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एक वास्तविक क्षेत्रीय बिजली व्यापार बाजार और भारत का योगदान : अनिल तिवारी

 

हिमालिनी, अंक अप्रील 2019 | भारत ने हाल ही में अपने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के माध्यम से संशोधित दिशानिर्देश जारी किया हैं जो दक्षिण एशियाई क्षेत्र में समावेशी और व्यवहार्य क्षेत्रीय बिजली व्यापार बनाने के लिए मंच की स्थापना करती है । २००० के दशक के प्रारंभ से, भारत पूरे दक्षिण एशियाई देशों को एक ही छत्र के नीचे लाने की कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्र में बिजली का प्रवाह पूरी तरह से हो सके । भारत का यह कदम बताता है कि भारत ‘पड़ोस पहले’ की नीति को अत्यधिक महत्व दे रहा है और संयुक्त रूप से समृद्धि और विकास प्राप्त करने में पड़ोसियों के साथ काम करने के बारे में गंभीर है ।

भारत सार्क मंच और अन्य द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार समझौतों के माध्यम से नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ एक क्षेत्रीय बिजली बाजार को स्थापित करने के प्रयास कर रहा है । इस संदर्भ में, सार्क फ्रेमवर्क एग्रीमेंट फॉर एनर्जी कोऑपरेशन और भारत( नेपाल पावर ट्रेड एग्रीमेंट पर २०१४ में हस्ताक्षर किए गए थे । विश्लेषकों ने क्षेत्रीय विद्युत व्यापार के लिए सार्क फ्रेमवर्क को अनुकरणीय बनाने के लिए भारतीय पहल का सराहना भी किया था । भारत इस रूपरेखा को बनाने में इतना उत्सुक था कि उसके मंत्री ने यहां तक कह डाला था कि “श्रीलंका से अपतटीय पवन ऊर्जा, अब पाकिस्तान या नेपाल को बिजली प्रदान करेगी । ”

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हालाँकि इस क्षेत्र में अभी काफी सारी परेशानी हो रही है पाकिस्तान से, जिसके कारण क्षेत्रीय और सार्थक सहयोग के इन कामों में अभी काफी धीमापन आ गया है । पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी तत्वों को दिए गए प्रत्यक्ष समर्थन और अंतहीन मौन ने, भारत को सार्क पहल में अपने बढ़ते योगदान पर सोचने को विवश कर दिया है और इसी कारण भारत ने २०१६ में ऊर्जा दिशानिर्देशों को संशोधित कर दिया । लेकिन अभी फिलहाल में ही भारत ने अपने ऐतिहासिक पड़ोसी देश नेपाल के अनुरोध पर ध्यान दिया है और उनके द्वारा अनुरोध किया गया नवीनतम दिशानिर्देशों पर अपनी सहमति भी व्यक्त कर दिया ।

नेपाल और भूटान के लिए, पनबिजली के माध्यम से उर्जित बिजली का पूरा उपयोग होना बहुत जरूरी है, ताकि वो निर्धारित समय में अपने विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सके । नेपाल को अपनी बिजली को बेचने के लिए भारत और बांग्लादेश जैसे बाजार की जरूरत है । इसी संदर्भ में अब भारत के द्वारा माना गया नवीनतम दिशानिर्देश नेपाल को भारत और बांग्लादेश को अतिरिक्त उत्पन बिजली को बेचने में सक्षम बनाएंगे । हमारे देश के उद्योगपतियों ने नए दिशा निर्देशों का स्वागत करते हुए, नेपाल बिजली उद्योग में निवेश किया है । उनका विचार है कि नए दिशानिर्देश बिजली व्यापार में गति पैदा करेंगे और नेपाल और भूटान जैसे हिमालयी देशों को काफी मदद करेंगे, जिनकी अर्थव्यवस्थाएं पर्यटन, छोटे उद्योगों और जल विद्युत पर अत्यधिक निर्भर हैं ।

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क्षेत्रीय बाजार में सभी व्यापारियों के लिए एक स्तर पे व्यापार को सक्षम करने में यह नया दिशानिर्देश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा । ये नए दिशानिर्देश त्रिपक्षीय ऊर्जा व्यापार समझौतों के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर रहा हैं, जिसमें किसी देश में उत्पन्न बिजली को पड़ोसी देश के क्षेत्र या किसी भी तीसरे देश में खपत किया जा सकता है । उदाहरण के लिए, अब हमारे जलविद्युत संयंत्रों में उत्पादित बिजली को बांग्लादेश या श्रीलंका में खपत करने के लिए भारत के द्वारा भेजा जा सकता है ।

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दक्षिण एशियाई देशों को एक स्थायी क्षेत्रीय रूपरेखा बनाते हुए इस गति को आगे बढ़ाना चाहिए, जिसमें एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बिजली के प्रवाह को आसान बनाने के लिए संयुक्त और स्वतंत्र अवसंरचना का निर्माण किया जाना चाहिए । यह पहल निस्संदेह ‘एक साथ बढ़ने’ में सहायता करेगा । इस समय में जहां लगभग हर देश के बीच सीमा पे दीवार और तंग आव्रजन नीतियाँ है, वहीं विश्व समुदाय ने पहले ही उल्लेख किया है कि भारत नेपाल संबंध, उनके बीच की खुली सीमा और लोगों की मुक्त आवाजाही,अद्वितीय और विशेष है । इसे बनाए रखा जाना चाहिए और सहयोग और संयुक्त विकास के लिए अन्य क्षेत्रों का पता लगाया जाना चाहिए, जिससे दोनों देश तरक्की कर पाए ।

 

अनिल तिवारी, बीरगंज

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