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मधेशी नस्ल समाप्त करने हेतु वर्तमान में राज्य की षड़यंत्र : रामेश्वर प्रसाद सिंह (रमेश)

 
रामेश्वर प्रसाद सिंह  (रमेश), गोलबजार-13, सिरहा (मधेश ) | मधेशी नस्ल समाप्त करने हेतु ही वर्तमान में राज्य द्वार व्यापक षड़यंत्र किया जा रहा है, प्रस्तुत है कुछ सत्य और तथ्य

फाइल फोटो – सोर्स, चन्दन सिंह

{क} बाढ़ की समस्या को अन्देखा करना
                        बाढ़ और इसके नतीजे के रुप में होने वाली अत्यधिकि साँप डंक से भले ही वर्ष में सौ या उससे कम मधेशी मरता हो, किंतु हर वर्ष बाढ़ से पड़ने वाली आर्थिक नुकसान के वजह से मधेशी जनता अत्यधिक कर्ज में डुबता जारहा हैं | बिदेश जाकर मर-मर के काम करने पर भी कर्ज नहीं चुका पाते हैं और अंत में भूमि बेच कर वे कर्ज चुकाने पर मजबूर होजाते हैं | इस तरह से मधेशी लोंग भूमिहिन होकर विस्थापित होने पर मजबूर हो रहें हैं |

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{ख} विकास के नाम पर विनास
            समय सापेक्ष मानव की जीवन स्तर को उकासना ही असल मायने में विकास होता है | किंतु राज्य द्वारा प्रायोजित निति के आधार पर मधेश विकास के नाम पर विनास की ओर जा रहा है जिससे आम मधेशी जनता दिन व दिन गरिब और लाचार होते जा रहें हैं | पुल, इमारतें, चमचमाती सड़कें भी अपनी जगह पर जरुरी हैं किंतु उसके लिए सही मुआवजा और भूमि व्यवस्थापन भी अपरिहार्य हैं |

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{ग} बंद बक्से की सोंच में सिमित रखना
                       कथित मधेश केन्द्रित दल को सत्ता और भत्ता के लोभ में हमेशा राज्य  के वफादार बनाकर रखना और समय समय पर मधेश विद्रोह करवाना जिससे अत्यधिक सेना-प्रहरी को मधेश मे विशेष सुरक्षा निति के तहद नियुक्त कर सकें और  उपनीवेशीक शासन को और भी मजबूत किया जा सके | विद्रोह के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग कर नरसंहार किया जा सके | साथ ही मधेशी जनता को आन्दोलन, अधिकार, नौकरी, आदि इत्यादि से उपर सोचने का वक्त ही न मिलें और मिलें भी कैसे जब एक ओर दो वक्त की रोटी के लिए भी कड़ा संघर्ष करने पर मजबूर किया जाए |

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अभी के दौर में यह कोई नकार नहीं सकता हैं कि मधेशी समाज विखंडित हैं | यहाँ कोई भी एजेंडा और प्रोपोगांडा में लुभाकर शासक लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगा हैं | लोंग तर्क-कुतर्क कुछ भी करें किंतु औपनीवेशिक शासन तले रहें जनता और भूमि की मुक्ति हेतु अधिकार प्राप्त मधेश ही एक विकल्प हैं |

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