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महागठबन्धन का महाजाल और शहीदों का व्यापार : कैलाश महतो

 

कैलाश महतो, परासी, १४ फरवरी |

मधेशियों की महाबलिदानी तथा नेताओं की महाहैवानी के बाद मधेश को उधार में ही सौदा करने के लिए महाषड्यन्त्रपूर्ण योजनाओं के अन्तर्गत महागठबन्धन की घोषणा की गयी है ।
हमारे बुजुर्गों ने वैसे ही नहीं कहा है, “चोर चोर मौसेरे भाइ ।” मधेशी नेताओं को माने तो इनकी मधेश आन्दोलन का स्वरुप बदलने बाला है । न जाने अब वह स्वरुप क्या और कैसा होगा ?
एक वो नेता जिन्हें मधेशियों ने कभी मार्टिन लुथर किंङ्ग, महात्मा गाँधी तथा भगवान् कृष्ण का अवतार तक का संज्ञा दिया था, वो मधेशी के नाम पर खोले गये पार्टी के नाम तक को बेच डाले और पार्टी को फिरसे उन्हीं के कदमों में विसर्जन कर दी, जिनसे मधेशी तकरीबन २५० वर्षों से लड रहा है । दुसरा वो नेता जो मञ्चों पर मधेशियों के लिए मरने को तैयार हो जाते हैं और गर्मजोशी में भाषण ठोक देते हैं कि प्रदेश देने में नेपालियों ने आनाकानी की तो मधेश को अलग देश बना लेंगे । लेकिन मञ्च से उतरते ही उनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है, जब उनके मालिक करेण्ट बाले डण्डे लेकर अपने सामने बुलाकर हिसाब किताब लेते है । तीसरा वो दल और उनके विद्वान नेतागण जो यह नारा देने में सबसे आगे आ जाते हैं, “सरकार नहीं अधिकार चाहिए, सत्ता नहीं, प्रभुसत्ता चाहिए ।” और जब उन्हें जुठे मांस के टुकरे या हड्डी ही क्यूँ न हो, अगर नसीब हुआ तो भौंकते कुत्ते के तरह वे जुठे को खाने के लिए तैयार होकर चोरों का भी साथी सहयोगी बन जाते हैं । चौथा वो जिनके न तो पार्टी की, न नेता की कोई दर्शन और सिद्धान्त है केवल सरकार और सत्ता को सहयोग करने के अलावा ।mahagathbandhan

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बेचारे पाँचवी, छठी और सातवीं पार्टीयों की तो मधेश में जाकर मञ्च पाने की राह खुलने की चाह की उत्कण्ठा पूरा होने का सपना रहा है । खुदा करे, उनकी लालसा पूरा हो जाये ।
पाँचवे वह है जो “धोवी के गदहा न घर के, न घाट के बराबर” जैसे । वे नेपालियों की बात करेंगे तो मधेशियों से मार खाने बाले हैं और मधेशियों की ठेकेदारी की बात करते हैं तो पाये हुए उनकी मन्त्री पद भी अपने ही नेपाली गोर्खाली भाइयोंद्वारा छीन ली जाती है । छठे भाइजान वो हैं, जिनको लौटरी में ही राजगद्दी मिल जाती है, जो अपने ही जन्म दाता को मार डालता है । वो फिरसे इसी फिराक में होंगे कि उनके सिनियर फिर कोई जेल चले जाते तो बिना मेहनत महाअध्यक्ष तथा नेपाली राज के मन्त्रिमण्डल में महामन्त्री बन जाते । फिर से अपनी किसी नयी को मन्त्री बना पाते । और सातवें तो सारे जीवन एन जी ओ, आइ एन जी ओ चलाते रहे और किसी पार्टी के आर्थिक फाँट से हटा दिए जाने के कारण क्रुद्ध होकर पार्टी फोरकर मन्त्री बनने तथा मधेशियों के भोट को अपनी बपौती सम्पति मानकर अपनी श्रीमति महोदया को मधेशियों के शर पर बैठाने की नेक काम जो किया है । उन्होंने महिला को सम्मान किया है ।
अब मधेश में महागठबन्धन बनाया गया है महालण्ठबन्धनों की । यह महागठबन्धन का महजाल है मधेशी शहीदों का व्यापार करने के लिए । मधेशी गठबन्धन या महागठबन्धन नेपाली राज के योजना के अनुसार ही चली है और चलना भी तय है । और यह तय है कि कोई भी गठबन्धन मधेश के किसी काम के नहीं होंगे । इनकी उद्देश्य नेपाली राज को सहयोग करना, मधेशियों को धोखा देना, उन्हें नेपालियों की गोलियों का शिकार बनाना, मधेशियों को अपने स्वराज से बेदखल करना, बदले में नेपाली राज से तोहफा पाना, पैसे या उनके सरकार में सहभागी होना ही है । आने वाले दिनों में यह पोल खुलना भी तय है कि मोर्चा के योजनाओं को सफल बनाने में महागठबन्धन भी साथ होकर स्वराजियों के रास्तों को रोकने का दुस्प्रयास किया गया था, जो असफल रहा ।

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