Thu. Jan 23rd, 2020

मधेश कभी बांझ नहीं हो सकता ? : ई. आरपी सिंह

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सिरहा | मुद्दा और लक्ष्य न तो मानव द्वारा निर्मित होते हैं और ना ही मरते हैं; अपितु आत्मा परिवर्तन करता हैं | किसी नेता या कुछ नेतृत्व वर्ग की व्यबस्थापन से मुद्दा का व्यबस्थापन नहीं होता है | उत्पीड़ित, सिमांतकृत और औपनिबेशीक प्रताड़ना में जीवन व्यतीत करने को मजबूर और लाचार जनता की भलाई नहीं होती है | फलतः एक झकझोर की संभावनाए बनी रहती हैं, खून का प्यासा बिद्रोह राह देखता रहता है, साम्राज्यवाद के खात्मा अपना दिन गिनते रहते हैं | इतिहास अपने आप में दोहराती हैं |

बहुत पहले की बात छोड़ते हुए बिगत के दशक के बारे में देखने पर भी यह तथ्य साफ नजर आता है | २०६३/६४ मधेश आन्दोलन से रातो-रात मशीहा के रूप में उदयमान व्यक्ति भी वक्त के साथ डूब गया क्योंकि उन्होंने मधेश मुद्दा को छोड़ दिया, एजेंडा को बेच खाया और उस यथार्थ मुद्दा को शिरोधार्य करते हुए एक नया मशीहा का अवतरण हुआ |

नियति के काल-चक्र घूमता रहा और नव-मशीहा ने भी मधेश माँ को धोखा देते हुये मंजर जनता देखने लगी और यह निश्चित हैं, जो भी इस भूमि से गद्दारी करेगी उनका पतन होगा ही | मधेश वह उर्वर भूमि हैं जो अपने शान बरकरार रखने हेतु, अपनी गौरब गाथाएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने हेतु कुछ कपूत को छोड़ते हुए फिर से बीर पैदा कर सकती हैं | मधेश आजादी हेतु मधेश माँ को फिर से धैर्यधारण करते हुए कुछ सपूतों को उभारना है | और यह होगा, होकर रहेगा क्यों कि यह भूमि की उर्वरा-शक्ति कभी खत्म नहीं हो सकती, मधेश कभी बांझ नहीं हो सकता ?

ई. आरपी सिंह
गोलबजार-१३, सिरहा
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