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जिसके नीयत में ही खोट हो, वो चोट ही पहुँचाएगा : गंगेशकुमार मिश्र

 

गंगेशकुमार मिश्र, कपिलवस्तु , १९ जनवरी |
★ मधेशियों की हक़ की लड़ाई, अभी जारी है।सरकार की मनसा साफ है, वो किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है। ★अब समय आ गया है, आन्दोलन की दिशा बदलनी होगी; आन्दोलन को व्यापकता देने के लिए;मधेशी मोर्चा के शीर्षस्थ नेताओं को जन- संपर्क अभियान में उतरना चाहिए। ★अधिकार नहीं,  तो सहयोग नहीं; असहयोग आन्दोलन के लिए अन्य दलों के नेताओं से, सहयोग के लिए आह्वान करना होगा।
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देश किसी एक, समुदाय द्वारा अर्जित संपत्ति नहीं; जिसे वो अपनी इच्छा अनुसार भोग करे।देश के समस्त नागरिकों का, देश पर बराबर का अधिकार होता है। नेपाल के संवैधानिक विकास क्रम को देखा जाय, तो पता चलता है; ज्यादे समय तक कोई भी संविधान टिक नहीं पाया।राणाकाल पश्चात प्रथम संविधान, 2004 में आया; यही नेपाल में संविधानवाद का प्रारम्भिक बिन्दु था।उसके बाद, वि.सं. 2007, 2015, 2019 साल होते हुए 2047, फिर आया नेपाल का अन्तरिम संविधान 2063। 2063 के संविधान में,  जो अधिकार मधेश को दिए गए थे; उन्हें अपहरित कर आया, नयाँ संविधान 2072। कहने का मतलब है, एक नहीं दो नहीं;  सात-सात संविधानों का कीर्तिमान स्थापित करने वाला, यह देश, अपने समस्त नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित नहीं कर  पाया। दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश, भारत 65 वर्षों से एक ही संविधान से काम चला रहा है; समय-समय पर संशोधन अवश्य हुए हैं पर नये संविधान की आवश्यकता नहीं पड़ी। नेपाल में हर नये संविधान को, विश्व का अद्वितीय संविधान बताया जाता रहा ।अर्थात छः विश्व स्तरीय संविधान असफल हो चुके हैं, अब सातवें की बारी है। अब आते हैं मुख्य विषय पर, सरकार आन्दोलन को नकारती आ रही है, वैसे संविधान संशोधन और वार्ता का नाटक जारी रखे हुए है।इससे कुछ परिणाम निकलता दिख नहीं रहा है।टाल- मटोल वाली नीति, ऐसे ही जारी रहेगी। जबतक
मधेश के सभी नेता, वो चाहे किसी भी दल में क्यूँ ना हों; एक साझा मंच पर आकर मधेश के लिए आवाज़ नहीं उठाते। अधिकार नहीं, तो सहयोग नहीं असहयोग आन्दोलन के लिए अन्य दलों के नेताओं से सहयोग के लिए, आह्वान करना चाहिए। अब समय आ गया है,आन्दोलन की दिशा बदलनी होगी; आन्दोलन को व्यापकता देने के लिए,  मधेशी मोर्चा  के शीर्षस्थ नेताओं को जनसम्पर्क अभियान में उतरना चाहिए। एकता में बल है, दिखाना होगा।  अहम् छोड़ सबको, साथ आना होगा।
तब कहेगा,मधेश……..
” वक्त आने दे बता देंगे, तुझे वो आसमाँ;
हम अभी से क्या बताएँ,  क्या हमारे दिल में है।”

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