Fri. May 1st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं : दुष्यंत कुमार

 

 

नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं
जरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं

वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है
मेरे बयान को बंदिश निगल न जाए कहीं

यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन
ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं

तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी है
तमाम उम्र नशे में निकल न जाए कहीं

कभी मचान पे चढ़ने की आरज़ू उभरी
कभी ये डर कि ये सीढ़ी फिसल न जाए कहीं

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 29 अप्रैल 2026 बुधवार शुभसंवत् 2083

ये लोग होमो-हवन में यकीन रखते है
चलो यहां से चलें, हाथ जल न जाए कहीं

 

ये शफ़क़ शाम हो रही है अब

और हर गाम हो रही है अब

जिस तबाही से लोग बचते थे

वो सरे आम हो रही है अब

अज़मते—मुल्क इस सियासत के

हाथ नीलाम हो रही है अब

शब ग़नीमत थी, लोग कहते हैं

सुब्ह बदनाम हो रही है अब

जो किरन थी किसी दरीचे की

यह भी पढें   ऐसी सरकार जो गरीबों का निवाला छीनती है और उनका घर तोड़ती है वह असफल सरकार है – हर्क साम्पाङ

मरक़ज़े बाम हो रही है अब

तिश्ना—लब तेरी फुसफुसाहट भी

एक पैग़ाम हो रही है अब

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *