शंकर ग्रुप के अध्यक्ष शंकर अग्रवाल की गिरफ्तारीराजनीतिक प्रभाव और व्यापार जगत पर संभावित असर,:
काठमांडू, 5 अप्रैल 026। नेपाल के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक शंकर ग्रुप के अध्यक्ष शंकर अग्रवाल को संपत्ति शुद्धीकरण (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी इन्फिनिटी होल्डिंग्स और शंकर ग्रुप के बीच हुए संदिग्ध आर्थिक लेन–देन की जांच के क्रम में हुई है।
इस मामले में नेपाल पुलिस के केन्द्रीय अनुसन्धान ब्युरो (CIB) ने पहले इन्फिनिटी होल्डिंग्स के प्रमुख दीपक भट्ट को काठमांडू के नक्साल क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। उसके अगले ही दिन अग्रवाल को भी हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल उन्हें जिला प्रहरी परिसर ललितपुर की हिरासत में रखा गया है और मामले की जांच जारी है।
गिरफ्तारी क्यों हुई?
जांच में सामने आया कि वर्ष 2020 से 2022/23 के बीच शंकर ग्रुप और दीपक भट्ट के बीच करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन–देन हुए थे। नेपाल राष्ट्र बैंक की वित्तीय जानकारी इकाई (FIU) को बैंक खातों में असामान्य ट्रांजेक्शन के संकेत मिले थे।
उदाहरण के तौर पर, जून 2021 में भट्ट के नाम पर सिद्धार्थ बैंक में मौजूद खाते में जगदम्बा स्टील प्रा.लि. के खाते से करीब 45 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। जगदम्बा स्टील शंकर ग्रुप की ही एक कंपनी है।
इसके अलावा, भट्ट के ओवरड्राफ्ट (OD) खाते की सीमा केवल 50 लाख रुपये होने के बावजूद उसमें 45 करोड़ रुपये से अधिक का लेन–देन किया गया। बाद में उसी खाते से लगभग 45 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी भी हुई। इस प्रकार के लेन–देन के स्रोत और उद्देश्य स्पष्ट न होने के कारण इसे संदिग्ध माना गया और जांच शुरू की गई।
राष्ट्र बैंक ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की?
नेपाल राष्ट्र बैंक ने करीब ढाई वर्ष पहले ही इन संदिग्ध लेन–देन को देखते हुए संपत्ति शुद्धीकरण अनुसन्धान विभाग को जांच के लिए पत्र भेजा था।
हालांकि, प्रारंभिक पूछताछ के बाद विभाग ने उस समय कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया और मामला वापस राष्ट्र बैंक को भेज दिया गया। जानकारों का कहना है कि उस समय राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
हाल के राजनीतिक बदलाव के बाद पुराने फाइल को फिर से खोला गया और जांच तेज कर दी गई, जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई।
क्या राजनीतिक संरक्षण का आरोप है?
इस मामले में केवल कारोबारी ही नहीं बल्कि राजनीतिक प्रभाव की भी चर्चा हो रही है। आरोप है कि शंकर ग्रुप और दीपक भट्ट ने वर्षों से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव का इस्तेमाल किया।
यह भी कहा गया कि बजट निर्माण के दौरान कुछ कर दरों में ऐसे बदलाव कराए गए, जिससे शंकर ग्रुप को फायदा हो सकता था। उस समय के वित्त मंत्री जनार्दन शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।
इसके अलावा यह आरोप भी है कि विभिन्न सरकारों के दौरान कुछ नीतिगत फैसलों और कर छूट में इन समूहों के हितों को ध्यान में रखा गया। जांच के दायरे में कई राजनीतिक नेताओं के नाम भी चर्चा में आए हैं, हालांकि अब तक उनके खिलाफ औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है।
शंकर ग्रुप का व्यापारिक विस्तार
शंकर ग्रुप नेपाल के बड़े औद्योगिक समूहों में गिना जाता है। इसका निवेश कई क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिनमें शामिल हैं:
- स्टील उद्योग (जगदम्बा स्टील)
- ऑटोमोबाइल कारोबार (जगदम्बा मोटर्स)
- सीमेंट उद्योग (रिद्धिसिद्धि सिमेन्ट)
- बीमा और पुनर्बीमा कंपनियां
- जलविद्युत परियोजनाएं
- रियल एस्टेट और अन्य व्यवसाय
इतने बड़े औद्योगिक नेटवर्क के कारण इस गिरफ्तारी को नेपाल के व्यापारिक क्षेत्र की एक बड़ी घटना माना जा रहा है।
व्यापार क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरफ्तारी के कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:
1. व्यापारिक जगत में सतर्कता बढ़ेगी
बड़े कारोबारी समूहों के वित्तीय लेन–देन पर निगरानी बढ़ सकती है।
2. निवेशकों में अस्थायी चिंता
इतने बड़े समूह के प्रमुख की गिरफ्तारी से निवेशकों और साझेदार कंपनियों में कुछ समय के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
3. नियामकीय कड़ाई की संभावना
सरकार और नियामक संस्थाएं बैंकिंग लेन–देन और कॉरपोरेट फाइनेंस पर और सख्त नियम लागू कर सकती हैं।
4. राजनीतिक–व्यापारिक संबंधों पर बहस
इस मामले ने नेपाल में राजनीति और व्यापार के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
निष्कर्ष
शंकर ग्रुप के अध्यक्ष शंकर अग्रवाल की गिरफ्तारी केवल एक कारोबारी विवाद नहीं बल्कि नेपाल के आर्थिक, राजनीतिक और नियामकीय तंत्र से जुड़ा बड़ा मामला बनता जा रहा है। आने वाले समय में जांच की दिशा और अदालत की कार्यवाही से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने गंभीर हैं और इसका नेपाल के व्यापारिक माहौल पर कितना व्यापक असर पड़ता है।


