सुप्रीम कोर्ट के परमादेश के बाद केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक हाज़िर जमानत पर रिहा
काठमांडू, बिहीवार (२६ चैत २०८२): नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को हाज़िर जमानत (खोजी भएको बेला उपस्थित हुनेगरी) पर रिहा कर दिया गया है। जिल्ला प्रहरी परिसर काठमांडू के एक अधिकारी ने इस निर्णय की पुष्टि की है।
नेपाल पुलिस ने सरकारी वकील की सहमति से उन्हें रिहा करने का फैसला किया। रिहाई के समय यह शर्त रखी गई है कि जब भी जांच के सिलसिले में उन्हें तलब किया जाएगा, उन्हें पेश होना होगा।
गौरतलब है कि भदौ २३ और २४ (नेपाली कैलेंडर) को हुए ‘जेनजी प्रदर्शन’ के दौरान बानेश्वर में पुलिस की गोलीबारी से किशोरों की मौत के मामले में गठित गौरीबहादुर कार्की आयोग की सिफारिश के बाद उन्हें चैत १४ को गिरफ्तार किया गया था। उस समय ओली प्रधानमंत्री और लेखक गृहमंत्री थे।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों बिनोद शर्मा और सुनील कुमार पोखरेल की पीठ ने चौथी बार हिरासत अवधि बढ़ाने से इनकार करते हुए परमादेश जारी किया था। अदालत ने कहा था कि अगर २५ चैत तक जांच पूरी नहीं होती है, तो उन्हें हिरासत से मुक्त कर आगे की जांच करने का आदेश दिया। काठमांडू जिल्ला अदालत ने तीसरी बार उनकी हिरासत अवधि बढ़ाते हुए ५ दिन का समय दिया था, जो बुधवार को समाप्त हो गया।
गौरीबहादुर कार्की आयोग की सिफारिश को मंत्रिपरिषद ने लागू करने का निर्णय पहले ही कर लिया था। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य समस्याओं के कारण केपी शर्मा ओली को त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में रखा गया था, जबकि रमेश लेखक को महाराजगंज स्थित सशस्त्र प्रहरी बल नंबर-२ गण में हिरासत में रखा गया था।
इस रिहाई से नेपाल की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है। सरकार और प्रशासन अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गया है।
समाचार का सारांश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच पूरी न होने तक पूर्व पीएम ओली और पूर्व गृहमंत्री लेखक को हाज़िर जमानत दे दी गई है।


