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यूपी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में किसानों का 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ

 

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हिमालिनी डेस्क
 ४ अप्रील लखनऊ (जेएनएन)। नयी सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों के लिये बड़ा फैसला किया गया है। करीब डट लाख किसानों के एक लाख तक के कर्ज माफ कर दिए हैं। यह कर्ज करीब घट हजार करोड़ है। करीब डेढ़ घंटे तक चली पहली बैठक खत्म हो चुकी है। जिसमें कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिये गये हैं। बैठक के बाद अब प्रेस कांफ्रेंस में फैसलों के बारे में जानकारी दी जायेगी।

विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रदेश के किसानों से किये गए वादे को योगी आदित्यनाथ सरकार की आज होने जा रही कैबिनेट की पहली बैठक में निभाने जा रही है।भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र में सूबे के लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण माफ करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को लखीमपुर खीरी के राजकीय इंटर कालेज मैदान में आयोजित चुनावी रैली में एलान किया था कि भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। लिहाजा योगी सरकार कैबिनेट की पहली बैठक में कर्ज के बोझ से कराहते अन्नदाताओं के फसली ऋण को माफ करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए उन्हें राहत देने का इंतजाम करेगी।

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सूत्रों के अनुसार सरकार ने फिलहाल 31 मार्च २०१६ तक लघु व सीमांत किसानों द्वारा लिये गए फसली ऋण में से उनके द्वारा वित्तीय वर्ष 2016/17 के दौरान भुगतान की गई राशि को घटाते हुए अधिकतम एक लाख रुपये की सीमा तक के कर्ज माफ करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा सरकार लघु व सीमांत किसानों के गैर निष्पादक ऋणों का भी भुगतान करेगी। इस प्रस्ताव पर मुहर लगने से सूबे के तकरीबन डट लाख लघु व सीमांत किसान लाभान्वित होंगे। प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने पर सरकार पर तकरीबन ३६००० करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ आएगा।

कर्ज माफी की योजना बनाने को गठित होगी समिति
लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण को माफ करने की योजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है। यह समिति कर्जमाफी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए संसाधनों की व्यवस्था करने के उपाय सुझाएगी और योजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तय तय करेगी।

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सूबे में हैं २.१५ करोड़ लघु व सीमांत किसान
उत्तर प्रदेश में २.३३ करोड़ किसान हैं। इनमें १.८५ करोड़ सीमांत और लगभग तीस लाख लघु किसान हैं। इस हिसाब से सूबे में लघु व सीमांत किसानों की संख्या द्द.ज्ञछ करोड़ है। सीमांत किसान वे होते हैं जिनकी अधिकतम जोत एक हेक्टेयर तक होती है। वहीं लघु श्रेणी के किसान वे होते हैं जिनकी जोत एक से दो हेक्टेयर तक होती है।

पखवारे तक हुई माथापच्ची
ध्यान रहे, शपथ लेने के पखवारे भर तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ इसलिए अपनी कैबिनेट बैठक नहीं बुलाई क्योंकि उन्हें भाजपा के इस भारी भरकम चुनावी वादे को पूरा करना था। इस दरम्यान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने अपने स्तर से किसान कर्जमाफी योजना को मुकम्मल स्वरूप देने के लिए सभी संभावनाओं पर विचार किया।

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संकल्प पत्र से आमजन तक
भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र २०१७ में किसानों को आर्थिक मदद देने का वादा किया था। सभी लघु व सीमांत किसानों के फसली ऋण माफ करने के साथ उन्हें ब्याजमुक्त फसली ऋण दिलाने का भी एलान किया गया था। यह भी कहा गया था कि भविष्य में गन्ना किसानों को फसल बेचने के 14 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करने की व्यवस्था सरकार लागू करेगी। संकल्प पत्र के ये सभी वादे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जुबान से गुजरते हुए जनजन के बीच गए। किसानों को इस बात का भरोसा हो गया कि भाजपा की सरकार बनने पर उनकी सुधि ली जाएगी। किसानों की इसी आकांक्षा को भाजपा की नई सरकार ने परवान चढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। जाहिर है कि मोदी के वायदों की रक्षा के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है और मंगलवार को इसकी बानगी देखने को मिलेगी।

– एजेन्सी

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