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मोदी की विदेश यात्राओं ने भारत की छवि को निखारा है : डा.श्वेता दीप्ति

 

भारत के चुनाव परिणाम का विश्व पर असर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डा. श्वेता दीप्ति, काठमांडू | चीन–भारत के रिश्ते नाजुक दौर से गुजर रहे हैं ऐसे में नजर रखने वाले जल्द ही इस बात पर ध्यान देना शुरू करेंगे कि मोदी के सत्ता पर पकड़ मजबूत बनाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते क्या मोड़ लेते हैं ।

पिछली बार मोदी को विकास के मुद्दे पर चुना गया था । हालांकि, उनकी कुछ कोशिशें अच्छे नतीजे देने में नाकाम रही हैं, लेकिन उन्होंने साबित किया है कि वो नारे लगाने वाले नेता नहीं बल्कि करने में यकीन रखते हैं । २०१९ का चुनाव भारत की जनता की भावना पर टिकी हुई है । पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के लिए आम जनता में जो रोष था, दर्द था उस पर एयर स्ट्राइक का मरहम मोदी सरकार लगा कर उनके भावनात्मक वोट पर तो कब्जा कर ही लिया है । इसलिए पिछले पाँच साल में मोदी सरकार ने आम जनता में नाराजगी पैदा की भी थी तो वह वर्तमान में धुल चुका है ।

देश को लेकर मोदी का सख्त रुख उनकी घरेलू नीतियों में भी दिखा, जैसे नोटबंदी और उनके कूटनीतिक तर्क । आज अगर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे की बात करें, तो पाते हैं कि भारत का पुराना रुख बदला है पहले भारत किसी को नाराज नहीं करने की कोशिश करता था । इसलिए कोई भी सख्त कदम उठाने से परहेज करता था किन्तु आज भारत अपने हित और लाभ को देखते हुए विवादों पर स्पष्ट पक्ष लेने लगा है ।

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मोदी ने चीन और रूस के साथ रिश्ते सुधारे हैं । शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन का सदस्य बनने के लिए आवेदन किया है । इसके बावजूद अमरीका और जापान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है । अगर मोदी अगला चुनाव जीतते हैं तो भारत का कड़ा रुख आगे भी जारी रहेगा यह तय है ।

भारत और अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं, जिसमें काफी समानता भी है । बराक ओबामा के साथ भारत और अमेरिका के रिश्ते में काफी मजबूती आई और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग सुधार और व्यापार में वृद्धि हुई । बराक ओबामा की दो बार हुई भारत यात्रा ने भारत और अमेरिका के रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया क्योंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ मिलकर दुनिया से आतंकवाद को खत्म करने और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के निर्माण के लिए कई समझौते किये । साथ ही जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, गरीबी, कुपोषण, मानवाधिकार जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दो पर साथ रहकर काम करने की इच्छा जतायी । इससे दोनों देश कई मुद्दों पर पास आये ।

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२०१७ में डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के नए राष्ट्रपति बने । इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों को और मजबूती मिली । डोनाल्ड ट्रम्प का भारत के खिलाफ शुरू से रवैया काफी खास रहा है । ट्रम्प ने अपने चुनाव प्रचार के समय कहा था कि यदि वे राष्ट्रपति बनते हैं, तो अमेरिका में रह रहे हिन्दू समुदाय के लोगों के लिए वाइट हाउस में एक सच्चा दोस्त होगा । डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे विदेशी मंत्री थे, जिन्होंने वाइट हाउस का दौरा किया था । नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिकी दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच अनेक समझौते किये । २०१९ के चुनाव परिणाम अगर भाजपा के पक्ष में जाती है तो स्वाभाविक तौर पर भारत और अमेरिका के रिश्ते प्रगाढ़ होंगे ।

मोदी की विदेश यात्राओं ने भारत की छवि को निखारा है । बात चाहे इजराइल की हो, बंगला देश की हो, खाड़ी देश की हो, अफगानिस्तान की हो, ईरान की हो या फ्रांस की हो आज ये सभी देश भारत के साथ खड़े हैं । यहाँ तक कि आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरानखान का भी मानना है कि भारत पाकिस्तान के रिश्ते में सुधार मोदी के पाले में ही सम्भव है ।

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जहाँ तक नेपाल का सम्बन्ध है तो यह सत्य है कि नेपाल में हुए कथित नाकेबंदी का असर नेपाल भारत के सम्बन्धों पर पड़ा जिससे रिश्ते में कड़वाहट आई । किन्तु उस कड़वाहट को मोदी की नेपाल यात्रा और केपी ओली की भारत यात्रा ने काफी हद तक कम किया । रिश्ते के तनाव को कम करने हेतु ओली ने  इस दिशा में एक महत्वपूर्ण बात कही थी, उनका कहना था कि २१वीं सदी की सच्चाइयों को ध्यान में रखते हुए वे ‘भरोसे की बुनियाद’ पर दोनों देशों के बीच रिश्तों की बुलंद इमारत खड़ी करना चाहते हैं । उनका यह बयान अपने आप में यह बताने के लिए पर्याप्त है कि भारत और नेपाल के संबंध अब एक नए आयाम में प्रवेश कर चुके हैं । कई महत्तवपूर्ण परियोजनाओं पर नेपाल ने भारत के साथ सहमति की है जो निश्चित तौर पर मोदी के पुनः प्रधानमंत्री बनने पर गतिशील होगी ।

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