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जानें, पौष मास का महत्व, बरतें ये सावधानियां

 

एजेन्सी: हिन्दू पंचांग के 9 वें महीने को पौष कहते हैं. इस महीने में हेमंत ऋतु का प्रभाव रहता है अतः ठंड काफी रहती है. इस महीने में सूर्य अपने विशेष प्रभाव में रहता है. मान्यता है कि इस महीने में मुख्य रूप से सूर्य की उपासना ही फलदायी होती है.

ये भी कहा जाता है कि इस महीने सूर्य ग्यारह हज़ार रश्मियों के साथ व्यक्ति को उर्जा और स्वास्थ्य प्रदान करता है. पौष मास में अगर सूर्य की नियमित उपासना की जाए तो वर्षभर व्यक्ति स्वस्थ और संपन्न रहेगा.

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किस प्रकार करें पौष मास में सूर्य देव की उपासना?

सबसे पहले नित्य प्रातः स्नान करने के बाद सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए. इसके बाद ताम्बे के पात्र से जल दें. जल में रोली और लाल फूल डालें. इसके बाद सूर्य के मंत्र “ॐ आदित्याय नमः” का जाप करें. बता दें, इस माह नमक का सेवन कम से कम करना चाहिए.

इस महीने खान-पान में किस तरह की सावधानी और ख्याल रखें?

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– खाने पीने में मेवे और स्निग्ध चीज़ों का इस्तेमाल करें.

– चीनी की बजाय गुड़ का सेवन करें.

– अजवाइन, लौंग और अदरक का सेवन लाभकारी होता है.

– इस महीने में ठन्डे पानी का प्रयोग, स्नान में गड़बड़ी और अत्यधिक खाना खतरनाक हो सकता है.

– इस महीने में बहुत ज्यादा तेल घी का प्रयोग भी उत्तम नहीं होगा.

 

पौष मास के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है ?

– इस महीने में मध्य रात्रि की साधना उपासना त्वरित फलदायी होती है.

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– इस महीने में गर्म वस्त्रों और नवान्न का दान काफी उत्तम होता है.

– इस महीने में लाल और पीले रंग के वस्त्र भाग्य में वृद्धि करते हैं.

– इस महीने में घर में कपूर की सुगंध का प्रयोग स्वास्थ्य को खूब अच्छा रखता है.

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