Sat. Oct 19th, 2019

नई पीढ़ी और पुरानी पीढी़ के बीच बढ़ता गैप : कुसुम

आजकल सब ऑनलाईन रिलेशन बनाने में लगें हैं। जिसका परिणाम तनाव में वृध्दि और अपनों से दूरी बढ़ रही है।

नई पीढ़ी और पुरानी के बीच भावात्मक गैप बढ़ता ही जा रहा है।अगर समझा जाये तो यह बड़ी समस्या है।कोई भी आजकल बड़ों की रोक-टोक पसन्द ही नही करता।कोई बड़ों को साथ  रखना ही नही चाहता।बड़े चाहकर भी अपनों को सलाह रखने का अधिकार नही रखते।इसका परिणाम यह हो रहा है कि परिवार एकल होते जा रहे हैं।जिसका असर नई पीढ़ी (बच्चों)पर दिख रहा है ।मां-बाप के नौकरी करने से बच्चों कों बाईयों(नौकरानियों) के भरोसे छोड़ा जा रहा है।बूढे मा-बाप को पोता-पोती के सुख से वंचित रखा जा रहा है।बहुत सी बातें बच्चे बुजुर्गों से सीखते हैं उन सब से बच्चे को वंचित रखा जा रहा है। जिसका परिणाम ये हो रहा है कि बच्चों में सहनशीलता की कमी दिखाई देने लगी है। युवा मां-बाप को लगता है कि उन्हें घर के बड़े लोगों की जरूरत ही नही है।उनके पास पैसे हैं तो बच्चे यूं ही पल जाएंगे।पर एक बात सोचिए क्या वे नौकरानी दादा-दादी,नाना-नानी वाला प्यार  दे पायेंगे ? उनमें(बच्चों) में नैतिक मूल्य ड़ाल पायेंगे?दूसरी बात यह कि इससे बड़े-बूढ़ों का अकेलापन और तनाव बढ़ता जा रहा है।हमारे पास भी उनके लिए समय नही होता है। कई परिवार वृध्दों को वृध्दाश्रमों में भेज देते हैं। हम बड़ों की नही सुनना चाहते और बच्चे हमारी नही सुनना चाहते।हमारे पास न बड़ों के लिए समय  है और न ही बच्चों के लिए।हम अपने आप में व्यस्त हैं हमें किसी के भी अपने के दुख-दर्द की नही पड़ी। आजकल आज हम नई पीढ़ी ऐसी तैयार कर रहें हैं। जो सफल तो होगी पर न उनमें संवेदनाऐ होंगी और न ही मानवीय जीवन मूल्य होंगे।आजकल सब ऑनलाईन रिलेशन बनाने में लगें हैं। जिसका परिणाम तनाव में वृध्दि और अपनों से दूरी बढ़ रही है।

“समाधान”

हमें बड़ों को साथ रखना होगा। उनके मानसिक स्वास्थ का भी ध्यान रखना होगा। उन्हें समय देना होगा जिससे वे मानसिक बिमारियों से ग्रसित न हों।हमें उनका सम्मान करना होगा जिससे बच्चों में मूल्यों का विकास होगा।उन्हें(वृध्दोंको) बोझ नही बल्कि जिम्मेदारी समझना होगा। क्योंकि हम नही चाहेंगे कि  हमारे अगली पीढ़ी हमें भी वृध्दाश्रमों की सैर कराये। हमें ऑनलाईन रिश्तों की बजाह परिवार और वास्विक रिश्तों को क्वालिटी टाईम देना होगा।हमें थोड़ा बड़ों को समझना होगा और थोड़ा खुद को समझाना होगा। इस तरह हम और हमारे बड़ों व बच्चों में सामांजस्य बनाना होगा तभी जाकर जनरेशन गैप कम होगा
कुसुम (करौली,राजस्थान)

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