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पवित्र नगरी की अपवित्र कथा:कैलास दास

 

जनकपुर । कहते है ‘अन्यत्र किया
गया पाप जनकपुर दर्शन से मिट जाता है,
जनकपुर में किया गया पाप अन्यत्र कही
नहीं मिटता।’ यह वो नगर ी है, जहाँ आदर्श
नार ी सीता का जन्म हुआ था । पुरुषोत्तम
भगवान र ाम ने यहाँ आकर धनुष तोडÞा था
और सीता से शादी र चाई थी । इसीलिए
चार ों धामों में सबसे उत्कृष्ट ‘धाम’ के नाम
से जनकपुर जाना जाता है । यहाँ जो भीर्
पर्यटक आते हैं, वे जनकपुर की नार ी को
माँ सीता की दृष्टि से देखा कर ते हैं ।
लेकिन दर्ुभाग्य ही कहंे की मन्दिर
और मन्दिर के आसपास जहाँ अस् था एवं
निष्ठापर्ूवक पूजा(पाठ की जाती हैं, मन की
शान्ति एवं कामना पूर ी होती है,
वही पर यौन व्यवसाय में लगी
महिला-पुरुष की तलाश में बैठी
र हती है । वैसे कहें तो धनुष
सागर , गंगासागर , श्मशान घाट
और जानकी मन्दिर के विवाह
मण्डप पार्क के अगल(बगल में
तो खुले आम यौनकर्मी महिलाएं
अपनी पहिचान बनाए हर्ुइ हैं ।
आर्श्चर्य की बात तो यह है
कि इस में आप ऐसी भी महिला
को देखेंगे, जो माँ व दादी की
उम्र की होगी । लेकिन वो महिला
नेपाल(भार त के जिले से आए
हुए दर्शनार्थी से मन्दिर के बार े
में बाते कर ते(कर ते अपने पास
र खी कुछ फोटो भी देखाती है
और कहती है ‘इन में से आपको
कौन सी पसन्द है’ जब बात
मिल जाती है तो वो महिला
जनकपुर की किसी लाँज में ले
जाती है और अपनी कमिशन
लेकर फिर से दूसर े ग्राहक की
खोज में लग जाती है ।
जनकपुर की लाँज की
बातें कर े तो कुछ वर्षपहले खास कर ग्रामीण
क्षेत्र की जनता लाँज
क्या होती है, जानती भी नहीं
थी । अर्थात् मुश्किल से २(४ लाँज र हा
होगा, वो भी हमेसा सूनसान । कभीकभार
मेला उत्सव में बाहर से आए हुए लोग लाँज
में र हा कर ते थे । लेकिन ५ वर्षके भीतर
कर ीबन ३०(३५ लाँज खुल चुके हैं । जहाँ
न सडक है न मन्दिर वहाँ भी लाँज अवश्य
मिलेगा । जनकपुर को इस दृष्टि से देखा
जाए तो धार्मिक, पर्यटकीय क्षेत्र का विकास
अगर १० प्रतिशत के अनुपात में हुआ है तो
९० प्रतिशत विकृति का
विकास हुआ है ।
हम आवाज उठाते
है- जनकपुर को धार्मिकर्
पर्यटकीय स् थल बनाया
जाए । मिथिला की र ाजधानी
जनकपुर को बनाया जाए ।
जहाँ पवित्र आत्मा की बास
होती है । लेकिन काठमाडौं
के र त्नपार्क और जनकपुर
के धनुषसागर पोखर ी,
बार ह विघा -र ंगभूमि
मैदान), संकटमोचन
मन्दिर के अगल-बगल
में देखा जाए तो कोई र्फक नहीं
दिखाई देगा ।
आप बाहर से आए हैं और लाँज
लेना चाहते है तो लाँज मालिक आपसे
सवाल कर ेगा । आप कितने घण्टे के लिए
लेना चाहते है । एक(दो वा तीन घण्टे ।
अगर आप २४ घण्टे के लिए लाँज में
र हना चाहते है तो लाँज मालिक पहले
बोल देगा(‘जी खाली नहीं है ।’ क्यो कि
२४ घण्टे में उसका लाँज ४(५ बार बुक
द्यबिअप उबनभ।ष्लमम द्धद्ध ज्ञण्रघरद्दण्ज्ञद्द ज्ञण्स्ज्ञडस्द्दज्ञ ब्ः
हिमा  लिनी  अिक्टूबर/२०१२ द्धछ
होता है । यही कार ण है कि जनकपुर में
प्रत्येक सडÞक और गल्ली में लाँज देखने
को मिलेगा । इतना ही नहीं अगर आपका
चिर परि चित व्यक्ति मिल गया और लाँज में
बैठे हैं कहेंगे तो वह बोलेगा- ‘क्या बात है
यार तुम लाँज में भी जाने लगे ।’
न कोई पर्व और नहीं मेला । लेकिन
जनकपुर के लाँज हमेसा भर े र हते है ।
इसका एक ही कार ण है- लाँज मालिक भी
खुलेआम यौन व्यवसाय में लगा है । बिहार
के सीतामढी, मधुबनी सहित के जिला से
यौनकर्मियों का आयात होता है । और यौन
व्यवसाय फलता-फूलता है ।
मगर ऐसी भी बात नहीं है
कि किसी को यह मालूम नहीं
हो । सबको पता है लेकिन ‘
बिल्ली के गर्दन में घण्टी
कौन बाँधेगा’ अर्थात् र्व्यर्थ में
दुश्मनी कौन मोल लेगा ।
जब पंक्तिकार ने एक
पुलिस से इस सिलसिले
बात की तो उसने कहा- ‘
ऊपर से कुछ भी आदेश नहीं
है और यहाँ के लोग किसी
प्रकार का शिकायत नहीं
कर ते हैं । किस आधार पर
हम कार वाही कर ें -‘ लेकिन
सच यह नहीं है । व्यवसायी
र ोशन शेखर के अनुसार हम
लोग जब भी पुलिस को इस
बार े में बतलाते हैं तो वो आता जरुर है ।
लाँज मालिक से बाते भी कर ता है । कुछ
घण्टों के लिए लाँज खाली भी कर बाता है,
फिर ढाक के वही तीन पात । हमने पुलिस
को कई बार सादे पोशाक में आकर लाँज
मालिक से मिलकर चलते भी देखा । अर्थात्
इन मौको पर पुलिस को भी अच्छी कमाई
हो जाती है ।
नेपाल परि वार नियोजन संघ और मेर ी
स् टोप्स द्वार ा प्रस् तुत किया गया तथ्यांक के
अनुसार धनुषा में ६०० से अधिक एड्स
र ोगी हैं । जिन में एचआईभी एड्स र ोगी २
सौ ९७ पुरुष, २ सौ ५१ महिला तथा ३ तीसर े
लिङ्गी है । इतना ही नहीं लगभग १०० के
आसपास में बालबालिका में भी एचआईभी
एड्स देखा गया है । परि वार नियोजन संघ
धनुषा के सभापति जितेन्द्रप्रसाद साह के
अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के महिला तथा पुरुष
शर म के कार ण भी इलाज के लिए सामने
नहीं आ र हे है । सही तरि का से इसका
निर ीक्षण और जाँच पडताल किया जाए तो
संख्या हजार में पहुँच सकती है ।
जनकपुर से १७ किलो मिटर दक्षिण
महोत्तर ी के जलेश्वर में भी आधा दर्जन
लाँज खुल चुका है, इसका एक ही कार ण
है देहव्यापार । नेपाल पत्रकार महासंघ
महोत्तर ी के सचिव नागेन्द्र लाल कर्ण्र्ााे
अनुसार महोत्तर ी अभी भी विकास के
मामले में बहुत ही पीछे है । लेकिन वैदेशिक
र ोजगार ी के कार ण यहाँ भी यौन व्यवसाय
तेजी से बढÞ र हा है । परि वार नियोजन संघ
बर्दिवास महोत्तर ी के संयोजक धीर ज पौडेल
के अनुसार अभी तक ४५ एड्स र ोगी है,
जिस में चार बालबालिका भी है । उनके
अनुसार सही अर्थ में जाँच की जाए तो यह
संख्या सय तक पहुँच सकती है ।
जनकपुर में महिला अधिकार कर्मी की
भी कमी नहीं है । हर ेक मिटिङ्ग, समार ोह
आदि में खुलकर बाते कर ती है- महिला
हिंसा की, बलात्कार की, शोषण की, दमन
की, अधिकार की । लेकिन उसके आगे ही
महिला यौन व्यवसाय कर ती और वो चुपचाप
देखती र हती हैं । मानव अधिकार वादी
विजय दत्त कहते हैं- इसका मुख्य दोषी
सर कार भी है । महंगाई दिन प्रतिदिन बढती
ही जा र ही है । अपने देश में र ोजगार ी नहीं
मिलने पर नेपाल के अधिकांश युवकों को
खाडी मुलुक मलेसिया, दर्ुबई, कतार , साउदी
अर ब, बहर ाईन, अमेरि का तथा भार त में
जाना पडÞता है । उस में भी सर कार ने दो
वर्षतक वहाँ पर र हना पडेगा ऐसा कानून
बनाया है । कभी कभार तो पैसे के लालच
में नेपाली जनता १० वर्षतक विदेशों में
गंवा देते है । इस बीच खास कर ग्रामीण
क्षेत्र की महिला अभिभावक विहीन हो जाती
है और आननफानन में गलत क्रियाकलाप
में फंस जाती है ।
पत्रकार महासंघ धनुषा
के पर्ूव सभापति उमेश साह
के अनुसार यहाँ ‘अपना काम
बनता, भाँड में जाए जनता’
सोच की र ाजनीतिकर्मी है ।’
जहाँ न शिक्षा है और ना ही
र ोजगार ी, वहाँ तो स् वाभाविक
है यौन व्यवसाय का बढÞना ।
लेकिन अधिवक्ता लक्ष्मण पौडेल
कहते हैं -इसके जिम्मेवार हम
सभी हैं । सामाजिक वातावर ण
कैसा बनाया जाए हम सबका
दायित्व भीतर की बात है ।
तर्सथ जनकपुर के धार्मिकर्
पर्यटक बनाने के लिए यहाँ
के बुद्धिजीवी, नागरि क समाज
सहित के व्यक्ति सब को आगे
आना होगा । तभी हम सभ्य और विकृति
र हित समाज का निर्माण कर पाएंगे ।
ऐसे कुकृत्य को र ोकने के लिए
यौनकर्मी को इसके दुष्परि णाम के सम्बन्ध
में जानकार ी कर ाकर अन्य व्यवसाय की
ओर आकषिर्त कर ने की जरुर त है ।
वैसे र ाष्ट्रिय एड्स तथा यौनर ोग
नियन्त्रण शाखा ने वि.सं. २०६५ में नेपाल
में २० वर्षमें ७२ हजार एड्स संक्रमित
है अनुमानित तथ्यांक प्रस् तुत किया था ।
जिसमे १२ हजार ५ सय ४७ व्यक्ति उपचार
के क्रम में थे । एड्स र ोगी में से ८ हजार
३ सय ९७ पुरुष थे । जिन में से एड्स
संक्रमित १५ से ४९ तक की उमेर के
लोग थे ।

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