मोदी भ्रमणः नेपाल–भारत संबंध में ‘आइसब्रेक’: माधव नेपाल
काठमांडू, २० मई । नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व प्रधानमन्त्री माधव कुमार नेपाल ने कहा है कि भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी की नेपाल भ्रमण के बाद नेपाल–भारत सम्बन्ध में ‘आइसब्रेक’ हुआ है । उनका मानना है कि विगत २–३ सालों से नेपाल–भारत बीच जो असहज परिस्थिति थी, नेपाल भ्रमण के दौरान वह सब खत्म हो गया है ।

शनिबार काठमांडू में नेपाल भारत मैत्री समाज द्वारा आयोजित ‘प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की नेपाल भ्रमणः भविष्य की सम्भावना’ (फ्युचरेष्टिकी भ्यू) विषयक विचार गोष्ठी को सम्बोधन करते हुए नेता नेपाल ने कहा– ‘मोदी भ्रमण के वाद नेपाल में दो विचारधार दिखाई दे रही है– एक निराशावादी और दूसरा आशावादी । लेकिन निराश होने की जरुरत नहीं है । आशावादी बन कर विशाल सम्भावना को देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए ।’ नेता नेपाल का यह भी कहना है कि अब दोनों देशों की हित को मध्यनजर करते हुए संबंध को आगे बढ़ाने की जरुरत है ।
प्रमुख अतिथि के रुप में सम्बोधन करते हुए नेता नेपाल ने आगे कहा– ‘नेपाल–भारत बीच आपसी सम्बन्ध विश्वासपूर्ण और सम्मानपूर्ण होना चाहिए, नेपाली जनता भी यही चाहती है । इसीलिए भारत के साथ बातचीत करते वक्त ऐसी भावना को खुलकर रखना चाहिए ।’ नेता नेपाल का यही भी मानना है कि भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी की नेपाल भ्रमण के दौरान मोदी जी ने नेपाली भावनाओं को सम्बोधन और सम्मान किया है ।

कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि तथा नेपाल स्थित भारतीय राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमन्त्री मोदी जी का नेपाल भ्रमण ने नेपाल को एक वृहत सम्भावना की ओर ले गया है । उन्होंने यह भी कहा कि ४ साल के अन्दर ३ बार नेपाल भ्रमण कर भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी जी ने नेपाल–भारत सम्बन्ध को एक विशिष्ठ सम्बन्ध के रुप में विकसित किया है । कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए महामहिम राजदूत जी ने कहा– मोदी जी ‘सब का साथ सबका विकास’ नारा देकर आगे बढ़ रहे हैं, इधर नेपाल सरकार भी ‘समृद्ध नेपाल, खुशी नेपाली’ नारा के साथ आगे बढ़ रही है । इस नारें को सार्थक बनाने के लिए भारत हरदम तैयार है । महामहिम पुरी जी का यह भी मानना है कि नेपाल भविष्य में क्या करना चाहता है और भारत से क्या अपेक्षा है, उसमें स्पष्ट होने की जरुरत है ।


कार्यक्रम में सम्बोधन करते हुए नेपाली कांग्रेस के नेता तथा पूर्व अर्थमन्त्री डा. रामशरण महत ने कहा कि मोदी जी का भ्रमण के बाद नेपाल–भारत के बीच धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक सम्बन्ध में मजबुती आई है, अब इस सम्बन्ध को आर्थिक लाभ की ओर केन्द्रित करना चाहिए । उनका मानना है कि नेपाल को विकसित करना है तो हर क्षेत्र में भारतीय सहयोग अपरिहार्य है । डा. महत ने कहा कि पर्यटन, जलविद्युत, कृषि आदि क्षेत्रों में काम करके नेपाल को समृद्ध बनाया जा सकता है । उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल–भारत दोनों देश आर्थिक समृद्धि की ओर आगे बढ़ रही है, इसीलिए आपसी सद्भाव कायम रकर आपसी हितों को मध्यनजर करते हुए आगे बढ़ना चाहिए । भारत की ओर से आर्थिक और प्राविधिक सहयोग के लिए भी उन्होंने आग्रह किया ।

इसीतरह कार्यक्रम के अतिथि तथा राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल के अध्यक्ष मण्डल के सदस्य राजेन्द्र महतो जी ने कहा कि नेपाल–भारत सम्बन्ध को हरदम अविश्वास और आशंका में रखने की कोई भी जरुरत नहीं है । नाकाबन्दी सम्बन्धी प्रसंग में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा– ‘नेपाल में हरदम भारतीय नाकाबंदी कहा जाता है, लेकिन उक्त नाकाबन्दी भारत ने नहीं, नेपाल के ही मधेशवादी जनता ने की थी । लेकिन इसी विषयों को लेकर यहां बारबार भारत की आलोचना की जाती है । इसतरह आपसी सम्बन्ध में हरदम अविश्वास और आशंका बनाये रखना आपसी सद्भाव और मजबूत सम्बन्ध के लिए ठीक नहीं है ।’ इसीतरह नागरिक समाज के अगुवा डा. सुन्दरमणि दीक्षित ने भी कहा कि मोदी भ्रमण के दौरान सामाजिक संजालों में जो विरोध दिखाई दिया, उसमें नेपाल सरकार को गम्भीर होने की जरुरत है । उनका मानना है कि मोदी जी का भ्रमण ऐतिहासिक और सकारात्मक है ।

कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए आईपीजी के सदस्य वक्ता निलाम्बर आचार्य ने कहा कि दोनों देशों की भविष्य आपसी सम्बन्ध में अन्तरनिहित है । उनका मानना है कि आपसी सम्बन्ध आर सहकार्य बिना भारत और नेपाल आगे नहीं बढ़ सकता । राजनीतिक विश्लेषक सीके लाल ने कहा कि नेपाल–भारत सम्बन्ध राजनीतिक रुप में सिर्फ दिल्ली और काठमांडू में सिमट कर रह गया है । उनका कहना है कि बोर्डर में रहनेवालों की जो समस्या है, उनकी आवाज न तो दिल्ली सुनती है, न तो काठमांडू ।

कार्यक्रम में नेपाल–भारत सम्बन्ध और भविष्य की सम्भावना पर राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष गोविन्द पोखरेल, ज्ञानेन्द्रलाल प्रधान, जयराज आचार्य, लालबाबु यादव, बुद्धिनारायण श्रेष्ठ, रामभक्त ठाकुर, दुर्गेसमान सिंह, डा. सूर्य ढुंगेल, दायाराम अग्रवाल, नवराज अधिकारी, केशवराज झा, गोविन्दशर्मा पोखरेल, रवी थापा, श्रीष प्रधान, दमननाथ ढुंगाना आदि वक्ताओं ने अपनी–अपनी विचार व्यक्त किया था । कार्यक्रम में नेपाल–भारत मैत्री समाज के अध्यक्ष प्रेम लस्करी ने स्वागत मन्तव्य व्यक्त किया और उनके ही सभापतित्व में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ।

