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सेमेस्टर प्रणाली अधिक स्तरीय शिक्षा प्रदान करती है : डॉ. मीना वैद्य मल्ल

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प्रो.डॉ. मीना वैद्य मल्ल, काठमांडू | त्रिभुवन विश्वविद्यालय में वि.सं. २०७० से लागू हुई है, सेमेस्टर प्रणाली । शुरुआती दौर में यह प्रणाली सिर्फ विश्वविद्यालय कैम्पस तक ही सीमित थी, लेकिन इस वर्ष से काठमांडू उपत्यका के सभी कैम्पसों में लागू हो चुकी है । मैं अपने अध्ययन एवं अनुभव के आधार पर कहना चाहूंगी कि इस प्रणाली में शिक्षक ज्यादा सजग व संवेदनशील होकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में उत्साहित होते हैं और छात्र भी अनुशासित ढंग से

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प्रो.डॉ. मीना वैद्य मल्ल
विभागाध्यक्षा
राजनीतिशास्त्र केन्द्रीय विभाग त्रि.वि. कीर्तिपुर

ज्ञानार्जन प्राप्ति हेतु उत्साहित रहते हैं । इसका आशय यह नहीं है कि वार्षिक प्रणाली में शिक्षा की गुणवत्ता नहीं थी । सेमेस्टर प्रणाली में ‘क्वालिटी ऑफ एजुकेशन’ व ‘एकेडेमी एक्सीलेन्स’ ज्यादा इन्हैन्स होता है । जो छात्र लगनशील हैं, मेहनती हैं और मुझे पढ़ना है, अनुसंधान करना है और सफल भी होना है, ऐसी भावना वाले छात्र अवश्य सफल होते हैं और आगे भी बढ़ते हंै । यह प्रणाली लागू होने के पश्चात् छात्र अनावश्यक राजनीतिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं और थोड़ा सुदृढ़ व सबल भी होते दिखाई दे रहा है । इस प्रकार देखा जाय तो यह प्रणाली त्रि.वि. को इन्हैन्स हेतु प्रभावकारी बनाने के साथ–साथ उपयोगी भी है ।
अभी त्रि.वि. प्रति जनमानस में जो नकारात्मक धारणाएं रही हैं, अगर इस प्रणाली को संगठित वयवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जाए तो यूनिवर्सिटी की क्षमता अभिवृद्धि हेतु यह प्रणाली ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकती है । क्योंकि युनिवर्सिटी का उद्देश्य ही ‘क्वालिटी मैनपावर उत्पादन’ करना रहा है ।
अभी सुनने में आता है कि त्रि.वि. में बहुत कम छात्र प्रवेश लेते हैं । कुछ हद तक यह सच भी है । इस संदर्भ में मैं कहना चाहुंगी कि वर्तमान में बहुत सारे ‘वोकेशनल व टेक्निकल कोर्सेज’ प्रारम्भ हो गये हैं । प्रारंभ में मानवीकि संकायों में सिर्फ ४–५ विषयों में पठन–पाठन होते थे जबकि अभी ३०–३४ विषयों में पठन–पाठन होता है । ऐसी स्थिति में छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय की ओर उन्मुख होते हैं । तीसरा कारण है, छात्रों का पलायन होना । इस हिसाब से देखा जाए तो छात्र संख्या में कमी नजर आती है लेकिन जितने छात्र पढ़ने हेतु दाखिल होते हैंं वे अवश्य सफल होते हैं । वार्षिक प्रणाली में ३००–४०० छात्र प्रवेश लेते थे, लेकिन नियमित नहीं होते थे, उनका ‘आउटपुट’ भी नगण्य–सा होता था । खासकर चुनाव (विद्यार्थी युनियन) के समय में छात्रों की संख्या में वृद्धि होती थी । अन्य समय में कक्षा में छात्रों की उपस्थिति होती ही नहीं थी । जबकि सेमेस्टर प्रणाली में इस प्रकार की स्थिति नहीं होती है । इस प्रणाली में जो छात्र अध्ययन, अनुसंधान करने के उद्देश्य से आते हैं, वे छात्र अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होते हैं ।
सेमेस्टर प्रणाली अन्य प्रणालियों की अपेक्षा स्तरीय है । सेमेस्टर प्रणाली अधिक स्तरीय शिक्षा प्रदान करती है । इसके लिए यह जरुरी है शिक्षक सक्षम व अनुरक्त हो, अपना ओरिएन्टेशन पैटर्न, वर्किंग स्टाइल व कल्चर को परिवर्तन करे । इसके साथ–साथ विभागों में प्रशस्त बजट कीयवस्था हो, योग्य एवं क्षमतावान शिक्षकों की नियुक्ति हो । (पत्रिका में प्रकाशित शीर्षक की अशुद्धि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं । संपादक ।)

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