प्रार्थना और प्रेम के बीच औरतें : रोहित ठाकुर
___ प्रार्थना और प्रेम के बीच औरतें ____
प्रार्थना करती औरतें
एकाग्र नहीं होती
वे लौटती है बार-बार
अपने संसार में
जहाँ वे प्रेम करती हैं
प्रार्थना में वे बहुत कुछ कहती है
उन सबके लिए
जिनके लिए बहती है
वह हवा बन कर
रसोईघर में भात की तरह
उबलते हैं उसके सपने
वह थाली में
चांद की तरह रोटी परोसती है
औरतें व्यापार करती हैं तितलियों के साथ
अपने हाथों से
रंगती है पर्यावरण
फिर औरतें झड़ती है आँसुओं की तरह
कुछ कहती नहीं
इस विश्वास में है कि
जब हम तपते रहेंगे वह झड़ेगी बारिश की तरह
एक दिन ।।
___ एक पुराने अलबम की तस्वीरें ___
मेरे पास उपनिषदों के
सूत्र नहीं हैं
एक पुराना एलबम है
जिसमें तस्वीरों के
चेहरे साफ़ नहीं हैं
फिर भी एक सम्मोहन है
उन लोगों की तस्वीरें
जो अलबम में हैं
उनकी रौशनी
मेरे पास है
इस रौशनी के बल पर
मैं सभ्यता के
उन अँधेरे कुओं से
होकर गुज़र रहा हूँ
जहाँ छुपाकर मनुष्यों ने
रख छोड़ा है प्रेम की
सघन स्मृतियों को
मैं उन्हें अपनी कविताओं में
प्रकाशित करूँगा |
रोहित ठाकुर

नाम रोहित रंजन ठाकुर
C/O – श्री अरुण कुमार , सौदागर पथ,
काली मंदिर रोड , हनुमान नगर , कंकड़बाग़ ,
पटना , बिहार , पिन कोड – 800026


