Tue. May 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

बात खतम : लक्ष्मण नेवटिया

Laxman Nevatiya
 

उसने कहा
क्या तुम अंधे हो
मैंने उधर देखा ही नही
बात उसने कह ली
और मैंने सह ली
बात खतम ।

उसने कहा
क्या तुम अपाहिज हो?
मैं उधर गया ही नहीं
बात उसकी रह ली
और मैंने सह ली
बात खतम ।

उसने कहा,
क्या तुम बहरे हो?
मैंने कर दी अनसुनी,
बात उसने कह ली,
और मैंने चुप रह सुन ली,
बात खतम ।

उसने कहा,
क्या तुम गधे हो,
मैं रहा चुप’
किया नहीं ढेचूं ढेचूं,
वह हो गया उदास,
बात खतम ।

यह भी पढें   खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग फिर से प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन

वो पीड़ित स्वयं इनसे,
मानसिक रूप से,
जीतना चाहता था मुझसे,
पर जब मैंने,
स्वयं मान ली हार,
बात खतम ।

लक्ष्मण नेवटिया,
विराटनगर -९

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *