सभी मज़्हब सिखाते हैं शरण में गर कोई आये, तो अपनी जान से ज्यादह हिफ़ाज़त कीजिये साहब।
तिलक राज कपूर ‘राही’ ग्वालियरी

कभी न हुक्म में उसके इदारत कीजिये साहब
सदाकत से सदा उसकी इताअत कीजिये साहब।
इदारत- संपादन, एडीटरी
इताअत- आज्ञा-पालन, फ़र्माबरदारी, सेवा, खिदमत
न उसकी राह चलने में इनाअत कीजिये साहब
उसी के नाम पर, लेकिन इनाबत कीजिये साहब
इनाअत- विलंब, देर ढील, सुस्ती
इनाबत- ईश्वर की ओर फि़रना, बुरे कामों से अलग हो जाना, तौबा करना
उसी के नाम पर, लेकिन इनाबत कीजिये साहब
इनाअत- विलंब, देर ढील, सुस्ती
इनाबत- ईश्वर की ओर फि़रना, बुरे कामों से अलग हो जाना, तौबा करना
अगर कर पायें तो, इतनी इनायत कीजिये साहब
दिलों में फ़ूट की न अब, शरारत कीजिये साहब।
इनायत- कृपा
दिलों में फ़ूट की न अब, शरारत कीजिये साहब।
इनायत- कृपा
बड़ी मुश्किल से, अम्नो-चैन की तस्वीर पाई है
यही कायम रहे, ऐसी वकालत कीजिये साहब।
यही कायम रहे, ऐसी वकालत कीजिये साहब।
शहर के बंद रहने से कई चूल्हे नहीं जलते
न ऐसा हो कभी ऐसी इशाअत कीजिये साहब।
इशाअत- प्रचार, प्रसार
न ऐसा हो कभी ऐसी इशाअत कीजिये साहब।
इशाअत- प्रचार, प्रसार
जुनूँ छाया है दिल में गर किसी को मारने का तो,
मेरी है इल्तिज़ा इसकी इताहत कीजिये साहब।
इताहत- मार डालना, हलाक करना
इताहत- मार डालना, हलाक करना
वो मेरा हो, या तेरा हो, या इसका हो, या उसका हो
सभी मज़्हब तो कहते हैं इआनत कीजिये साहब।
इआनत- सहायता, मदद, सहयोग
सभी मज़्हब तो कहते हैं इआनत कीजिये साहब।
इआनत- सहायता, मदद, सहयोग
किसी मज़्हब में दुनिया के कहॉं नफ़्रत की बातें हैं
अगर वाईज़ ही भटकाये, खिलाफ़त कीजिये साहब।
वाईज़- धर्मोपदेशक
अगर वाईज़ ही भटकाये, खिलाफ़त कीजिये साहब।
वाईज़- धर्मोपदेशक
सियासत और मज़्हब जोड़ना फि़त्रत है शैतानी
इन्हें जोड़े अगर कोई, मलामत कीजिये साहब।
सियासत- राजनीति
मलामत- निंदा
इन्हें जोड़े अगर कोई, मलामत कीजिये साहब।
सियासत- राजनीति
मलामत- निंदा
जरूरी तो नहीं मंदिर औ गिरजा या हो गुरुद्वारा
सुकूँ मिलता जहॉं पर हो इबादत कीजिये साहब।
इबादत- उपासना, अर्चना, पूजा
सुकूँ मिलता जहॉं पर हो इबादत कीजिये साहब।
इबादत- उपासना, अर्चना, पूजा
अगर ये थम गया तो फिर तरक्की हो नहीं सकती
वतन चलता रहे ऐसी सियासत कीजिये साहब।
सियासत- राजनीति
वतन चलता रहे ऐसी सियासत कीजिये साहब।
सियासत- राजनीति
सभी मज़्हब सिखाते हैं शरण में गर कोई आये
तो अपनी जान से ज्यादह हिफ़ाज़त कीजिये साहब।
हिफ़ाज़त- रक्षा, बचाव, देख-रेख
तो अपनी जान से ज्यादह हिफ़ाज़त कीजिये साहब।
हिफ़ाज़त- रक्षा, बचाव, देख-रेख
अगर हम दूरियों को दूर ही रक्खें तो बेहतर है
मिटाकर दूरियॉं सारी रफ़ाकत कीजिये साहब।
रफ़ाकत- मैत्री, दोस्ती
कहॉं धरती सिवा जीवन वृहद् ब्रह्मांड में जाना
किसी भी जीव से फिर क्यूँ शिकायत कीजिये साहब?
किसी भी जीव से फिर क्यूँ शिकायत कीजिये साहब?
वकालत को अगर ‘राही’ बनाया आपने पेशा
न इन फ़िर्क़:परस्तों की हिमायत कीजिये साहब।
फ़िर्क़:परस्तों – साम्प्रदायिकता रखने वाले, साम्प्रादायिक भेदभाव फैलाकर आपस में लड़ाने वाले
न इन फ़िर्क़:परस्तों की हिमायत कीजिये साहब।
फ़िर्क़:परस्तों – साम्प्रदायिकता रखने वाले, साम्प्रादायिक भेदभाव फैलाकर आपस में लड़ाने वाले


