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दीपावली : कैसे करें लक्ष्मी-पूजन

 

लक्ष्मी अर्थात धन की देवी महालक्ष्मी विष्णु पत्नी का पूजन कार्तिक अमावस्या को सारे भारत के सभी वर्गों में समान रूप से पूजा जाता है। इस बार दीपावली 13 नवंबर को अमावस्या क्षय तिथि में मनाई जाएगी।

कैसे करें लक्ष्मी-पूजन
* लक्ष्मीजी के पूजन में स्फटिक का श्रीयंत्र ईशान कोण में बनी वेदी पर लाल रंग के कपडे़ पर विराजित करें साथ ही लक्ष्मीजी की सुंदर प्रतिमा रखें।

* इसके बाद चावल-गेहूं की नौ-नौ ढेरी बनाकर नवग्रहों का सामान बिछाकर शुद्ध घी का दीप प्रज्ज्वलित कर धूप बत्ती जलाकर सुगंधित इत्रादि से चर्चित कर गंध पुष्पादि नैवद्य चढा़कर इस मंत्र को बोले – गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः गुरुर साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः॥

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* इस मंत्र पश्चात इस मंत्र का जाप करें- ब्रह्‌मा मुरारि-त्रिपुरांतकारी भानु शशि भूमि सुता बुधश्च। गुरुश्च, शुक्र, शनि राहु, केतवे सर्वे ग्रह शांति करा भवंतु।

* इसके बाद आसन के नीचे कुछ मुद्रा रखकर ऊपर सुखासन में बैठकर सिर पर रूमाल या टोपी रखकर, शुद्ध चित्त मन से निम्न में से एक मंत्र चुनकर जितना हो सके उतना जाप करना चाहिए।

ऊं श्री ह्रीं कमले कमलालये। प्रसीद् प्रसीद् श्री ह्रीं श्री महालक्ष्म्यै नम:।
ओम्‌ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हं सोः जगत प्रसूत्ये नमः

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शास्त्रों में कहा गया है कि इन मंत्रों के श्रद्धापूर्वक जाप से व्यक्ति आर्थिक व भौतिक क्षेत्र में उच्चतम शिखर पर पहुंचने में समर्थ हो सकता है। दरिद्रता-निवारण, व्यापार उन्नति तथा आर्थिक उन्नति के लिए इस मंत्र का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है।

ॐ श्री विष्णवे च विदमहे वासुदेवाय धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्‌।

सिद्ध मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्धलक्ष्म्यै नमः।

लक्ष्मी मंत्रों का जाप स्फटिक की माला से करना उत्तम फलदायी रहता है। कमलगट्टे की माला भी श्रेष्ठ मानी गई है।

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