आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू, इक तिरा ज़िक्र था और बीच में क्या क्या निकला
ढूँढते ढूँढते ख़ुद को मैं कहाँ जा निकला
सरवर आलम राज़

ढूँढते ढूँढते ख़ुद को मैं कहाँ जा निकला
सरवर आलम राज़