ई. घिसिङ और डॉ. रुइत ‘हेमबहादुर मल्ल सम्मान’ से सम्मानित
काठमांडू, २८ दिसम्बर
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निर्देशक ई. कुलमान घिसिङ और तिलगंगा आंखा अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सन्दुक रुइत को ‘हेमबहादुर मल्ल सम्मान’ से सम्मानित किया गया है । शुक्रबार काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के बीच उन लोगों को उप–राष्ट्रपति नन्दबहादुर पुन ने सम्मानित किया ।
नेपाल जन–प्रशासन संघ (पान) द्वारा साल्ट ट्रेडिङ कर्पोरेशन की सौजन्यता में स्थापित यह पुरस्कार प्रशासनिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करनेवालों में से हर साल एक व्यक्ति को दिया जाता है । इसी सन्दर्भ में में वि.सं. २०७३ साल की ‘हेमबहादुर मल्ल सम्मान’ से ई. कुलमान घिसिङ और वि.सं. २०७४ साल की ‘हेमबहादुर मल्ल सम्मान’ से डॉ. रुइत को सम्मानित किया गया है । पुरस्कार की राशि प्रतिव्यक्ति २ लाख रुपैयां है ।
सम्मान पत्र में कहा गया है कि नेपाल में लोडसेडिङ अंत करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करने के कारण ई. घिसिङ यह पुरस्कार दिया गया है । इसीतरह नेत्र चिकित्सा क्षेत्र में अतुलनीय योगदान कर इसको सर्वसुलभ बनाने के कारण डा. रुइत को उल्लेखित सम्मान से सम्मानित किया गया है ।

सम्मान कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उप–राष्ट्रपति नन्दबहादुर पुन ने कहा कि सम्मानित दोनों व्यक्तित्व नेपाली जन–जन के लिए अविस्मरणीय नाम है, हर व्यक्ति को उन लोगों की कर्म और अभियान को अनुशरण करनी चाहिए । ई. घिसिङ के संबंध में बोलते हुए उपराष्ट्रपति पुनः ने आगे कहा– ‘अगर नेपाल की प्रशासनिक क्षेत्र में रहे हर–कर्मचारी कुलमान के तरह सोचते हैं और काम करते हैं तो नेपाल को आर्थिक समृद्धि हासिल करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं लगेगा ।’ साथ में उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक क्षेत्र में सकारात्मक कार्य करनेवालों को पुरस्कृत और नकारात्मक कार्य करनेवालों को दण्डित करने का अभ्यास भी शुरु होना जरुरी है । डा. रुइत का योगदान पर चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति पुन कहा कि डा. इरुत लाखों लोगों के लिए एक भगवान की तरह हैं, जिन्होंने नेत्र चिकित्सा (मोतियाबिन्दू ऑप्रेशन) और लेन्स को सर्वसुलभ बनाया है ।

सम्मान ग्रहण करते हुए ई. घिसिङ ने कहा कि उनको प्राप्त ‘हेमबहादुर मल्ल सम्मान’ सिर्फ उनके लिए ही नहीं है, विद्युत प्राधिकरण में कार्यरत १२ हजार कर्मचारियों के लिए है । उनका मानना है कि सभी कर्मचारियों की साथ और समर्थन के कारण ही उनके नेतृत्व में नेपाल में लोडसेडिङ अन्त सम्भव हुआ है । उन्होंने कहा कि लोडसेडिङ अन्त होना कोई भी चमत्कार नहीं है, विद्युत की मांग और आपुर्ति में वैज्ञानिक सन्तुलन कायम करने से ही यह सम्भव हुआ है । ई. घिसिङ ने यह भी कहा है कि अब प्राधिकरण अधुरी आयोजना सम्पन्न करने के लिए और नाफा आर्जन के लिए क्रियाशील है ।
दूसरे सम्मानित व्यक्तित्व डा. रुइत ने कहा कि मोतियाबिन्दु उपचार पद्धति को आधुनिकीकरण करने के कारण ही आज लाखों लोग इससे लाभान्वित हुए हैं, जिसका श्रेय मुझे प्राप्त है । उन्होंने यह भी कहा कि आज विश्व के कई लोग आंख उपचार के लिए नेपाल आते हैं । डा. रुइत ने नेपाल की प्रशासनिक क्षेत्र आज कमजोर मनस्थिति में है, इसमें सुधार लाने की आवश्यकता है ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए साल्ट ट्रडिङ कर्पोरेशन के अध्यक्ष लक्ष्मीदास मानन्धर, राष्ट्रीय सूचना आयोग के आयुक्त तथा पुरस्कार छनौट समिति के संयोजक एवं पूर्व सचिव कृष्णहरि बास्कोटा, जन प्रशासन संघ के महासचिव रामशरण चिमोरिया, संघ के पूर्व अध्यक्ष चुणाराज शर्मा, कृष्णहरि ज्ञावली आदि ने ई. कुलमान घिसिङ और डा. सन्दुक रुइत एवं हेमबहादुर मल्ल सम्मान के बारे में चर्चा किए ।
कृष्णहरि बास्कोटा के संयोजकत्व में गठित ५ सदस्यीय छनौट (डा. हिरामणि घिमिरे, लक्ष्मीदास मानन्धर, चाँदनी जोशी और केदार खड्का) ने हेमबहादुर मल्ल सम्मान पुरस्कार ई. घिसिङ और डा. रुइत को देने का निर्णय लिया है । स्मरणीय है, हेमबहादुर मल्ल साल्ट ट्रेडिङ के ही पूर्व कर्मचारी तथा प्रमुख हैं, जिन्होंने साल्ट ट्रेडिङ की स्तरोन्नति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह किए है । बताया जाता है कि मल्ल आने से पूर्व साल्ट्रेडिङ की कारोबार वार्षिक १० लाख के आसपास ही था, मल्ल के नेतृत्व में ही संस्था १ अरब से अधिक कारोबार करने में सफल रहा है । इसीलिए मल्ल के ही सम्मान के खातिर वि.सं. २०५९ साल में ‘हेमबहादुर मल्ल सम्मान’ स्थापना की गई थी ।
प्रथम बार वि.सं. २०६० में शिक्षाविद् तथा पूर्व राजदूत केदारभक्त माथेमा इस पुरस्कार से सम्मानित हुए थे । उसके बाद चाँदनी जोशी, डा. भगवान कोइराला, डा. विमल कोइराला, महावीर पुन, अम्बिका श्रेष्ठ, भोजराज पोखरेल, दमननाथ ढुंगाना, प्रा.डा. सुरेशराज शर्मा, खिलराज रेग्मी, उमेश मैनाली, दामोदर गौतम, डा. देवेन्द्रराज पाण्डे जैसे व्यक्तित्व इस सम्मान से सम्मानि हो चुके हैं ।

