२०१५ बिहार चुनाव में लालु नीतिश बनाम नरेन्द्र मोदी के बीच
गठबन्धन की हर पार्टी अपने–अपने दांव में
नवीन कुमार नवल:बिहार विधान सभा का चुनाव २९ नवम्बर २०१५ तक सम्पन्न होकर महागठबन्धन के नीतिश कुमार का मुख्यमंत्री बन जाना तय हो चुका है किन्तु विपक्षी रा.ज.ग.गठबन्धन के भाजपा को मुख्यमन्त्री घोषित करना असम्भव माना जा रहा है । वैसे अन्दर ही अन्दर सुशील कुमार मोदी प्रबल दावेदार हैं किन्तु भाजपा के अलग–अलग खेमे जैसे शत्रुध्न सिन्हा, सी.पी. ठाकुर, अश्विनी चौवे, नन्द किशोर यादव, रामानन्द यादव के साथ हैं तो राम कृपाल यादव उधर शाहनवाज हुसैन के साथ हैं गठबन्धन के रामविलास पासवान, जीतन माझी के साथ पप्पु यादव भी दौड़ में हैं जिसके कारण अमित शाह सहित नरेन्द्र मोदी भी मुख्य मन्त्री का नाम स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं । चुंकि मुख्यमन्त्री का नाम पहले घोषित करने से पार्टी एवम् गठबन्धन दोनो को नुकसान हो सकता है इसलिए चुनाव नरेन्द्र मोदी जी के नाम पर ही लड़ना चाह रहे हैं और इसी का फायदा नीतिश को मिलने वाला है । वैसे लालु का विरोध भाजपा के साथ मिलकर करने से ही मुख्य मन्त्री बनने वाले नितिश आज लालु के कृपा से ही मुख्यमन्त्री बने हुए हंै । साथ ही चुनाव लालु नितिश मिलकर लड़ भी रहे हैं । लालु के साथ नीतिश के मिलने से जनता काफी नाराज भी है चुँकि जङ्गल राज समाप्त कर बिहार को विकास करके विकास पुरुष बनाने वाले नीतिश आज फिर लालु जी के साथ हैं । वैसे राजनीति में कुछ भी सम्भव माना जाता है चुँकि लालु जी का वोट बैंक का प्रतिशत हारने के वाद भी कम नही है लेकिन ये सभी लालु का वोट नीतिश को मिलेगा इसमें शक है । जैसा कि एम.एल.सी.के चुनाव में देखा गया है ।

नीतिश के जदयु से भाजपा के हटने एवं लालू को नीतिश में सटने से सभी विधान सभा क्षेत्र में गठबन्धन के हर पार्टी के लिए टिकट लेना काफी मुश्किल हो गया है । जैसा कि नेपाल से सटे जिला सीतामढ़ी मधुवनी की बात की जाय तो सुरसन्ड वि.स.से मन्त्री रहे स्थानीय विधायक शाहिद अली माझी पार्टी से राजग के प्रबल दावेदार है तो भाजपा के मनीष कुमार हर मोड़ पर जनता के साथ देने वाले सक्रिय उम्मीदवार हैं इसलिए इनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है तो उसी गठबन्धन के लोजपा, रालोसपा के उम्मीदवार भी पूरा दम लगाए हुए हैं उधर विरोध में जदयु की तरफ से सुरसन्ड के अमाना महादेव मन्दिर के माध्यम से विकास करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता विजय शाही प्रवल दावेदार हैं । उसी महागठबन्धन के पूर्व विधायक जयनन्दन यादव के साथ नागेन्द्र यादव भी आस में हैं । राजद के वैश्य समाज के विवेकी साह कई नेता के समर्थन से मैदान में जाना चाहते हैं । साथ ही निर्दलीय के उम्मीदवार के रूप में सुरसन्ड के मुखिया पप्पु चौधरी के साथ साथ धनाढी के सुमन शेखर अमेरिका में व्यवसाय करने वाले समाज सेवा के लिए लगातार जनता के बीच रहकर उम्मीदवारी देने वाले हैं । सीतामढ़ी से भाजपा के पिन्टु, बेलसन्ड से जदयु के सुनिता सिंह, रुनी सैदपुर से गुडी चौधरी, बाजपट्टी से डा.रन्जु गीता, परिहार से राजद के डा.रामचन्द्र पुर्वे आदि का नाम लगभग तय माना जा रहा है । औराई से जदयु के पुर्व सांसद

अर्जुन राय की पत्नी तो राजद से राम स्वरुप राय प्रबल दावेदार हैं । वहीं बेलसन्ड से लोजपा के पुर्व विधायक नगीना देवी तो बाजपट्टी से निर्दलीय फुदन कुमार झा चुनावी दौर में देखे जा रहे हंै । सभी जगह गठबन्धन के पक्ष विपक्ष में किस पार्टी को टिकट मिलेगा यह सवाल मुश्किल बनता जा रहा है । उधर मधुवनी के हरलाखी वि.सभा से स्थानीय विधायक जदयु के शालीग्राम यादव और उसी गठबन्धन राजद के रामअशिष के साथ जदयु के अमरनाथ झा एवम् काँग्रेस पार्टी के मो.सब्बिर प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं । बेनीपट्टी की बात की जाय तो भाजपा के स्थानीय विधायक विनोद नारायण झा भाकपा के कृपानाथ और राजद के रियासत हुसैन के साथ काँग्रेस के दावेदार भी प्रवल माने जा रहे है । इस सबके बाबजुद देखा जाय तो राजग, भाजपा, लोजपा, हम, रालोसपा मे फँसा हुआ है तो महागठबन्धन जदयु, राजद, काँग्रेस के बीच सभी विधान सभा का उम्मीदबार फँसा हुआ है । उधर राजग के मुख्यमन्त्री के उम्मीदवार घोषित न होने से प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिष्ठा दाँव पर लगी हुई है जिसका लाभ नीतिश कुमार उठाने के चक्कर में हंै जबकि राजग नरेन्द्र मोदी के नाम पर बिहार की सत्ता पर काबिज होना चाह रही है जिसको पड़ोसी देश नेपाल की मधेशी जनता भी काफी दिलचश्पी से देख रही है लेकिन राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार जनादेश खिचड़ी जैसा माना जा रहा है । वैसे ये जो पब्लिक है सब जानती है । कहीं दिल्ली की तरह केजरीबाल जैसा बहुमत देकर मुख्यमन्त्री न बना दे । ये आने वाला वक्त ही बताएगा

