मधेश में बाढ़ और प्रभाव : विजय यादव
हिमालिनी, अंक जुलाई २०१८ | तराई मधेश में ज्यादातर जगहों में कच्ची सड़कों और नदी में आए बाढ़ के कारण बरसात के माह में यहाँ के यातायात में बहुत सारी कठिनाई हो जाती हैं । बाढ़ के पानी की वजह से सड़क बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है । भारी बारिश होने की वजह से लोगों के घरों में पानी भर जाता है । सड़क मार्ग पर बाढ़ का सबसे अधिक असर पड़ता है । पानी के तेज बहाव के कारण सड़क मार्ग के पुल–पुलिया टूट जाते हैं जिसके कारण आवागमन नहीं हो पाता है । गली मोहल्लों में भी पानी भर जाता है जिससे छोटे वाहन भी नहीं चल पाते हैं । बाढ और बरसात के महीना में मुख्य रूप से किसानों पर प्रभाव बहुत बड़ा संकट आ जाता हैं । बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा किसानों पर होता है क्योंकि उसका फसल पूरी तरह तबाह हो जाती है अक्सर आपने सुना होगा कि किसान आत्महत्या कर लेते हैं क्योंकि वह अपनें अन्न को बचानें में असमर्थ हो जाते हैं । खेतों में मिट्टी के कटाव से जमीन बंजर हो जाती है जिससे किसान भविष्य में उस जमीन पर खेती नहीं कर पाते हैं ।
जब कभी भी भंयकर बाढ आती है तो उसके साथ अकाल और गरीबी भी साथ आती है । क्योंकि किसान की अर्थव्यवस्था पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था टिकी रहती है । अगर किसानों को मुनाफा नहीं होता है तो ऐसे में देश को भी मुनाफा नहीं होता वह इसलिए कि अभी भी तराई मधेश में ९० फीसदी लोग खेती पर ही आश्रित हैं । अनाज एवं सब्जियों में सब्जियों की भारी किल्लत हो जाती है और दाम भी आसमान छूने लगता है ।
तराई मधेश मे बहुत सारे किसान, खेती करने के लिए बैल रखखे हैं । साथी ही भैस, गाय, बकरी जैसे जानवर पालते हैं और ये जानवर घास खाते हैं जब बाढ़ का पानी भर जाता है तो ऐसे में घास व पौधे भी सड़ जाते हैं जिसे जानवर नहीं खा सकते । बाढ़ का पानी जानवरों को भी अपने साथ बहा कर ले जाती है जिससे उसकी मौत हो जाती है ।
बार–बार बाढ़ आने से विकास भी बुरी तरह प्रभावित होता है । इसका सबसे अच्छा उदाहरण प्रदेश नं. २ लगायत तराई क्षेत्र के पश्चिमी हिस्सों मे जहां पर हर साल छोटी या बड़ी बाढ आती रहती है जिसके कारण वहां का विकास अभी तक नहीं हो पाया है । किसी का घर गिर जाता है या किसी का परिवार बिखर जाता है इन सब को संवारने में मनुष्य की एक पीढ़ी खत्म हो जाती है । क्योंकि पैसा कमाना और इकट्ठा करना उसके बाद घर को बनाने का कार्य शुरू होता है जिसमें एक लंबा समय लग जाता है ।
नेपाल के तराई हिसों में हरेक साल बाढ़ के कारण बड़े पैमानें पर जनधन की क्षति होती आ रही हैं । इस सन्दर्भ पर बुद्धिजीवी, राजनीतिकर्मी, नागरिक समाज, पत्रकारों की धारणा ः–

