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10 महीनों बाद मानव तस्करों के चंगुल से 16 वर्षीय नाबालिग का रेस्क्यू

 


मानव तस्करी जैसी भयावह समस्या के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। करीब 10 महीनों से तस्करों के चंगुल में फंसी 16 वर्षीय नाबालिग बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। इस सफल अभियान ने न सिर्फ एक परिवार की उम्मीदें लौटाईं, बल्कि मानव तस्करी के खिलाफ चल रहे प्रयासों को भी मजबूती दी है।

यह मामला असम के तामुलपुर क्षेत्र के बिनोवापुर गांव का है, जहां एक गरीब परिवार अपनी रोजी-रोटी मजदूरी से चलाता है। जुलाई 2025 में उनकी 16 वर्षीय बेटी अचानक घर के पास से लापता हो गई। शुरुआत में परिवार को लगा कि वह अपनी नानी के घर गई होगी, लेकिन जब वहां भी उसका कोई पता नहीं चला तो चिंता बढ़ गई। हर संभव तलाश के बाद आखिरकार अक्टूबर 2025 में तामुलपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

समय बीतता गया, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। धीरे-धीरे परिवार को आशंका होने लगी कि कहीं उनकी बेटी मानव तस्करों के हाथ तो नहीं लग गई और बेच दी गई हो। इसी बीच स्थानीय संस्था असम सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट (ACRD) तामुलपुर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा और महानिरीक्षक, सीमांत मुख्यालय तेजपुर तक पहुंचाया और बच्ची की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की गईं।

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इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा मानव तस्करी रोधी इकाई, क्षेत्रक मुख्यालय बेजपारा द्वारा चलाए जा रहे “मिशन निर्भया” के अंतर्गत इस मामले को प्राथमिकता दी गई।
इस अभियान का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी के शिकार पीड़ितों को बचाना और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना है।

इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा ने इस केस को बेहद गंभीरता से लेते हुए अपने नेटवर्क और विभिन्न एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य श्री प्रियांक कानूनगो,
सुश्री अनन्या चक्रवर्ती, सलाहकार बाल अधिकार संरक्षण पश्चिम (बंगाल) मिशन मुक्ति फाउंडेशन के निदेशक श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह ने अति सक्रिय भूमिका निभाई ।
कोलकाता से उत्तर 24 परगना तक चली खोज। जांच के दौरान पहले कोलकाता के सियालदह इलाके में बच्ची की लोकेशन मिलने की सूचना मिली। वहां कई स्थानों पर रेकी की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। लंबी तलाश के बाद आखिरकार पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के गाइघाटा क्षेत्र में बच्ची के होने की पुख्ता जानकारी मिली।

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और गाइघाटा थाने को सूचना दी गई उसके पश्चात गायघाट पुलिस थाना द्वारा कार्रवाई की गई और तीसरी लोकेशन पर नाबालिग को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

परिवार की आंखों में खुशी के आंसू
जब इस खुशखबरी की सूचना बच्ची के परिवार को दी गई, तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ। जैसे ही यकीन हुआ, पूरे परिवार की आंखें नम हो गईं। 10 महीनों की पीड़ा और इंतजार के बाद उनकी बेटी सुरक्षित वापस मिलने जा रही थी। परिवार ने सभी अधिकारियों और टीम का बार-बार आभार व्यक्त किया।

इनकी रही अहम भूमिका
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में कई लोगों और संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनमें इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा (ए.एच.टी.यू), श्री प्रियांक कानूनगो सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली, सीमांत मुख्यालय तेजपुर, सुश्री अनन्या चक्रवर्ती, सलाहकार बाल अधिकार संरक्षण पश्चिम (बंगाल), श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह डायरेक्टर मिशन मुक्ति फाउंडेशन नई दिल्ली, और गाइघाटा थाना (पश्चिम बंगाल) से इंस्पेक्टर सुवासिश दत्ता (प्रभारी), सहायक उपनिरीक्षक न. 994 बिश्नु बिस्वास, एलसी न. 258 सुस्मिता दास मौलिक, सी न. 116 बलराम सरकार, सीवी न. 52 स्वराज दास

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*मानव तस्करी के खिलाफ एक मजबूत संदेश*
यह घटना न सिर्फ एक बच्ची की सुरक्षित वापसी की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर समन्वित प्रयास और दृढ़ संकल्प हो, तो मानव तस्करी जैसे अपराधों पर भी प्रभावी प्रहार किया जा सकता है।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन समाज के लिए एक संदेश है कि जागरूकता, तत्परता और सहयोग से हर पीड़ित को न्याय दिलाया जा सकता है।

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