ष, शांति एवं विकास अध्ययन – इन चार विभागों का शुल्क अन्य विभागों की तुलना में बहुत अधिक है। वर्तमान में, इन विषयों के लिए प्रति सेमेस्टर 40-50 हजार रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। चार सेमेस्टर की पूरी पढ़ाई पर एक छात्र को 1.80 लाख से 3 लाख रुपये तक का शुल्क देना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि ये विषय लगभग एक साल पहले ही विभाग का दर्जा पा चुके हैं, लेकिन अब भी उनसे पुराने, अधिक शुल्क वाले ढांचे के तहत फीस वसूली जा रही है।

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छात्रों का पक्ष:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं विकास (आईआरडी) में स्नातकोत्तर के छात्र मनीष चौलागाई का कहना है कि विश्वविद्यालय ने शुल्क कम करने के लिए हुए समझौते का पालन नहीं किया है। सामाजिक कार्य (एमएसडब्ल्यू) के छात्र कवीन्द्र ढकाल ने बताया कि विश्वविद्यालय अभी भी 1.80 लाख रुपये शुल्क ले रहा है, जबकि भादौ (अगस्त/सितंबर) 2024 में हुए समझौते के अनुसार यह राशि घटाकर 1.10 लाख रुपये करने पर सहमति बनी थी।

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समझौता और विवाद:
छात्र आंदोलन तेज होने पर 21 भादौ (सितंबर 2024) में शुल्क कम करने का एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत चारों विभागों का शुल्क घटाकर 1.10 लाख रुपये तक करने, त्रिवि सभा द्वारा निर्णय लेकर सभी कैंपस के शुल्क निर्धारण के लिए एक अध्ययन समिति गठित करने जैसे बिंदु शामिल थे। छात्रों का आरोप है कि यह समझौता आज तक लागू नहीं हुआ, जिसके कारण 18 पुष (3 जनवरी) से लॉकडाउन शुरू किया गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष:
उप-कुलपति प्रो. डॉ. दीपक अर्याल ने बताया कि 1 माघ (15 जनवरी) को त्रिवि के अंतर्गत आने वाले सभी कैंपस के शुल्क निर्धारण के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति को तीन महीने का समय दिया गया है ताकि वह सभी संकायों और विषयों के शुल्क संरचना का अध्ययन कर सके। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद त्रिवि सभा में प्रस्तुत करके उसे लागू किया जाएगा।

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उप-कुलपति ने यह भी कहा कि ये चारों विभाग पहले मानविकी संकाय के अंतर्गत 14 साल से पढ़ाए जा रहे थे और केवल एक साल पहले ही अलग विभाग बनाए गए हैं। उन्होंने छात्रों से लॉकडाउन हटाने की अपील करते हुए कहा कि इस स्थिति में अध्ययन और उनकी मांगों का कार्यान्वयन दोनों ही मुश्किल है।

पृष्ठभूमि:
त्रिवि के अन्य विभागों में प्रति सेमेस्टर शुल्क लगभग 20 हजार रुपये है। विज्ञान संकाय में प्रयोगात्मक कार्य के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है। नवगठित इन चार विभागों में अन्य विभागों से दोगुने से अधिक शुल्क लिए जाने को लेकर छात्र लंबे समय से आपत्ति जता रहे हैं। विश्वविद्यालय का तर्क है कि सरकार से इन नए विभागों को पर्याप्त बजट नहीं मिलता, इसलिए शुल्क अधिक है।

फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच गतिरोध जारी है, और परिसर की सामान्य गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं।

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